अभिलाषा, पहचान, युद्ध

Poems: Harshita Panchariya

अभिलाषा

माँगो तो मनोकामनाओं
के अंतिम अध्याय में
अपूर्ण रहने का वर माँग लेना
क्योंकि
अनेक सम्भावनाओं
का ठौर इतना सहज कहाँ?

पहचान

पहचानी जाऊँगी तो
संसार की उस मूर्ख स्त्री के
तौर पर जिसने
पानी की लिपि से
प्रणय गीत लिखें।

युद्ध

युद्ध के पूर्वाग्रहों ने
सभी हथियारों को
कविताओं में बदल
दिया,
ताकि विजयी गान को
सदियों तक
जीवित रखा जाए।

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