क्षणिकाएँ

नक़्शे

भूगोल की कक्षा में
अव्वल आई लड़की,
बनाती है नक़्शे
कई देशों के
और
उन्हें तवे पर सेक देती है।

चाहतें

औरत ढूँढ रही है
साथ देने वाला आदमी
उस समाज में जहाँ
आदमी
सिर्फ़ ‘छूट’ देना जानता है।

दुःख

इंसानों को दुःख है
परछाइयाँ साथ नहीं निभाती।
परछाइयों के दुःख अलग हैं-
अँधेरों में खो जाने पर
उन्हें कोई नहीं ढूँढता।

इश्क़

और मोहब्बत ने आख़िर किया क्या है
वजह दे दी है, बेवजह मरने वालों को!

दृष्टिकोण

कहानी होगी कुछ तो अँधेरे की भी,
कुछ तो रौशनी की भी ख़ता होगी!

शेर

मैं चाहती थी वो आँख मिलाए, हाथ फेरे
उसने मगर हाथ मिलाए, आँखें फेर लीं!