पुरुष अकेले में इस तरह रोते हैं
जैसे आती हुई याद को भुला रहे हैं
वो कहते हैं
दुनिया में आना-जाना, इस कदर लगा रहता है
हर मौत पर आँसू बहाना ज़रूरी नहीं

वो कहते हैं
प्रेम सुखों की तरह आता है
दुःख देकर जाता है
हर प्रेम के लिए आँसू बहाना ज़रूरी नहीं

औरतें रोते हुए अकेली नहीं होती हैं
मरे हुए लोगों को इस तरह याद करती हैं
जैसे अगले जन्म में मिलना तय है

वे आँसू और यादों से इस तरह चिपकी रहती हैं
जैसे स्मृतियों का रेखांकन बिस्तरों पर करती हैं
पानी के दाग ज़्यादा दिन नहीं रहते
वे आँसू भरे चेहरे को रोज धोती हैं।

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