समझ में ज़िन्दगी आए कहाँ से
पढ़ी है ये इबारत दरमियाँ से

यहाँ जो है तनफ़्फ़ुस ही में गुम है
परिंदे उड़ रहे हैं शाख़-ए-जाँ से

मकान-ओ-लामकाँ के बीच क्या है
जुदा जिससे मकाँ है लामकाँ से

दरीचा बाज़ है यादों का और मैं
हवा सुनता हूँ मैं पेड़ों की ज़बाँ से

था अब तक मारका बाहर का दरपेश
अभी तो घर भी जाना है यहाँ से

ज़माना था वो दिल की ज़िन्दगी का
तेरी फ़ुर्क़त के दिन लाऊँ कहाँ से

फुलाँ से थी ग़ज़ल बेहतर फुलाँ की
फुलाँ के ज़ख़्म अच्छे थे फुलाँ से!

नासिर काज़मी की ग़ज़ल 'दिल में एक लहर-सी उठी है अभी'

Book by Jaun Elia:

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जौन एलिया
(14 दिसम्बर 1931 - 8 नवम्बर 2002)उर्दू के मशहूर शायर।

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