लड़की की काठी

दीपा और मुकुल दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनों एक साथ एक ही कॉलेज से एम.ए. कर रहे थे। इतना प्यार...

बुलबुले

ऐसी बारिश पहले कभी नहीं हुई थी। बादलों की गड़गड़ाहट से लग रहा था जैसे धरती जलमग्न हो जाएगी। बारिश बहुत भयानक और तेज...

एक कटोरी साग

"रेणु को एक नई बात भी पता चली कि उसने देखा कि नानी एक कटोरी साग भरकर बिमला नानी (पड़ोसन) के घर देने जा रही है। जब नानी वापस आई तो उनके हाथ में दूसरी कटोरी थी जिसमें तोरी का साग था। आकर नानी ने बताया कि बेट्टी यहाँ तो यो सब चालता रहवै सै, कदै वा साग दे जा तो कदे हम दे आवै।"

अभागी का स्वर्ग

सात दिनों तक ज्वरग्रस्त रहने के बाद ठाकुरदास मुखर्जी की वृद्धा पत्नी की मृत्यु हो गई। मुखोपाध्याय महाशय अपने धान के व्यापार से काफी...

जायज़ इस्तेमाल

दस राउंड चलाने और तीन आदमियों को ज़ख़्मी करने के बाद पठान भी आख़िर सुर्ख़रु हो ही गया। एक अफ़रा तफ़री मची थी। लोग...

मिलन

"मुझे तो पानी से प्रेम हो गया है। किसी दिन जब जोर का मेघ बरसेगा तब झरने के नीचे खड़ी हो जाऊँगी; आकाश का पानी, झरने का पानी और नदी का पानी, हर ओर पानी। फिर इतना पानी पी लूँगी कि मैं भी गल कर पानी हो जाऊँगी।"

तोहफ़ा

मैंने उन्हें कई तोहफे दिए। हमारे साथ के चार सालों में ऐसे बहुत मौक़े आते कि मुझे उन्हें तोहफे देने की ज़िद पकड़नी पड़ती लेकिन ऐसा...

नैना

असफलता के क्रूर प्रहारों ने इतनी चोट कभी नहीं पहुंचाई थी जितनी नैना के चले जाने ने। निशांत के निःसार जीवन की सरसता शहरों...

परियों की बातें

मैं अपने दोस्त के पास बैठा था। उस वक़्त मेरे दिमाग़ में सुक़्रात का एक ख़याल चक्कर लगा रहा था— क़ुदरत ने हमें दो...

हमारे हिस्से की दिवाली

"मैंने लिस्ट बनाकर टेबल पर रख दी है। जाकर सारा सामान ले आओ। ऋषि को भी साथ ले कर जाना। और ये लो पैसे..."...

निगरानी में

सहम कर ब ने पूछा, "कोई और ख़बर..." जवाब मिला, "ख़ास नहीं... नहर में तीन कुत्तियों की लाशें मिलीं।" अ ने ब की ख़ातिर मिल्ट्री वालों से कहा, "मिल्ट्री कुछ इंतिज़ाम नहीं करती।" जवाब मिल, "क्यूँ नहीं... सब काम उसी की निगरानी में होता है।"

दयामय की दया

योगेश्वर और बुद्ध में ऐसा क्या नहीं है, जो कृष्ण में है?

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Recent Posts

Sandeep Nirbhay

जिस दिशा में मेरा भोला गाँव है

क्या बारिश के दिनों धोरों पर गड्डमड्ड होते हैं बिम्ब क्या औरतों के ओढ़नों से झाँकता है गाँव क्या बुज़ुर्गों की आँखों में बचा है काजल क्या स्लेट...
Abraham Lincoln, Mary Owens

अब्राहिम लिंकन का पत्र मेरी ऑवेंस के नाम

यह पत्र लिंकन ने राष्ट्रपति बनने से बहुत पूर्व अपनी युवावस्था में लिखा था। स्प्रिंग-फ़ील्ड, 7 मई, 1837 मित्र मेरी, प्रस्तुत पत्र से पहले मैंने दो चिट्ठियाँ लिखनी आरम्भ...
Malkhan Singh

मैं आदमी नहीं हूँ

1 मैं आदमी नहीं हूँ स्साब जानवर हूँ दोपाया जानवर जिसे बात-बात पर मनुपुत्र—माँ चो, बहन चो, कमीन क़ौम कहता है। पूरा दिन बैल की तरह जोतता है मुट्ठी-भर सत्तू मजूरी में देता है। मुँह...
Mahatma Gandhi - Dr Bhimrao Ambedkar

मेरे समकालीन: डॉ० भीमराव अम्बेडकर

डॉ० अम्बेडकर के प्रति और अछूतों का उद्धार करने की उनकी इच्छा के प्रति मेरा सद्भाव और उनकी होशियारी के प्रति आदर होने के...
Sunshine Painting Horizon

