Tag: Devesh Path Sariya

Corona, Covid

उसकी आँखें खुली रहनी चाहिए थीं

(कोरोना से गुज़र गई एक अपरिचित की फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से गुज़रते हुए) 8 मई, 2021 सत्ता है मछली की आँख और दोनों कर्ता-धर्ता अर्जुन और 'ठाकुर' बने थे चूक...
Algoze Ki Dhun Par - Divya Vijay

‘अलगोज़े की धुन पर’ : प्रेम के परिपक्व रंगों की कहानियाँ

किताब: 'अलगोज़े की धुन पर' लेखिका: दिव्या विजय टिप्पणी: देवेश पथ सारिया अभी किण्डल पर दिव्या विजय का पहला कहानी संग्रह 'अलगोज़े की धुन पर' पढ़कर समाप्त...
Paltu Bohemian - Prabhat Ranjan

पालतू बोहेमियन: कथेतर गद्य की रोचक पुस्तक

किताब: 'पालतू बोहेमियन' लेखक: प्रभात रंजन प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन टिप्पणी: देवेश पथ सारिया पिछले कुछ समय में कथेतर गद्य की किताबों ने पाठकों को प्रभावित किया है। प्रकाशकों...
Dr Lohia aur Unka Jeewan Darshan - Kumar Mukul

डॉ लोहिया पर दस्तावेज़ी किताब

किताब: 'डॉ लोहिया और उनका जीवन-दर्शन' लेखक: कुमार मुकुल प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन टिप्पणी: देवेश पथ सारिया अपने शीर्षक के अनुरूप ही यह पुस्तक भारत में समाजवाद के अगुआ...
Des - Vinod Padraj

‘देस’ : देशज सन्दर्भों का आख्यान

कविता संग्रह: 'देस' कवि: विनोद पदरज प्रकाशक: बोधि प्रकाशन टिप्पणी: देवेश पथ सारिया विनोद पदरज देशज कवि हैं। वे राजस्थान की खाँटी संस्कृति का हिन्दी कविता में सशक्त...
Devesh Path Sariya

स्त्री से बात

स्त्री से बात करने के लिए निश्चित तौर पर तुम में सलीक़ा होना चाहिए फिर सीखो उसे सुनते जाना उसकी चुप्पी के आयाम तक सीखो ख़ुद भी बातें बनाना कभी चुप हो...
Orhan Veli Kanik

ओरहान वेली की दो कविताएँ

कविताएँ: ओरहान वेली अनुवाद: देवेश पथ सारिया मेरी पूर्व पत्नी हर रात तुम मेरे सपनों में आती हो हर रात मैं तुम्हें साटन की सफ़ेद चादर पर देखता...
Harry Potter - Voldemort

सपने में वॉल्डेमॉर्ट

आप जानते हैं रॉल्फ़ फ़ाइंस को? "तुम जानते हो कौन... वो, जिसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए!" हाँ वही, जो वॉल्डेमॉर्ट बने थे हैरी पॉटर में जिसे देख काँप उठती थी बच्चों...
Nicanor Parra

निकानोर पार्रा की कविताएँ

निकानोर पार्रा चिलियन कवि हैं। प्रस्तुत कविताओं का हिन्दी में अनुवाद देवेश पथ सारिया ने किया है। कविताएँ लोगोज़ जर्नल पर उपलब्ध लिज़ वर्नर...
Flower, Hand

फ़रवरी: वसन्त और प्रेम की कुछ कविताएँ

छोटा पीला फूल जिन छोटे-छोटे फूलों का हम नाम नहीं जानते अवसाद के क्षणों में घास, झाड़ी या पत्तियों में से उँगली बढ़ा वही हमें थाम लेते हैं घास में उगे उस पीले...
Pisa Tower

पीसा की झुकी मीनार पर

कोई उसे धक्का मारकर टेढ़ा कर देने का श्रेय लेना चाहता था कोई जुड़ जाना चाहता था उछलकर सूरज और मीनार को जोड़ती काल्पनिक सरल रेखा...
Mangalesh Dabral

भाषा के एक सेतु कवि का जाना

वरिष्ठ कवि, अनुवादक एवं सम्पादक मंगलेश डबराल के जाने का दुःख बहुत बड़ा है। शायद हिन्दी समाज को पता ही नहीं चला कि वे कब...

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Corona, Covid

उसकी आँखें खुली रहनी चाहिए थीं

(कोरोना से गुज़र गई एक अपरिचित की फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से गुज़रते हुए) 8 मई, 2021 सत्ता है मछली की आँख और दोनों कर्ता-धर्ता अर्जुन और 'ठाकुर' बने थे चूक...
Usha Priyamvada

छुट्टी का दिन

पड़ोस के फ़्लैट में छोटे बच्चे के चीख़-चीख़कर रोने से माया की नींद टूट गई। उसने अलसाई पलकें खोलकर घड़ी देखी, पौने छह बजे...
Sudha Arora

अकेली औरत का हँसना

अकेली औरत ख़ुद से ख़ुद को छिपाती है। होंठों के बीच क़ैद पड़ी हँसी को खींचकर जबरन हँसती है और हँसी बीच रास्ते ही टूट जाती है... अकेली औरत...
Shamsher Bahadur Singh

चुका भी हूँ मैं नहीं

चुका भी हूँ मैं नहीं कहाँ किया मैनें प्रेम अभी। जब करूँगा प्रेम पिघल उठेंगे युगों के भूधर उफन उठेंगे सात सागर। किन्तु मैं हूँ मौन आज कहाँ सजे मैनें साज अभी। सरल से भी...
Franz Kafka, Milena Jesenska

मिलेना को लिखे काफ़्का के पत्रों के कुछ अंश

किताब अंश: 'लेटर्स टू मिलेना' अनुवाद: लाखन सिंह प्रिय मिलेना, काश! ऐसा हो कि दुनिया कल ख़त्म हो जाए। तब मैं अगली ही ट्रेन पकड़, वियना में...
Woman in front of a door

सुबह

कितना सुन्दर है सुबह का काँच के शीशों से झाँकना इसी ललछौंहे अनछुए स्पर्श से जागती रही हूँ मैं बचपन का अभ्यास इतना सध गया है कि आँखें खुल ही जाती...
Rohit Thakur

सोलेस इन मे

कौन आएगा मई में सांत्वना देने कोई नहीं आएगा समय ने मृत्यु का स्वांग रचा है अगर कोई न आए तो बारिश तुम आना आँसुओं की तरह दो-चार बूँदों की...
Fist, Protest, Dissent

एक छोटी-सी लड़ाई

मुझे लड़नी है एक छोटी-सी लड़ाई एक झूठी लड़ाई में मैं इतना थक गया हूँ कि किसी बड़ी लड़ाई के क़ाबिल नहीं रहा। मुझे लड़ना नहीं अब— किसी...
Saadat Hasan Manto

मंटो

मंटो के मुताल्लिक़ अब तक बहुत कुछ लिखा और कहा जा चुका है। उसके हक़ में कम और ‎ख़िलाफ़ ज़्यादा। ये तहरीरें अगर पेश-ए-नज़र...
Sahir Ludhianvi

ख़ून फिर ख़ून है

ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जाएगा ख़ाक-ए-सहरा पे जमे या कफ़-ए-क़ातिल पे जमे फ़र्क़-ए-इंसाफ़ पे...
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