Tag: Devesh Path Sariya

Nicanor Parra

निकानोर पार्रा की कविताएँ – 2

आख़िरी प्याला इस बात को पसन्द करो या मत करो हमारे पास गिनती के तीन विकल्प होते हैं— भूतकाल, वर्तमान और भविष्य और दरअसल तीन भी नहीं क्योंकि दार्शनिक...
Pehli Boond Neeli Thi - Sonu Yashraj

‘पहली बूँद नीली थी’ : सहज, सौम्य कविताओं का कोलाज

'पहली बूँद नीली थी' सोनू यशराज का पहला कविता संग्रह है। इस संग्रह में कवयित्री की काव्य यात्रा और क्रमागत विकास देखा जा सकता...
John Guzlowski

जॉन गुज़लॉवस्की की कविता ‘मेरे लोग’

जॉन गुज़लॉवस्की (John Guzlowski) नाज़ी यातना कैम्प में मिले माता-पिता की संतान हैं। उनका जन्म जर्मनी के एक विस्थापित कैम्प में हुआ। उनके माता-पिता...
David Michelangelo

टोनी मोंगे की कविता ‘डेविड’ (माइकलेंजेलो की प्रसिद्ध कलाकृति ‘डेविड’ को सम्बोधित)

टोनी मोंगे अमेरिकी नागरिक हैं जो ताइवान में अंग्रेज़ी अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। टोनी का जन्म बॉस्टन में हुआ था और वे...
Man on cycle

साइकिल सवार

हम साइकिल सवार हैं हम पहिए से राब्ता रखते हैं उसके आविष्कार की मूल भावना के साथ किसी ईंधन ने अभी नहीं लिया है पहिए के उत्साह का...
Ravi Katha - Mamta Kalia

‘अन्दाज़-ए-बयाँ उर्फ़ रवि कथा’ : रवींद्र कालिया की स्मृति गाथा

किताब: 'अन्दाज़-ए-बयाँ उर्फ़ रवि कथा लेखिका: ममता कालिया टिप्पणी: देवेश पथ सारिया 'अन्दाज़-ए-बयाँ उर्फ़ रवि कथा' वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया की सद्यःप्रकाशित किताब है, जिसमें उन्होंने अपने...
Devesh Path Sariya

प्रेम को झुर्रियाँ नहीं आतीं

बुढ़िया ने गोद में रखा अपने बुड्ढे का सिर और मालिश करने लगी सिर के उस हिस्से में भी जहाँ से बरसों पहले विदा ले चुके थे बाल दोनों को...
Suraj Ko Angootha - Jitendra Srivastava

‘सूरज को अँगूठा’ : अभिव्यक्ति के विविध रंग

कविता संग्रह: 'सूरज को अँगूठा' कवि: जितेन्द्र श्रीवास्तव टिप्पणी: देवेश पथ सारिया सन 2012 में प्रकाशित 'कायांतरण' के बाद 'सूरज को अँगूठा' वरिष्ठ कवि जितेंद्र श्रीवास्तव का...
Corona, Covid

उसकी आँखें खुली रहनी चाहिए थीं

(कोरोना से गुज़र गई एक अपरिचित की फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से गुज़रते हुए) 8 मई, 2021 सत्ता है मछली की आँख और दोनों कर्ता-धर्ता अर्जुन और 'ठाकुर' बने थे चूक...
Algoze Ki Dhun Par - Divya Vijay

‘अलगोज़े की धुन पर’ : प्रेम के परिपक्व रंगों की कहानियाँ

किताब: 'अलगोज़े की धुन पर' लेखिका: दिव्या विजय टिप्पणी: देवेश पथ सारिया अभी किण्डल पर दिव्या विजय का पहला कहानी संग्रह 'अलगोज़े की धुन पर' पढ़कर समाप्त...
Paltu Bohemian - Prabhat Ranjan

पालतू बोहेमियन: कथेतर गद्य की रोचक पुस्तक

किताब: 'पालतू बोहेमियन' लेखक: प्रभात रंजन प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन टिप्पणी: देवेश पथ सारिया पिछले कुछ समय में कथेतर गद्य की किताबों ने पाठकों को प्रभावित किया है। प्रकाशकों...
Dr Lohia aur Unka Jeewan Darshan - Kumar Mukul

डॉ लोहिया पर दस्तावेज़ी किताब

किताब: 'डॉ लोहिया और उनका जीवन-दर्शन' लेखक: कुमार मुकुल प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन टिप्पणी: देवेश पथ सारिया अपने शीर्षक के अनुरूप ही यह पुस्तक भारत में समाजवाद के अगुआ...

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Rahul Sankrityayan

तुम्हारी जात-पाँत की क्षय

हमारे देश को जिन बातों पर अभिमान है, उनमें जात-पाँत भी एक है। दूसरे मुल्कों में जात-पाँत का भेद समझा जाता है भाषा के...
Anujeet Iqbal

उसका होना

उसके नाम की प्रतिध्वनि किसी स्पन्दन की तरह मन की घाटी में गहरी छुपी रही और मैं एक दारुण हिज्र जीती रही वेदना, व्याकुलता के मनोवेगों में त्वरित बिजुरी की...
Do Log - Gulzar

गुलज़ार के उपन्यास ‘दो लोग’ से किताब अंश

गुलज़ार का उपन्यास 'दो लोग' विभाजन की त्रासदी के बारे में है—त्रासदी भी ऐसी कि इधर आज़ादी की बेला आने को है, और उधर...
Neelabh

जहाँ मैं साँस ले रहा हूँ अभी

जहाँ मैं साँस ले रहा हूँ अभी वहाँ से बहुत कुछ ओझल है ओझल है हत्यारों की माँद ओझल है संसद के नीचे जमा होते किसानों के ख़ून...
Kaynaat

कायनात की कविताएँ

1 इश्क़, तुम मेरी ज़िन्दगी में आओ तो यूँ आओ कि जैसे किसी पिछड़े हुए गाँव में कोई लड़की घण्टों रसोई में खपने के बाद पसीने से भीगी बाहर...
Uberto Stabile

स्पेनिश कवि उबेरतो स्तबिल की कविताएँ

उबेरतो स्तबिल, स्पेनिश कवि और चर्चित अंतर्राष्ट्रीय स्पेनिश पत्रिका के सम्पादक हैं, उनकी कई किताबें प्रकाशित और अनूदित हो चुकी हैं। अनुवाद: पंखुरी सिन्हा एक पाठक...
Pooja Shah

पूजा शाह की कविताएँ

पाज़ेब पाज़ेब पाँवों में नहीं स्तनों पर पहनने से सार्थक होंगी जब औरतें क़दम रखती हैं पकौड़ियों की थाली लिए आदमियों से भरे कमरे में उनकी गपशप के बीच या जब...
Kailash Gautam

कविता मेरी

आलम्बन, आधार यही है, यही सहारा है कविता मेरी जीवन शैली, जीवन धारा है। यही ओढ़ता, यही बिछाता यही पहनता हूँ सबका है वह दर्द जिसे मैं अपना कहता...
Vijay Sharma

क़ब्ल-अज़-तारीख़

सुबह से माँ के घुटनों का दर्द तेज़ था। पिछली रात देसी बाम, गरम पानी और तेल का कोई ख़ास असर नहीं हुआ। इधर...
Lucilla Trappazzo

लुचिल्ला त्रपैज़ो की कविताएँ

लुचिल्ला त्रपैज़ो स्विस इतालवी कवयित्री हैं। उनके चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उनकी रचनाएँ कई भाषाओं में अनूदित भी हो चुकी...
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