असली सवाल है कि मुख्यमन्त्री कौन होगा?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि ठाकुरों को इस बार कितने टिकट मिले?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि ज़िले से इस बार कितने मन्त्री होंगे?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि ग़फ़ूर का पत्ता कैसे कटा?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि जीप में पीछे कौन बैठा था?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि तराजू वाला कितना वोट काटेगा?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि मन्त्री को राजदूत बनाना अपमान है या नहीं?

नहीं नहीं, असली सवाल है
कि मेरी साइकिल कौन ले गया?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि खूसट बुड्ढों को कब तक बरदाश्त किया जाएगा?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि गैस कब तक मिलेगी?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि अमरीका की सिट्टी-पिट्टी क्यों गुम है?

नहीं नहीं, असली सवाल है
कि मेरी आँखों से दिखायी क्यों नहीं पड़ता?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि मुरलीधर बनता है
या सचमुच उसकी पहुँच ऊपर तक है?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि पण्डित जी का अब क्या होगा?

नहीं नहीं, असली सवाल है
कि सूखे का क्या हाल है?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि फ़ौज क्या करेगी?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि क्या दाम नीचे आएँगे?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि मैं किसको पुकारूँ?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि क्या यादवों में फूट पड़ेगी?

नहीं नहीं, असली सवाल है
कि शहर के ग्यारह अफ़सर
भूमिहार क्यों हो गए?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि बलात्कार के पीछे किसका हाथ था?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि इस बार शराब का ठीका किसे मिलेगा?

नहीं नहीं, असली सवाल है
कि दुश्मन नम्बर एक कौन है?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि भुखमरी हुई या यह केवल प्रचार है?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि सभा में कितने आदमी थे?
नहीं नहीं, असली सवाल है
कि मेरे बच्चे चुप क्यों हो गए?

नहीं नहीं, असली सवाल…
सुनो भाई साधो असली सवाल है
कि असली सवाल क्या है?

विजयदेव नारायण साही की कविता 'अभी नहीं'

Book by Vijaydev Narayan Sahi:

Previous articleनील गगन का चाँद
Next articleचौका