‘Sahi Disha’, a poem by Devesh Path Sariya

रात के नौ बजे
मैं इस लगभग सुनसान रेस ट्रैक पर हूँ,
एक ऐसी जगह
जहाँ अच्छी सेहत का उत्सव मनाया जाता है।
चाँद आधा खिला है आज
और बहुत सारे बादल
परत दर परत बदल रहे हैं
पिघलकर आपस में मिल रहे हैं
जैसे उड़ रहे हों बुढ़िया के बाल।
इतने में देखता हूँ
आकाश में एक हवाई जहाज़
जो कुछ ही मिनट पहले रनवे से उड़ा होगा
और अब जा पहुँचा है बादलों की अंतरंगता में
एक अनचाहे पक्षी की तरह का हिस्सा होने
ऊपर, और ऊपर उठता हुआ
तारों से भी ऊपर चले जाने का भ्रम पैदा करता हुआ।
कुछ देर में उड़ जाएगा वह ताइवान की भौगोलिक सीमा के पार
उसके कुछ मिनट बाद उड़ रहा होगा
इस देश की समुद्री सीमा के परे
अन्तरराष्ट्रीय समुद्र के ऊपर
सनद रहे कि बाँटे जा चुके हैं समुद्र और आकाश भी।
मुझे कौंधता है, यह यान भारत भी जा रहा हो सकता है
जिसे इस देश के लोग यिंदू कहते हैं
और एक लड़की का उपालम्भ कानों में पड़ता है
“कितना दौड़ते हो तुम,
अगर इतना ही दौड़ते रहते सही दिशा में
तो पहुँच गये होते अब तक मेरे पास…”
दौड़ना, मानव सभ्यता का यातायात का सबसे पहला द्रुत साधन
मेरे पास ना आदिम मानव जितने मज़बूत पैर हैं
ना ही सही दिशा की ओर भाग जाने का साहस
मैं विवशता से देखता हूँ
जड़, स्थिर अपने पैरों को
और सबसे आधुनिक यातायात के साधन को
गुम होते हुए उस दिशा में
जो सही दिशा हो सकती है
अन्ततः, भारी क़दमों से दौड़ने लगता हूँ अण्डाकार ट्रैक पर
तभी दीख पड़ती है दौड़ती हुई एक गुलाबी फ़्रॉक वाली बच्ची
जिसने बमुश्किल एक साल पहले ही सीखा होगा चलना
मुहाने पर खड़े देख रहे हैं गर्व से उसके पिता
लुढ़कती-सी दौड़ती हुई गुलाबी गुड़िया को
मैं उस बच्ची के पीछे-पीछे
दौड़ने का स्वांग करते हुए चलने लगता हूँ
एक आप्रवासी युवा को ‘बचपन’ में मिल जाती है
तात्क्षणिक अस्थाई दिशा…

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देवेश पथ सारिया
प्राथमिक तौर पर कवि। गद्य लेखन में भी सक्रियता।पुस्तकें: 'हक़ीक़त के बीच दरार' (2021, वरिष्ठ ताइवानी कवि ली मिन-युंग के कविता संग्रह का मेरे द्वारा किया गया हिंदी अनुवाद) प्रथम कविता संकलन एवं ताइवान के अनुभवों पर आधारित गद्य की पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य।अन्य भाषाओं में प्रकाशन: मेरी कविताओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन चायनीज़, रूसी, स्पेनिश, पंजाबी, बांग्ला, और राजस्थानी भाषा-बोलियों में हो चुका है। मेरी रचनाओं के ये अनुवाद यूनाइटेड डेली न्यूज़, लिबर्टी टाइम्स, लिटरेरी ताइवान आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: हंस, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, कथादेश, कथाक्रम, परिकथा, पाखी, आजकल, बनास जन, मधुमती, कादंबिनी, समयांतर, समावर्तन, जनपथ, नया पथ, कथा, साखी, अकार, आधारशिला, बया, उद्भावना, दोआबा, बहुमत, परिंदे, प्रगतिशील वसुधा, शुक्रवार साहित्यिक वार्षिकी, कविता बिहान, साहित्य अमृत, शिवना साहित्यिकी, गाँव के लोग, कृति ओर, ककसाड़, अक्षर पर्व, निकट, मंतव्य, गगनांचल, मुक्तांचल, उदिता, उम्मीद, विश्वगाथा, रेतपथ, अनुगूँज, प्राची, कला समय, प्रेरणा अंशु, पुष्पगंधा आदि ।समाचार पत्रों में प्रकाशन: राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, प्रभात ख़बर, दि सन्डे पोस्ट।वेब प्रकाशन: सदानीरा, जानकीपुल, पोषम पा, लल्लनटॉप, हिन्दीनेस्ट, हिंदवी, कविता कोश, इंद्रधनुष, अनुनाद, बिजूका, पहली बार, समकालीन जनमत, मीमांसा, शब्दांकन, अविसद, कारवां, हमारा मोर्चा, साहित्यिकी, द साहित्यग्राम, लिटरेचर पॉइंट, अथाई, हिन्दीनामा।सम्मान: प्रभाकर प्रकाशन, दिल्ली द्वारा आयोजित लघुकथा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान (2021)संप्रति ताइवान में पोस्ट डाॅक्टरल शोधार्थी। मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ (अलवर) से संबंध।

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