Tag: Coronavirus

Corona, Covid

उसकी आँखें खुली रहनी चाहिए थीं

(कोरोना से गुज़र गई एक अपरिचित की फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से गुज़रते हुए) 8 मई, 2021 सत्ता है मछली की आँख और दोनों कर्ता-धर्ता अर्जुन और 'ठाकुर' बने थे चूक...
Gaurav Bharti

कविताएँ: दिसम्बर 2020

1 हॉस्टल के अधिकांश कमरों के बाहर लटके हुए हैं ताले लटकते हुए इन तालों में मैं आने वाला समय देख रहा हूँ मैं देख रहा हूँ कमरों के भीतर अनियन्त्रित...
Indian Old Woman

कुछ जोड़ी चप्पलें, इमाम दस्ता

कुछ जोड़ी चप्पलें उन्हें फ़र्क़ नहीं पड़ता कि मनुष्य होने के दावे कितने झूठे पड़ चुके थे तुम्हारी आत्म संलिप्त दानशीलता के बावजूद, थोड़ा-सा भूगोल लिए आँखों में वे बस...
Girl looking at a flower

लॉकडाउन समय

1 इस समय सबका दुःख साझा है सुख, किसी ग़लत पते पर फँसा हुआ शायद सबकी प्रार्थनाओं में उम्मीद का प्रभात संशय के बादल से ढका पड़ा है समय शोर को भेद...
Shankaranand

रोटी की तस्वीर

यूँ तो रोटी किसी भी रूप में हो सुन्दर लगती है उसके पीछे की आग चूल्हे की गन्ध और बनाने वाले की छाप दिखायी नहीं देती लेकिन होती हमेशा रोटी के...
Tithi Dani

तिथि दानी की कविताएँ

प्रलय के अनगिनत दिन आज फिर एक डॉक्टर की मौत हुई कल पाँच डॉक्टरों के मरने की ख़बरें आयीं इनमें से एक स्थगित कर चुकी थी अपनी...
Masked Face, coronavirus

कोरोनावायरस और शिन्निन क्वायलो

कोरोनावायरस फैला रहा है अपने अदृश्य पाँव पहुँच चुका है वह दुनिया के कई कोनों में ताइवान में भी कुछ मामले सामने आ चुके हैं इन दिनों दुनिया के...
Lockdown Migration, Labours

प्रवासी मज़दूर

मैंने कब माँगा था तुमसे आकाश का बादल धरती का कोना सागर की लहर हवा का झोंका सिंहासन की धूल पुरखों की राख या अपने बच्चे के लिए दूध यह सब वर्जित...
Bird, Window, Hand

पहली बार

इन दिनों कैसी झूल रही गौरेया केबल तार पर कैसा सीधा दौड़ रहा वह गली का डरपोक कुत्ता कैसे लड़ पड़े बिल्ली के बच्चे चौराहे पर ही कैसे...
Kumar Mangalam

कुमार मंगलम की कविताएँ

रात के आठ बजे मैं सो रहा था उस वक़्त बहुत बेहिसाब आदमी हूँ सोने-जगने-खाने-पीने का कोई नियत वक़्त नहीं है ना ही वक़्त के अनुशासन में रहा हूँ कभी मैं सो...
jasvir tyagi

जसवीर त्यागी की कविताएँ

प्रकृति सबक सिखाती है घर के बाहर वक़्त-बेवक़्त घूम रहा था विनाश का वायरस आदमी की तलाश में आदमी अपने ही पिंजरे में क़ैद था प्रकृति, पशु-पक्षी उन्मुक्त होकर हँस रहे थे परिवर्तन का पहिया घूमता...
Posham Pa

यह कैसा दौर है

चलो विस्थापित हो जाएँ कहीं दिखावटी मुखौटों से दूर, दम घुटता है यहाँ विचारों की अशुद्धता में- यह महामारी का दौर है। जब टूट रही थीं साँसें घिनौनी मानसिकता का ही वज़न...

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Rahul Sankrityayan

तुम्हारी जात-पाँत की क्षय

हमारे देश को जिन बातों पर अभिमान है, उनमें जात-पाँत भी एक है। दूसरे मुल्कों में जात-पाँत का भेद समझा जाता है भाषा के...
Anujeet Iqbal

उसका होना

उसके नाम की प्रतिध्वनि किसी स्पन्दन की तरह मन की घाटी में गहरी छुपी रही और मैं एक दारुण हिज्र जीती रही वेदना, व्याकुलता के मनोवेगों में त्वरित बिजुरी की...
Do Log - Gulzar

गुलज़ार के उपन्यास ‘दो लोग’ से किताब अंश

गुलज़ार का उपन्यास 'दो लोग' विभाजन की त्रासदी के बारे में है—त्रासदी भी ऐसी कि इधर आज़ादी की बेला आने को है, और उधर...
Neelabh

जहाँ मैं साँस ले रहा हूँ अभी

जहाँ मैं साँस ले रहा हूँ अभी वहाँ से बहुत कुछ ओझल है ओझल है हत्यारों की माँद ओझल है संसद के नीचे जमा होते किसानों के ख़ून...
Kaynaat

कायनात की कविताएँ

1 इश्क़, तुम मेरी ज़िन्दगी में आओ तो यूँ आओ कि जैसे किसी पिछड़े हुए गाँव में कोई लड़की घण्टों रसोई में खपने के बाद पसीने से भीगी बाहर...
Uberto Stabile

स्पेनिश कवि उबेरतो स्तबिल की कविताएँ

उबेरतो स्तबिल, स्पेनिश कवि और चर्चित अंतर्राष्ट्रीय स्पेनिश पत्रिका के सम्पादक हैं, उनकी कई किताबें प्रकाशित और अनूदित हो चुकी हैं। अनुवाद: पंखुरी सिन्हा एक पाठक...
Pooja Shah

पूजा शाह की कविताएँ

पाज़ेब पाज़ेब पाँवों में नहीं स्तनों पर पहनने से सार्थक होंगी जब औरतें क़दम रखती हैं पकौड़ियों की थाली लिए आदमियों से भरे कमरे में उनकी गपशप के बीच या जब...
Kailash Gautam

कविता मेरी

आलम्बन, आधार यही है, यही सहारा है कविता मेरी जीवन शैली, जीवन धारा है। यही ओढ़ता, यही बिछाता यही पहनता हूँ सबका है वह दर्द जिसे मैं अपना कहता...
Vijay Sharma

क़ब्ल-अज़-तारीख़

सुबह से माँ के घुटनों का दर्द तेज़ था। पिछली रात देसी बाम, गरम पानी और तेल का कोई ख़ास असर नहीं हुआ। इधर...
Lucilla Trappazzo

लुचिल्ला त्रपैज़ो की कविताएँ

लुचिल्ला त्रपैज़ो स्विस इतालवी कवयित्री हैं। उनके चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उनकी रचनाएँ कई भाषाओं में अनूदित भी हो चुकी...
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