स्त्री से बात करने के लिए
निश्चित तौर पर
तुम में होना चाहिए सलीक़ा

फिर सीखो
उसे सुनते जाना
उसकी चुप्पी के आयाम तक
कभी आज़माओ
ख़ुद भी बातें बनाना
कभी चुप हो जाना

स्त्रियाँ परखती हैं
कभी-कभी सिरे तोड़कर
मध्य की सुदृढ़ता
तो साफ़ नीयत रख
तुम्हें आना चाहिए
समुद्री यात्रा में
तारे पहचान रास्ता निकालना

जैसे एक दिन
अच्छी-ख़ासी, आत्मीय बतकही के बाद
वह कहे
कि अब उसे चलानी है साइकिल, स्कूटी या कार
या जाना है कहीं पैदल या पंखों पर सवार
तो तुम अलविदा कहकर चुप रहोगे
कुछ दिन
या ख़ूब दिन

जब दोबारा करनी हो बात
तो शुरुआत कर सकते हो
यह पूछने से
कि उस दिन से अब तलक
कैसा चल रहा सफ़र!

देवेश पथ सारिया की कविता 'ईश्वर (?) को नसीहत'

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देवेश पथ सारिया
देवेश पथ सारिया एक हिन्दी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक हैं। कविता संकलन : अदृश्य आत्मीय की टोह में (2025), नूह की नाव (2022)।‌ कथेतर गद्य : छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी, 2022)। कहानी संग्रह : स्टिंकी टोफू (2025)। अनुवाद : सपने बुनता फाॅरमोसा : ताइवानी कविताएँ (2026), यातना शिविर में साथिनें (2023)। अन्य भाषाओं में पुस्तकें : A Toast to Winter Solstice (अंग्रेज़ी अनुवाद : शिवम तोमर)। पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023), स्नेहमयी चौधरी सम्मान (2025)। अन्य भाषाओं मे अनुवाद : देवेश की रचनाओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन‌ (चीनी), स्पेनिश, रूसी, ताइवानी, नेपाली, उर्दू, बांग्ला, मराठी, पंजाबी, असमिया, भोजपुरी, राजस्थानी, हरियाणवी, गढ़वाली और कुमाऊँनी में हुआ है। संपादन : गोल चक्कर वेब पत्रिका (golchakkar.org) ईमेल : [email protected]