Tag: Buddha

Yashasvi Pathak

यशस्वी पाठक की कविताएँ

कविताएँ: यशस्वी पाठक एक कवि और लेखकों की शामें दोस्तों के साथ या सड़कों पर गश्त लगाते गुज़रती हैं जहाँ गर्भ धारण करते हैं उनके मस्तिष्क जिससे जन्म...
Adarsh Bhushan

विपश्यना

सहजता से कहे गए शब्दों के अर्थ अक्सर चेष्टापूर्ण और कठिन होते हैं जैसे तुमने कहा कि तुम्हें मेरा मौन काटता है और उससे...
Akkarmashi

शरणकुमार लिम्बाले – ‘अक्करमाशी’

शरणकुमार लिम्बाले की आत्मकथा 'अक्करमाशी' से उद्धरण | Quotes from 'Akkarmashi' , an autobiography by Sharan Kumar Limbale  "आत्मकथा का अर्थ जो जीवन जीया है,...
Rohit Thakur

कविताएँ — मई 2020 (दूसरा भाग)

मैना निष्ठुर दिनों में देखा है कोई नहीं आता। मैना की ही बात करता हूँ कई मौसमों के बीत जाने पर आयी है मैं तो बच गया— विस्मृत हो रही...
Buddha, Siddhartha Quotes

ज़रूरी है प्रेम में होना

'Zaroori Hai Prem Mein Hona', a poem by Amandeep Gujralसब कुछ छोड़कर चले जाना चुपचाप बुद्ध होने के लिए ज़रूरी है क्या? तुम एक काम करना तुम...
Man Woman Yin Yang Stri Purush

तुम्हें पता है बुद्ध, छलावे, स्त्री-पुरुष

Poems: Yogesh Dhyani तुम्हें पता है बुद्ध तुम्हें पता है बुद्ध तुम्हारे अनुयायियों के अलावा भी तुम बहुतों के प्यारे होतुम विशाल होटलों के मुख्य द्वारों से लेकर मदिरालयों की...
Buddha

नहीं यशोधरा, नहीं

'Nahi Yashodhara, Nahi', a poem by Rashmi Saxenaनहीं यशोधरा, नहीं अभी नहींअभी हृदय में तुम्हें दुःख धारण नहीं करना है देखकर किसी रोगी कोअभी किसी जर्जर, जीर्ण काया...
Buddha

बुद्ध बन जाना तुम

कुछ अल्ड़ह सा, ऊँघता हिलोरे लेता हुआ तुम्हारे ख्वाबों का उन्माद बड़ा जिद्दी है। बन जाना चाहता है रूह का लिबास। कमरे में छोड़ी तुम्हारी अशेष खामोशी ढूँढ रही है कोना, खुद को...
Microphone

कुछ सम्बोधन गीत

(1)ओ तस्वीरों पर राजनीति करने वालों, लो ये तस्वीरें आज तुम्हें हम दिखा रहे।इन तस्वीरों में हिन्द के बेटे-बेटियां, देखो कैसे खड़े तुम्हारी राह में। यह तस्वीरें...

STAY CONNECTED

38,332FansLike
19,561FollowersFollow
27,905FollowersFollow
1,660SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Abstract, Woman

जीवन सपना था, प्रेम का मौन

जीवन सपना था आँखें सपनों में रहीं और सपने झाँकते रहे आँखों की कोर से यूँ रची हमने अपनी दुनिया जैसे बचपन की याद की गईं कविताएँ हमारा दुहराया...
Kedarnath Singh

फ़र्क़ नहीं पड़ता

हर बार लौटकर जब अन्दर प्रवेश करता हूँ मेरा घर चौंककर कहता है 'बधाई'ईश्वर यह कैसा चमत्कार है मैं कहीं भी जाऊँ फिर लौट आता हूँसड़कों पर परिचय-पत्र माँगा...
Naveen Sagar

वह मेरे बिना साथ है

वह उदासी में अपनी उदासी छिपाए है फ़ासला सर झुकाए मेरे और उसके बीच चल रहा हैउसका चेहरा ऐंठी हुई हँसी के जड़वत् आकार में दरका है उसकी आँखें बाहर...
Nurit Zarchi

नूइत ज़ारकी की कविता ‘विचित्रता’

नूइत ज़ारकी इज़राइली कवयित्री हैं जो विभिन्न साहित्य-सम्बन्धी पुरस्कारों से सम्मानित हैं। प्रस्तुत कविता उनकी हीब्रू कविता के तैल गोल्डफ़ाइन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी...
Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
Naresh Mehta

कवच

मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
Vishesh Chandra Naman

मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
Gaurav Bharti

कविताएँ: नवम्बर 2021

यात्री भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है? इसका एक ही जवाब है मेरे पास कि तुम्हारे होने के भ्रम ने मुझे ज़िन्दा रखातुम्हारे होने के भ्रम में मैंने शहर...
God, Abstract Human

कौन ईश्वर

नहीं है तुम्हारी देह में यह रुधिर जिसके वर्ण में अब ढल रही है दिवा और अँधेरा सालता हैरोज़ थोड़ी मर रही आबादियों में रोज़ थोड़ी बढ़ रही...
Haruki Murakami

हारुकी मुराकामी की कहानी ‘सातवाँ आदमी’

कहानी: 'सातवाँ आदमी' लेखक: हारुकी मुराकामी जापानी से अनुवाद: क्रिस्टोफ़र एलिशन हिन्दी अनुवाद: श्रीविलास सिंह"वह मेरी उम्र के दसवें वर्ष के दौरान सितम्बर का एक अपराह्न था...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)