सर्दियाँ

‘Sardiyaan’, Hindi Kavita by Rakhi Singh

कवि ने कहा है-
‘दुनिया को
हाँथ की तरह गर्म और सुन्दर होना चाहिए।’
मेरा उनसे क्षमा माँगने का मन है
अभी कल ही तो मैं किसी दोस्त से कह रही थी,
संसार की हर सुन्दर शै को ठण्डा होना चाहिए।

कवि क्या तुम
किन्हीं नर्म मुलायम
ठण्डी हथेलियों के
स्पर्श से अनभिज्ञ रहे?

देखो कैसी,
बर्फ़ की दो सफ़ेद सिल्लियाँ
बनी हुई हैं हथेलियाँ मेरी

दस्ताने गुमा दिए हैं मैंने
सब कहते हैं,
मैं जानबूझ के वस्तुओं को गुम करती हूँ।

मैं उनसे कुछ नहीं कहती,
गुम करना मेरा पसंदीदा शग़ल है।
ऐसा करके
मैं गुम हुई वस्तु को
अपनी उपलब्धता की कमी महसूस कराना चाहती हूँ।
ऊन की बुनाई में पसीने से तर-बतर दस्तानों को
मेरी ठण्डी हथेलियों के स्पर्श की कमी खलती तो होगी।

मैं जताना नहीं चाहती
छुपा भी नहीं पाती
दूरी अखरती है।
कवि तुम किसी से न कहना,
मैंने गर्म लिफ़ाफ़े में
पश्मीने की भाँति तह करके
उन तक सर्दियों का एक संदेश भेजा है-
“तुम अनुमति दो
तो इन भभकते गालों की भट्ठी में
सेंक लूँ मैं हथेली अपनी।”

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