हर एक बार..

कुछ मिनट पहले या महीनों पहले
किताबों में, इशारों में
या समंदर में, कि पहाड़ों में
किसी की आँखो में या किसी की बातों में
देश में, विदेश में
हिंदी में, उर्दू में या कि अंग्रेज़ी में
या फिर जो व्लादिमीर ने अपनी चिट्ठी में वेरा को कहा था-
“सिर्फ तुम, क्योंकि कर सकता हूँ तुमसे बादलों के रंग की बात, और तुम समझोगी!”

जब-जब मैंने ‘प्रेम’ सुना या पढ़ा
सिर्फ तुम्हें सोचा
दस में से हर दस बार!

~र

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