टॉर्च बेचने वाले

वह पहले चौराहों पर बिजली के टॉर्च बेचा करता था। बीच में कुछ दिन वह नहीं दिखा। कल फिर दिखा। मगर इस बार उसने...

स्विस बैंक में खाता हमारा

हज़रात! मैं किसी मजबूरी और दबाव के बगै़र और पूरे होश-व-हवास के साथ ये एलान करना चाहता हूँ कि स्विट्ज़रलैण्ड के एक बैंक में...

लगभग जैसा लगभग

'Lagbhag Jaisa Lagbhag', a satire by Nirmal Gupt मैं गाड़ी की चाभी कई बार घुमा चुका हूँ। पर वह स्टार्ट नहीं हो रही। ’घू घू’...

रामायण

'Ramayan', a satire (hasya vyangya) from Khattar Kaka by Hari Mohan Jha खट्टर काका रामनवमी के फलाहार के लिए किशमिश चुन रहे थे। मैंने कहा- "खट्टर...

वर्जीनिया वुल्फ से सब डरते हैं

'Virginia Woolf Se Sab Darte Hain', Hasya Vyangya by Sharad Joshi कुछ दिन हुए हमारे शहर में वह मशहूर पिक्चर लगी, जिसका नाम है 'हू...

छुपा हुआ मुँह और खुला खेल

'Chhupa Hua Muh Aur Khula Khel', Hindi satire by Nirmal Gupt स्कार्फ़ या दुपट्टे से मुखड़ा छिपा लेना मेरे शहर की अधिकांश फैशनेबल रूपसियों के...

नाक तो बहरहाल नाक ही है

'Naak Toh Beharhaal Naak Hi Hai', Vyangya in Hindi by Nirmal Gupt मेरे चेहरे पर एक अदद नाक है। होगी ही। होनी ही है। अभी...

उस देश का यारो क्या कहना!

उस देश का यारो क्‍या कहना? और क्‍यों कहना? कहने से बात बेकार बढ़ती है। इसीलिए उस देश का बड़ा वज़ीर तो कुछ कहता...

फ़ेसबुक, आधार और मौज़-मस्ती

हाल में दो बड़ी बातें हुईं। अलग-अलग आकार-प्रकार की दो उदास सूचनाएँ मिलीं। एक ख़बर तो यह रही कि छोटी बचत पर ब्याज दर...

दिमाग़ वालों सावधान!

आदमी मज़बूत मगर मजबूर प्राणी है। कई नमूने हैं उसके। कुछ दिमाग़ वाले, कुछ बिना दिमाग़ के, कुछ पौन दिमाग़ के, कुछ पाव दिमाग़...

इश्क़ की बीमारी में गिरफ़्त

अभी पिछली बीमारी से 'मुक्ति' पाया ही था कि एक नई बीमारी ने आकर मुझे घेर लिया। यह 'इश्क़ की बीमारी' है। अतः इस...

हमारा प्राचीन साहित्य

अपने प्राचीन साहित्‍य से मेरा अभिप्राय अपने उस साहित्‍य से है जो कि प्राचीन है। हमारा प्राचीन साहित्‍य मुख्‍यतः संस्‍कृत में है और उसे...

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Rabindranath Tagore

साहित्य की सामग्री

राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित 'साहित्य विधाओं की प्रकृति' से  अनुवाद : वंशीधर विद्यालंकार केवल अपने लिए लिखने को साहित्य नहीं कहते हैं—जैसे पक्षी अपने आनंद के...
Faiz Ahmad Faiz

इस वक़्त तो यूँ लगता है

इस वक़्त तो यूँ लगता है, अब कुछ भी नहीं है महताब न सूरज, न अँधेरा न सवेरा आँखों के दरीचों पे किसी हुस्न की चिलमन और...
Bheedtantra - Asghar Wajahat

‘भीड़तंत्र’ से दो लघु कहानियाँ

राजपाल एण्ड सन्ज़ से प्रकाशित असग़र वजाहत की किताब 'भीड़तंत्र' से साभार स्वार्थ का फाटक —“हिंसा का रास्ता कहाँ से शुरू होता है?” —“जहाँ से बातचीत का...
Pratibha Sharma

लाल रिबन

मेरे गाँव में सफ़ेद संगमरमर से बनी दीवारें लोहे के भालों की तरह उगी हुई हैं जिनकी नुकीली नोकों में नीला ज़हर रंगा हुआ है खेजड़ी के ईंट-चूने...
Subhadra Kumari Chauhan

यह कदम्ब का पेड़

यह कदम्ब का पेड़ | Yah Kadamb Ka Ped यह कदम्ब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे। मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥ ले...
Sleepless, Person sitting

यह स्त्री सोयी नहीं है

बहुत अर्से से यह स्त्री सोयी नहीं है उसकी आँखों के नीचे पड़े काले घेरे इसका प्रमाण हैं समस्त सृष्टि को अपने आग़ोश में लेकर उसे विश्राम दिलाने का दावा करती रात्रि का...
Trilochan

तुम्हें जब मैंने देखा

पहले पहल तुम्हें जब मैंने देखा सोचा था इससे पहले ही सबसे पहले क्यों न तुम्हीं को देखा! अब तक दृष्टि खोजती क्या थी, कौन रूप, क्या रंग देखने को उड़ती थी ज्योति-पंख...
Amir Khusrow

अमीर ख़ुसरो के दोहे

अमीर ख़ुसरो के दोहे | Amir Khusro Ke Dohe ख़ुसरो रैन सुहाग की, जागी पी के संग। तन मेरो मन पियो को, दोउ भए एक रंग॥ ख़ुसरो...
Meena Keshwar Kamal

मैं कभी पीछे नहीं लौटूँगी

मैं वह औरत हूँ जो जाग उठी है अपने भस्‍म कर दिए गए बच्‍चों की राख से मैं उठ खड़ी हुई हूँ और बन गयी हूँ एक...
Dinkar

अवकाश वाली सभ्यता

मैं रात के अँधेरे में सितारों की ओर देखता हूँ जिनकी रोशनी भविष्य की ओर जाती है अनागत से मुझे यह ख़बर आती है कि चाहे लाख बदल...
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