Tag: बातें

Poonam Sonchhatra

बातों का प्रेम

अनेक स्तर थे प्रेम के और उतने ही रूप मैंने समय के साथ यह जाना कि पति, परमेश्वर नहीं होता वह एक साथी होता है सबसे प्यारा, सबसे महत्त्वपूर्ण...
Naresh Saxena

अजीब बात

'Ajeeb Baat', a poem by Naresh Saxena जगहें ख़त्म हो जाती हैं जब हमारी वहॉं जाने की इच्छाएँ ख़त्म हो जाती हैं लेकिन जिनकी इच्छाएँ ख़त्म हो जाती हैं वे ऐसी...
Fist, Protest, Dissent

उस सदी की बात

कवि- अज्ञात यह उस सदी की बात है जब कविता लिखना पढ़ना, सुनना और सुनाना संगीन अपराध था राज्य के निरंकुश राजा ने ख़ुद को निर्वस्त्र कर पहन ली फ़रेब की...
Moon, Moonlight

चंद्रदेव से मेरी बातें

भगवान चंद्रदेव! आपके कमलवत् कोमल चरणों में इस दासी का अनेक बार प्रणाम। आज मैं आपसे दो चार बातें करने की इच्छा रखती हूँ।...
Open Door

बातें जो कही नहीं जाती

जो बातें 'कही' नहीं जातीं वो 'कहीं' नहीं जातीं कितना भी तिरस्कार करो धिक्कार दो खड़ी रहती हैं लज्जाहीन बनके मन की देहरी पर और खटखटाती रहती हैं सदियों से बन्द मन के किवाड़... जो बातें कही...
Couple

साथ की बात

तुम अक्सर मेरे सपने सुनने मेरे पास बैठी होती हो सपने सच हैं हमारा साथ बैठा होना झूठ तुम्हारे झूठ मूठ के साथ बैठे होने से मैं दुःखी नहीं हूँ क्योंकि...
Zehra Nigah

आज की बात

आज की बात, नई बात नहीं है ऐसी जब कभी दिल से कोई गुज़रा है, याद आई है सिर्फ़ दिल ही ने नहीं गोद में ख़ामोशी...
Akhtar Sheerani

यारो कू-ए-यार की बातें करें

यारो कू-ए-यार की बातें करें फिर गुल ओ गुलज़ार की बातें करें चाँदनी में ऐ दिल इक इक फूल से अपने गुल-रुख़्सार की बातें करें आँखों आँखों में...
Suraj Pal Chauhan

परिवर्तन की बात

“हाँ भैया, गाय और अपनी माता में कोई फर्क नहीं होता।” “तो तुम इसका माँ की तरह दाह-संस्कार क्यों नहीं करते?” “साले खाल खींचा, यदि एक भी शब्द और आगे कहा तो पूरी लाठिया मुँह में घुसेड़ दूँगा।” “तुम्हीं तो मरे जानवर उठाने का काम करते आए हो। तुम नहीं करोगे, तो कौन करेगा इस काम को?” “कोई भी करे, अब हम नहीं करेंगे।”
Man Silhouette

याद में कोई बात

मैं उतना खाली हूँ जितना तुम भरी हो मैं उसी अंतराल के बीच खड़ा हूँ जहाँ तुमने देखा ही नहीं तुम आओगी इसलिए आओगी जैसे कि दो खाली बेंच सिर्फ हमारे...
saadat hasan manto

1919 की एक बात

"उन्होंने अपनी ज़र्क़-बर्क़ पिशवाज़ें नोच डालीं और अलिफ़ नंगी हो गईं और कहने लगीं... लो देख लो... हम थैले की बहनें हैं... उस शहीद की जिसके ख़ूबसूरत जिस्म को तुमने सिर्फ़ इसलिए अपनी गोलियों से छलनी-छलनी किया था कि उसमें वतन से मोहब्बत करने वाली रूह थी..." आज जलियाँवाला बाग हत्याकांड को सौ वर्ष हो गए हैं! ऐसे निर्मम हत्याकांडों में मौत के सरकारी और वास्तविक आकड़ों के परे भी ऐसी यातनाएँ होती हैं जो केवल पीड़ित लोगों ने देखी हैं.. मंटो की यह कहानी उन्हीं यातनाओं की एक झलक पाठकों के सामने रखती है.. पढ़िए!
Stars

बात और जज़्बात

1 हर तारा यही कहता है काली रात से कि थमी रहो चमकना है कुछ देर अभी और...! 2 हर रोज़ सवेरे मैं उजालों को पहन लेता हूँ और निखार लेता हूँ खुद...

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