Tag: Adarsh Bhushan

Dunya Mikhail

दुन्या मिखाइल की कविताएँ ‘मोची’ और ‘घूमना’

कविताएँ: दुन्या मिखाइल (Dunya Mikhail) अनुवाद: आदर्श भूषण मोची (Shoemaker) एक कुशल मोची अपने पूरे जीवनकाल में न जाने कितने क़िस्म के पैरों के लिए चमड़े चमकाता है और कीलें ठोकता...
Squirrel

गिलहरी

1 भाषाओं में नहीं थीं जगहें न ही था इतना धैर्य कि एक भागते हुए मन को आवाज़ देकर हौले-से रोक लें बुला लें पास जिसमें न संदेह...
David Bottoms

डेविड बॉटम्स की कविता ‘पिता का बायाँ हाथ’

कविता: पिता का बायाँ हाथ (My Father's Left Hand) कवि: डेविड बॉटम्स (David Bottoms) अनुवाद: आदर्श भूषणकभी-कभी पिता का हाथ उनके घुटनों पर फिरता है अजीब गोलाइयों...
Sharon Olds

शैरन ओल्ड्स की कविता ‘उनकी चुप्पी’

शैरन ओल्ड्स (Sharon Olds) अमेरिकी कवयित्री हैं और न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव राइटिंग पढ़ाती हैं। उन्हें कविता में पुलत्ज़र पुरस्कार प्राप्त है। यहाँ...
Adarsh Bhushan

गायताल

चप्पल टूटने से पहले ख़रीदी चप्पल बनियान फटने से पहले नया बनियान एक नये अभाव के आने से पहले एक नयी ज़रूरत ईजाद करता रहा लड़ने से...
Adarsh Bhushan

विपश्यना

सहजता से कहे गए शब्दों के अर्थ अक्सर चेष्टापूर्ण और कठिन होते हैं जैसे तुमने कहा कि तुम्हें मेरा मौन काटता है और उससे...
Adarsh Bhushan

समय से मत लड़ो

लड़ो लड़ो वापस जाते हुए सुख से अड़ जाओ उसके रास्ते में ज़िद करते पैर पटककर— बाप की पतलून खींचकर मेले में कुछ देर और ठहर पसन्द का खिलौना...
Adarsh Bhushan

लाठी भी कोई खाने की चीज़ होती है क्या?

हमारे देश में लाठियाँ कब आयीं यह उचित प्रश्न नहीं कहाँ से आयीं यह भी बेहूदगी भरा सवाल होगालाठियाँ कैसे चलीं कहाँ चलीं कहाँ से कहाँ तक चलीं क्या पाया...
Man outside a village home

आदमी का गाँव

हर आदमी के अन्दर एक गाँव होता है जो शहर नहीं होना चाहता बाहर का भागता हुआ शहर अन्दर के गाँव को बेढंगी से छूता रहता है जैसे उसने...
Adarsh Bhushan

दिसम्बर

दिसम्बर एक दौड़ है पतली-सी रेलिंग पर भागती हुई गिलहरी की दौड़जिसे कहीं जाना नहीं है रुकना है यहीं बग़ल के किसी सूखते सेमल की कोटर मेंठण्ड के थोड़ा...
Adarsh Bhushan

लोहा और कपास

आँतों को पता है अपने भूखे छोड़े जाने की समय सीमा उसके बाद वे निचुड़तीं पेट कोंच-कोंचकर ख़ुद को चबाने लगती हैंआँखों को पता है कितनी दुनिया देखने...
Adarsh Bhushan

त्राण

दो ज़िन्दा प्रेमियों का प्रेम कभी एक जैसा नहीं दिखता यह हो सकता है कि एक मन देखता हो और एक त्राण की सम्भावनादो ज़ंग खायीं तलवारें अलग-अलग युद्धों से आयी...

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RECENT POSTS

Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
premchand

सवा सेर गेहूँ

किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा ग़रीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी...
Unsocial Network - Dilip Mandal, Geeta Yadav

वे आपके बारे में बहुत ज़्यादा जानते हैं (किताब अंश: अनसोशल नेटवर्क)

'अनसोशल नेटवर्क' किताब भारत के विशिष्ट सन्दर्भों में सोशल मीडिया का सम्यक् आकलन प्रस्तुत करती है। जनसंचार का नया माध्यम होने के बावजूद, सोशल...
Prayers, Joined Hands

अनुत्तरित प्रार्थना

'परिवर्तन प्रकृति का नियम है' यह पढ़ते-पढ़ाते वक़्त मैंने पूरी शिद्दत के साथ अपने रिश्तों में की स्थिरता की कामनाप्रकृति हर असहज कार्य भी पूरी सहजता के...
Women sitting

अठन्नी, चवन्नी और क्रमशः

इस बार उन्हें नहीं था मोह स्वर्ण-मृग का फिर भी खींची गई थीं लक्ष्मण रेखाएँवे पढ़ीं, आगे बढ़ीं लक्ष्मण रेखाएँ लाँघकर रावण से जा भिड़ींगूँजते आए थे स्वर नेपथ्य...
Sharmishtha - Anushakti Singh

शर्मिष्ठा: पौराणिक अन्याय के विरुद्ध एक आवाज़

किताब: शर्मिष्ठा - कुरु वंश की आदि विद्रोहिणी लेखिका: अणुशक्ति सिंह प्रकाशक: वाणी प्रकाशनटिप्पणी: देवेश पथ सारियाइंटरनेट ने पढ़ने के नये विकल्प खोले हैं। मेरे जैसे...
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