Tag: A poem on Nostalgia

Pramod Tiwari

याद बहुत आते हैं

याद बहुत आते हैं गुड्डे-गुड़ियों वाले दिन दस पैसे में दो चूरन की पुड़ियों वाले दिन ओलम, इमला, पाटी, बुदका, खड़ियों वाले दिन बात-बात में फूट रही फुलझड़ियों वाले दिन पनवाड़ी की चढ़ी उधारी,...
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