Tag: bird

Prakash

पता

मैंने उसे ख़त लिखा था और अब पते की ज़रूरत थी मैंने डायरियाँ खँगालीं किताबों के पुराने कबाड़ में खोजा फ़ोन पर कई हितैशियों से पूछा और हारकर बैठ...
Bird, Water

कुछ कह रही थी छोटी चिड़िया

सबेरे-सबेरे कुछ कह रही थी छोटी चिड़ियागली सूनी थी सूरज चढ़ा नहीं था कोई स्तवन था किसी देवता का जो भरपूर देता हो अन्न और भोज्य अपनी स्तुति से...
Bird

कौतुक-कथा

धूप चाहती थी, बारिश चाहती थी, चाहते थे ठेकेदार कि यह बेशक़ीमती पेड़ सूख जाए चोर, अपराधी, तस्कर, हत्यारे, मंत्री के रिश्तेदार फ़िल्म ऐक्टर, पुरोहित, वे सब जो...
Dushyant Kumar

क़ैद परिंदे का बयान

तुमको अचरज है—मैं जीवित हूँ! उनको अचरज है—मैं जीवित हूँ! मुझको अचरज है—मैं जीवित हूँ!लेकिन मैं इसीलिए जीवित नहीं हूँ— मुझे मृत्यु से दुराव था, यह जीवन जीने...
Rag Ranjan

उसने मुझे पीला रंग सिखाया

उसने मुझे पीला रंग सिखायाऔर मुझे दिखायी दिए जीवन के धूसर रंगों के बीचोबीच रू ब रू दो दहकते हुए पीले सूर्यमुखी एक से दूसरे के...
Sharad Billore

भाषा

पृथ्वी के अन्दर के सार में से फूटकर निकलती हुई एक भाषा है बीज के अँकुराने की।तिनके बटोर-बटोरकर टहनियों के बीच घोंसला बुने जाने की भी एक भाषा है।तुम्हारे...
Subhadra Kumari Chauhan

कोयल

देखो कोयल काली है पर मीठी है इसकी बोली, इसने ही तो कूक-कूककर आमों में मिश्री घोली।कोयल! कोयल! सच बतलाना क्या संदेसा लायी हो, बहुत दिनों के बाद आज...
Bhagwat Rawat

चिड़ियों को पता नहीं

चिड़ियों को पता नहीं कि वे कितनी तेज़ी से प्रवेश कर रही हैं कविताओं में।इन अपने दिनों में खासकर उन्हें चहचहाना था उड़ानें भरनी थीं और घंटों गरदन में...
Bird

खोया हुआ जंगल

खिड़की के बाहर जंगल था खिड़की पर चिड़िया बैठी थी मैंने यह पूछा चिड़िया से— "चिड़िया-चिड़िया, कितना जंगल?"चिड़िया ने तब आँख नचायी चिड़िया ने तब पंख फुलाए मेरी तरफ़...
Narendra Jain

कुल्हाड़ी

यहाँ लकड़ी कटती है लगातार थोड़ा-थोड़ा आदमी भी कटता हैकिसी की उम्र कट जाती है और पड़ी होती धूल में टुकड़े की तरहशोर से भरी इस गली में कहने...
Kedarnath Agarwal

वह चिड़िया जो

वह चिड़िया जो— चोंच मारकर दूध-भरे जुण्डी के दाने रुचि से, रस से खा लेती है वह छोटी सन्तोषी चिड़िया नीले पंखों वाली मैं हूँ मुझे अन्‍न से बहुत प्‍यार है।वह चिड़िया...
Ramdhari Singh Dinkar

भगवान के डाकिए

पक्षी और बादल, ये भगवान के डाकिए हैं जो एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं— हम तो समझ नहीं पाते हैं मगर उनकी लायी चिट्ठियाँ पेड़, पौधे, पानी और...

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Muktibodh - T S Eliot

टी. एस. ईलियट के प्रति

पढ़ रहा था कल तुम्हारे काव्य कोऔर मेरे बिस्तरे के पास नीरव टिमटिमाते दीप के नीचे अँधेरे में घिरे भोले अँधेरे में घिरे सारे सुझाव, गहनतम संकेत! जाने...
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