आप जानते हैं
रॉल्फ़ फ़ाइंस को?

“तुम जानते हो कौन…
वो, जिसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए!”

हाँ वही,
जो वॉल्डेमॉर्ट बने थे हैरी पॉटर में
जिसे देख काँप उठती थी
बच्चों की रूह

रॉल्फ़ मुझे दिखे
वॉल्डेमॉर्ट के गेटअप में
पर अभी प्रविष्ट नहीं हुए थे वे
किरदार की रूह में
उस समय, मेरे सपने में
वे रॉल्फ़ फ़ाइंस ही थे

वे कुर्सी पर बैठे हुए थे
मैं मण्डराता रहा उनके पास
जितनी बार रॉल्फ़ दिखे, सहज दिखे
अभिवादन का विनम्रता से जवाब दिया

सपने में जब
शूटिंग ख़त्म हुई उस दिन की
वे घर जाने के लिए तैयार हो रहे थे
अभी मेकअप चेहरे से हटाना था शेष
उन्होंने मुझे देखा
और
पहचानकर अलविदा कहा

मैंने उनसे कहा
आप इतने अच्छे हैं रॉल्फ़
अगर कभी चुनने को कहा गया
हैरी पॉटर और वॉल्डेमॉर्ट के बीच,
मैं वॉल्डेमॉर्ट को वोट दूँगा

यह सुनकर रॉल्फ़
एकदम से बेचैन हुए
बोले—
“नहीं, नहीं…
वोट हैरी को ही देना,
हमेशा, हैरी ही को जीतना चाहिए!”

देवेश पथ सारिया की कविता 'ईश्वर (?) को नसीहत'

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देवेश पथ सारिया
कवि होना प्राथमिक परिचय। अन्य लेखन रुचियाँ: कथेतर गद्य और कविताओं का अनुवाद। ताइवान में स्टार क्लस्टर्स और एक्सट्रासोलर प्लैनेट्स पर शोधरत। मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ (अलवर) से सम्बन्ध।पुस्तकें: 'हक़ीक़त के बीच दरार' : वरिष्ठ ताइवानी कवि ली मिन-युंग की कविताओं के मेरे द्वारा किये गए अनुवाद की पुस्तक प्रकाशित। प्रथम कविता संकलन एवं ताइवान के अनुभवों पर आधारित गद्य की पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य।साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: हंस, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, कथादेश, कथाक्रम, परिकथा, पाखी, आजकल, बनास जन, मधुमती, कादंबिनी, समयांतर, समावर्तन, जनपथ, नया पथ, कथा, साखी, अकार, आधारशिला, बया, उद्भावना, दोआबा, बहुमत, परिंदे, प्रगतिशील वसुधा, शुक्रवार साहित्यिक वार्षिकी, कविता बिहान, साहित्य अमृत, शिवना साहित्यिकी, गाँव के लोग, कृति ओर, ककसाड़, अक्षर पर्व, निकट, मंतव्य, गगनांचल, मुक्तांचल, उदिता, उम्मीद, विश्वगाथा, रेतपथ, अनुगूँज, प्राची, कला समय, पुष्पगंधा आदि ।समाचार पत्रों में प्रकाशन: राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, प्रभात ख़बर, दि सन्डे पोस्ट।वेब प्रकाशन: सदानीरा, जानकीपुल, पोषम पा, लल्लनटॉप, हिन्दीनेस्ट, हिंदवी, कविता कोश, इंद्रधनुष, अनुनाद, बिजूका, पहली बार, समकालीन जनमत, मीमांसा, शब्दांकन, अविसद, कारवां, हमारा मोर्चा, साहित्यिकी, द साहित्यग्राम, लिटरेचर पॉइंट, अथाई, हिन्दीनामा।विशिष्ट: मेरी कविताओं का अनुवाद मंदारिन चायनीज़, अंग्रेज़ी, स्पेनिश, पंजाबी, बांग्ला और राजस्थानी भाषा-बोलियों में हो चुका है।

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