Tag: Coronavirus

jasvir tyagi

जसवीर त्यागी की कविताएँ

प्रकृति सबक सिखाती है घर के बाहर वक़्त-बेवक़्त घूम रहा था विनाश का वायरस आदमी की तलाश में आदमी अपने ही पिंजरे में क़ैद था प्रकृति, पशु-पक्षी उन्मुक्त होकर हँस रहे थे परिवर्तन का पहिया घूमता...

यह कैसा दौर है

चलो विस्थापित हो जाएँ कहीं दिखावटी मुखौटों से दूर, दम घुटता है यहाँ विचारों की अशुद्धता में- यह महामारी का दौर है। जब टूट रही थीं साँसें घिनौनी मानसिकता का ही वज़न...
Room, Door, Window

कोरोना काल में

बैठ गयी है जनपथ की धूल गंगा कुछ साफ़ हो गयी है उसकी आँख में अब सूरज बिल्कुल साफ़ दिखने लगा है। पेड़ों के पत्ते थोड़े और हरिया गए...
Rahul Boyal

राहुल बोयल की कविताएँ

1 नदियों में लहलहा रहा था पानी और खेतों में फ़सल, देखकर हर ओर हरियाली हरा हो ही रहा था मन कि अचानक फट पड़ता है बेवक़्त काला पड़ा हुआ...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)