क्षणिकाएँ: ‘प्रेम’

Short Poems on Love by Harshita Panchariya

1

मेरा प्रेम तुम्हारे लिए बिल्कुल
उस बीज के जैसा है
जिसे रोशनी से डर लगता है।
हमारा प्रेम पनप जाए,
इसलिए उसे छिपा रखा है,
गहरा… बहुत गहरा,
और तुम्हें लगता है,
कि मैं दुनिया को बताने से डरती हूँ।

2

प्रेम ने मुझे देहरी तक रोके रखा,
‘भीतर’ बहुत ‘तर’ था
और ‘बाहर’ उतना ही ‘शुष्क’
और तुम कहते हो,
ठहराव से सड़न होने लगती है
यह ‘प्रेम’ ही असमंजस में है
या मैं?

3

प्रेम दुनिया की सबसे सुखद अनुभूति है
प्रेम दुनिया की सबसे दुखद अनुभूति है
प्रेम के हिस्से जितना सुख आया,
उतना ही दुःख भी आया।
इस सुख और दुःख के हिसाब में
नुक़सान प्रेम को ही हुआ
अब मत पूछना प्रेम कहाँ गया?

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