अवैध कोचिंग में आग लग जाती है
दमकल की गाड़ियाँ नीचे खड़ी हैं
बच्चे चौथी मंजिल से कूद रहे हैं,
सीढ़ियाँ पहुँच नहीं पातीं
इक्कीस घरों के चिराग जलकर राख हो गए
राख में परिवार अपने आँखों के तारों को खोज रहा है
खोज रहा है अपने सपने को
राख हो चुके लोथड़ों में
लेकिन अफसोस हाथ लगती है सिर्फ राख
आप पूछोगे कौन जिम्मेदार?
वो कहेंगे दुखद घटना है सवाल मत पूछो
इस पर भी राजनीति?
ईश्वर आत्मा को शान्ति दे
पाँच लाख मुआवजा ले जाओ
और मई जून में आग लगना कौन सी नई बात है?
मई जून में आग लगती ही है, लोग मरते ही हैं
बच्चे मर गए थे ऑक्सीजन की कमी से
तो क्या हुआ, अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं
सवाल मत पूछो
इस पर राजनीति मत करो
हृदय व्यथित है
सम्वेदना व्यक्त कर लो
दुखद घटना है
कड़ी निंदा कर लो
मन व्यथित है
जाँच का आदेश दे देते हैं
कड़ी कार्रवाई करेंगे
और फिर हम भूल जाते हैं
करते हैं मौत के अगले महीने का इंतजार
यही हमारी नियति है
हमने अपनी आँखों से बच्चों को मरते देखा
कुछ मेरी ही उम्र के थे
मेरे ही भाई-बहन थे
वो मर गए, मैं भी मर जाऊँगा एक दिन
लेकिन मैं सवाल नहीं पूछूँगा
क्योंकि सवाल पूछना गुनाह है
वे नाराज हो जाएंगे
इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए
क्योंकि इससे उनकी सफेदी पर पड़े खून के छीटें सामने आ जाएंगे
निश्चिन्त रहिए… मैं सवाल नहीं पूछूँगा
आओ करते हैं किसी ‘सूरत’ का फिर से इंतजार…

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