एक उमड़ता सैलाब

हममें ही डूबा है वह क्षितिज जहाँ से उदित होता है सबका आकाश फेंकता ऊषाएँ ऋतुएँ, वर्ष, संवत्सर उछालता व्यर्थ है प्रतीक्षा उन अश्वों के टापों की जो दो गहरे लम्बे सन्नाटों के...
Rajkamal Chaudhary

अनायास

फिर भी कभी चला जाऊँगा उसी दरवाज़े तक अनायास जैसे, उस अँधियारे गलियारे में कोई अब तक रहता हो। फिर भी, दीवार की कील पर अटका...
Rajkamal Chaudhary

नींद में भटकता हुआ आदमी

नींद की एकान्त सड़कों पर भागते हुए आवारा सपने सेकेण्ड शो से लौटती हुई बीमार टैक्सियाँ भोथरी छुरी जैसी चीख़ें बेहोश औरत की ठहरी हुई आँखों की...
bhisham sahni

फ़ैसला

उन दिनों हीरालाल और मैं अक्सर शाम को घूमने जाया करते थे। शहर की गलियाँ लाँघकर हम शहर के बाहर खेतों की ओर निकल...
Farmer, Field, Village

मचलें पाँव

मचलें पाँव कह रहे मन से आ चलें गाँव।   कहता मन गाँव रहे न गाँव केवल भ्रम।   ली करवट शहरीकरण ने गाँव लापता।   मेले न ठेले न ख़ुशियों के रेले गर्म हवाएँ।   वृक्ष न छाँव नंगी पगडंडियाँ जलाएँ...
Hazari Prasad Dwivedi

आपने मेरी रचना पढ़ी?

हमारे साहित्यिकों की भारी विशेषता यह है कि जिसे देखो वहीं गम्भीर बना है, गम्भीर तत्ववाद पर बहस कर रहा है और जो कुछ...
Paash

अपनी असुरक्षा से

यदि देश की सुरक्षा यही होती है कि बिना ज़मीर होना ज़िन्दगी के लिए शर्त बन जाए आँख की पुतली में हाँ के सिवाय कोई भी...
Rabindranath Tagore

इच्छा-पूर्ण

अनुवाद: रत्ना रॉय सुबलचन्द्र के बेटे का नाम सुशीलचन्द्र था। लेकिन हमेशा नाम के अनुरूप व्यक्ति भी हो ऐसा क़तई ज़रूरी नहींं। तभी तो सुबलचन्द्र...
Muktibodh

एक-दूसरे से हैं कितने दूर

एक-दूसरे से हैं कितने दूर कि जैसे बीच सिन्धु है, एक देश के शैल-कूल पर खड़ा हुआ मैं और दूसरे देश-तीर पर खड़ी हुईं तुम। फिर भी...
Kumar Vikal

दुःखी दिनों में

दुःखी दिनों में आदमी कविता नहीं लिखता दुःखी दिनों में आदमी बहुत कुछ करता है लतीफ़े सुनाने से ज़हर खाने तक लेकिन वह कविता नहीं लिखता दुःखी दिनों...
Letter

अपेक्षाओं के बियाबान

सिलीगुड़ी 4 फ़रवरी, 70 आदरणीय दादा सादर प्रणाम कल रात फिर वही स्वप्न देखा। मैं और सुरभित समुद्र किनारे क़दमों के निशान छोड़ते बढ़े जा रहे हैं। अपर्णा...
Venu Gopal

कौन बचता है

जहाँ इस वक़्त कवि है कविता है, वहाँ जंगल है और अँधेरा है और हैं धोखेबाज़ दिशाएँ। दुश्मन सेनाओं से बचने की कोशिश में भटकते-भटकते वे यहाँ आ फँसे हैं, जहाँ से इस वक़्त न...
God, Mother, Abstract

तारबंदी

जालियों के छेद इतने बड़े तो हों ही कि एक ओर की ज़मीन में उगी घास का दूसरा सिरा छेद से पार होकर साँस ले सके दूजी हवा में तारों की इतनी...
Adarsh Bhushan

कौन स्तब्ध है?

स्तब्धता एक बेजोड़ निकास है— सदियों से मुलाक़ातों, हादसों और प्रव्रजनों को देखते हुए हम स्तब्ध खड़े हैं नदियाँ देखकर बाँध स्तब्ध खड़े हैं गाड़ियाँ देखकर पुल तुम्हें देखकर...
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

ख़ानदान का सरग़ना कैसे बना

मुझे भय है कि मेरे ख़त कुछ पेचीदा होते जा रहे हैं। लेकिन अब ज़िन्दगी भी तो पेचीदा हो गई है। पुराने ज़माने में...
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

खेती से पैदा हुई तब्दीलियाँ

अपने पिछले ख़त में मैंने कामों के अलग-अलग किए जाने का कुछ हाल बतलाया था। बिल्कुल शुरू में जब आदमी सिर्फ़ शिकार पर बसर...
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