कुछ किताबें पढ़कर
किसी को कुछ किताबें दी थीं
उनके कुछ ही पन्ने पलटे गये हैं
मैंने कुछ और अर्थ निकाले
उसने कुछ और;
जीवन में सब परस्पर नहीं...
नहीं बीतती अब ये लम्बी रात
नैना मुझसे कर लो कुछ बात
जब आ जाऊँ मैं संग तुम्हारे साथ
थिरकाओ चाँद के आगे अपना हाथ
गोरी उंगलियाँ चले...