Tag: बचपन

Cupboard

बाबा की अलमारी

रहस्यमयी लगती थी हम बहनों को हरे रंग की बाबा की छोटी अलमारी, मुरचाई मैली-सी फिर भी लगती हमको प्यारी। यूँ तो घर के हर कोने में होती अपनी आवाजाही पर उसको छूने...
Little Girl

नन्ही बच्चियाँ

'Nanhi Bachchiyaan', a poem by Nirmal Gupt दो नन्ही बच्चियाँ घर की चौखट पर बैठीं पत्थर उछालती, खेलती हैं कोई खेल वे कहती हैं इसे- गिट्टक! इसमें न...
Manjula Bist

सुरक्षित बाड़, अप्राप्य बचपन

सुरक्षित बाड़ जब वह घूमती है अपनी घर की चारदीवारी में जैसे, वह संसार की सबसे सुरक्षित बाड़ हो तब मैं उस बाड़ की समीप से टोह लेने लगती हूँ कि...
Village, Sil-Batta, Kitchen, Cooking

मेरे बचपन का गाँव

नीले आकाश में खिलते तारे अनगिनत, आसमान की सैर को तरसते वृक्ष। झाड़ियों के झुरमुट में छिपे घोंसले अनगिनत, कभी चलते कभी रुकते क़दमों के नीचे आती गीली मिट्टी और कभी...
Child, Kid

मुठ्ठी भर बचपन

लाल रंग की गेंदें भेज दी गयी हैं कारखानों में जहाँ भरी जाती है अब उनमें बारूद सारे बल्ले, बनाये जा रहे हैं अब बन्दूकें अब दोनों मिल कर मैदान में डट...
B R Ambedkar

बचपन में दुस्वप्न बनी कोरेगाँव की यात्रा

हमारा परिवार मूल रूप से बांबे प्रसिडेंसी के रत्नागिरी जिले में स्थित डापोली तालुके का निवासी है। ईस्ट इंडिया कंपनी का राज शुरू होने...
School Kids

पाठशाला

पढ़ाई की वजह से बचपन न मुरझा जाए, यह कितना ज़रूरी है, चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने आज से लगभग सौ साल पहले बताया था! :)
Archana Verma

बचपन की कहानियों का राजकुमार

हवा से तेज़ घोड़े पर सवार बड़ी खतरनाक मुहिम पर निकला था बचपन की कहानियों का राजकुमार। चलने के पहले ही गुरु ने समझाया था पहले गये हुए...
Satya Ke Prayog Athva Aatmakatha - Mahatma Gandhi

सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा – बचपन

"मैं बहुत ही शरमीला लड़का था। घंटी बजने के समय पहुँचता और पाठशाला के बंद होते ही घर भागता। 'भागना' शब्द मैं जान-बूझकर लिख रहा हूँ, क्योंकि बातें करना मुझे अच्छा न लगता था। साथ ही यह डर भी रहता था कि कोई मेरा मजाक उड़ाएगा तो?"
Subhadra Kumari Chauhan

मेरा नया बचपन

बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद कैसे भूला जा...
Jaishankar Prasad

तुम्हारी आँखों का बचपन

तुम्हारी आँखों का बचपन! खेलता था जब अल्हड़ खेल, अजिर के उर में भरा कुलेल, हारता था हँस-हँस कर मन, आह रे वह व्यतीत जीवन! तुम्हारी आँखों का बचपन! साथ...

STAY CONNECTED

26,691FansLike
5,944FollowersFollow
12,868FollowersFollow
240SubscribersSubscribe

MORE READS

कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)