Tag: Democracy

Devi Prasad Mishra

आपके गणतंत्र की एक स्त्री की प्रेमकथा

एक स्त्री प्यार करना चाहती थी लेकिन प्यार करने से चरित्र नष्ट होता हैस्त्री प्यार करना चाहती थी किन्तु चरित्र नहीं नष्ट करना चाहती थीएक स्त्री...
Man lying on footpath, Homeless

तीन चित्र : स्वप्न, इनकार और फ़ुटपाथ पर लेटी दुनिया

1 हम मृत्यु-शैय्या पर लेटे-लेटे स्वप्न में ख़ुद को दौड़ता हुआ देख रहे हैंऔर हमें लगता है हम जी रहे हैं हम अपनी लकड़ियों में आग के...
Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
People, Society, Faces

वे लोकतंत्र को कम जानते थे

वे बहुत पढ़ी-लिखी नहीं थीं ताइवान में काम मिलने की ख़बर उन्हें सुना उनके पैर छू रहा था जब मैं मुझे आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा— "बेटा सम्भलकर...
Amit Tiwary

पीठ

1 बोझा ढोते-ढोते इस देश की पीठ इतनी झुक गयी है कि पलटकर किए जाने वाले काम स्वतंत्रता या संविधान की तरह माने जा चुके हैं किसी पौराणिक गप्प का हिस्सा। 2 राजनीति— नियमों...
Kumar Nayan

पाँव कटे बिम्ब

घिसटते हैं मूल्य बैसाखियों के सहारे पुराने का टूटना नये का बनना दीखता है—सिर्फ़ डाक-टिकटों परलोकतंत्र की परिभाषा क्या मोहताज होती है लोक-जीवन के उजास हर्फ़ों की? तो फिर क्यों दीखते...
Fist, Protest, Dissent

एक छोटी-सी लड़ाई

मुझे लड़नी है एक छोटी-सी लड़ाई एक झूठी लड़ाई में मैं इतना थक गया हूँ कि किसी बड़ी लड़ाई के क़ाबिल नहीं रहा।मुझे लड़ना नहीं अब— किसी...
Ashok Chakradhar

डैमोक्रैसी

पार्क के कोने में घास के बिछौने पर लेटे-लेटे हम अपनी प्रेयसी से पूछ बैठे— क्यों डियर! डैमोक्रैसी क्या होती है? वो बोली— तुम्हारे वादों जैसी होती है! इंतज़ार में बहुत तड़पाती...
Om Purohit Kagad

धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र

स्वघोषित उद्देश्यों को प्रतीक मान मन चाहे कपड़ों से निर्मित ध्वज दूर आसमान की ऊँचाइयों में— फहराने भर से लोकतंत्र की जड़ें भला कैसे हरी रहेंगी?तुम शायद नहीं जानते भरे बादल को पेट...
Sandeep Nirbhay

चिलम में चिंगारी और चरखे पर सूत

मेरे बच्चो! अपना ख़याल रखना आधुनिकता की कुल्हाड़ी काट न दे तुम्हारी जड़ें जैसे मोबाइलों ने लोक-कथाओं और बातों के पीछे लगने वाले हँकारों को काट दिया है जड़ों सहितवर्तमान...
Sarveshwar Dayal Saxena

देश काग़ज़ पर बना नक़्शा नहीं होता

यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो? यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रही...
Adam Gondvi

तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है

तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है मगर ये आँकड़ें झूठे हैं, ये दावा किताबी हैउधर जम्हूरियत का ढोल पीटे जा रहे हैं वो इधर...

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