Tag: Death

Viren Dangwal

रुग्ण पिताजी, शव पिताजी, ख़त्म पिताजी, स्मृति-पिता

रुग्ण पिताजी रात नहीं कटती? लम्‍बी, यह बेहद लम्‍बी लगती है? इसी रात में दस-दस बारी मरना है, जीना है इसी रात में खोना-पाना-सोना-सीना है ज़ख़्म इसी में...
John Donne

जॉन डन की कविता ‘मैं इसलिए नहीं जा रहा हूँ’

कविता: 'मैं इसलिए नहीं जा रहा हूँ' ('Sweetest love, I do not go') कवि: जॉन डन (John Donne)भावानुवाद: दिव्या श्रीमेरी प्यारी महबूबा! मैं इसलिए नहीं जा...
John Donne

जॉन डन की कविता ‘मृत्यु इतना घमण्ड मत करो तुम’

कविता: 'मृत्यु इतना घमण्ड मत करो तुम' ('Death, be not proud') कवि: जॉन डन (John Donne)भावानुवाद: दिव्या श्रीमृत्यु इतना घमण्ड मत करो तुम हालाँकि कुछ लोगों...
Sharon Olds

शैरन ओल्ड्स की कविता ‘उनकी चुप्पी’

शैरन ओल्ड्स (Sharon Olds) अमेरिकी कवयित्री हैं और न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव राइटिंग पढ़ाती हैं। उन्हें कविता में पुलत्ज़र पुरस्कार प्राप्त है। यहाँ...
Alok Kumar Mishra

कविताएँ: जून 2021

सबक़ इस समय ने पढ़ाए हैं हमें कई सबक़मसलन यही कि शब्दों से ज़्यादा स्पर्श में ताक़त होती है मिलने के अवसर गँवाना भूल नहीं, अपराध है और जीवन से...
Om Nagar

जीवन की बात

मैं इस हृदय विदारक समय में केवल जीवन के बारे में सोचता हूँ और उसे मेरी मृत्यु की चिन्ता लगी रहती हैजबकि मैंने कई बार कहा भी क्या...
Gaurav Tripathi

तुम्हारे बाद

तुम्हें दफ़नाकर जाने वाले जानते हैं अपनी भाग-दौड़ तुम्हारी दवाइयों के लिए, वे नहीं जानते तुम्हारे साँस लेने के परिश्रम कोवे जानते हैं गुहार जो लगायी उन्होंने, तुम्हारे...
Sleep, Death

मृत्यु, नहीं आते सपने इन दिनों, लौटना

मृत्यु नहीं आना चाहिए उसे जिस तरह वह आयी है उस तरह जीवन की अनुपस्थिति में निश्चित है आना उसका, पर इस अनिश्चित ढलते समय में वह आयी है आतातायी...
Corona, Covid

उसकी आँखें खुली रहनी चाहिए थीं

(कोरोना से गुज़र गई एक अपरिचित की फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से गुज़रते हुए) 8 मई, 2021 सत्ता है मछली की आँख और दोनों कर्ता-धर्ता अर्जुन और 'ठाकुर' बने थे चूक...
God, Abstract Human

ईश्वर की आँखें

क्या रह जाता है मृत्यु के बाद जब पार हो जाती है देहरी जीवितों और मृतों के बीच? क्या तब पार हो जाएँगी सारी सुबहें और रातें भी स्मृति...
Old age, Hand

पिता की मृत्यु

किसी अधलिखी चिट्ठी की तरह चले गए पिता सब कुछ बाक़ी रह गया धरा का धरा अब वह कभी पूरा नहीं हो पाएगावो स्याही सूख रही है...
Bhagwat Rawat

इतनी बड़ी मृत्यु

आजकल हर कोई, कहीं न कहीं जाने लगा है हर एक को पकड़ना है चुपके-से कोई ट्रेन किसी को न हो कानों-कान ख़बर इस तरह पहुँचना है...

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Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
premchand

सवा सेर गेहूँ

किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा ग़रीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी...
Unsocial Network - Dilip Mandal, Geeta Yadav

वे आपके बारे में बहुत ज़्यादा जानते हैं (किताब अंश: अनसोशल नेटवर्क)

'अनसोशल नेटवर्क' किताब भारत के विशिष्ट सन्दर्भों में सोशल मीडिया का सम्यक् आकलन प्रस्तुत करती है। जनसंचार का नया माध्यम होने के बावजूद, सोशल...
Prayers, Joined Hands

अनुत्तरित प्रार्थना

'परिवर्तन प्रकृति का नियम है' यह पढ़ते-पढ़ाते वक़्त मैंने पूरी शिद्दत के साथ अपने रिश्तों में की स्थिरता की कामनाप्रकृति हर असहज कार्य भी पूरी सहजता के...
Women sitting

अठन्नी, चवन्नी और क्रमशः

इस बार उन्हें नहीं था मोह स्वर्ण-मृग का फिर भी खींची गई थीं लक्ष्मण रेखाएँवे पढ़ीं, आगे बढ़ीं लक्ष्मण रेखाएँ लाँघकर रावण से जा भिड़ींगूँजते आए थे स्वर नेपथ्य...
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