Tag: Farmers

Farmers

मेरे पुरखे किसान थे

मेरे पुरखे किसान थे मैं किसान नहीं हूँ मेरी देह से खेत की मिट्टी की कोई आदिम गन्ध नहीं आती पर मेरे मन के किसी पवित्र स्थान पर सभी पुरखे जड़...
Farmers

वे बैठे हैं

वे बैठे हैं पलथी टिकाए आँख गड़ाए अपनी रोटी बाँधकर ले आए हैं, रखते हैं तुम्हारे सामने अपने घरों के चूल्हे, आश्वासन नहीं माँगते तुमसे माँगते हैं रोटी के बदले रोटी अपने...
Farmer, Village, Ox, Cow, Field

हलधर धरती जोतो रे

हलधर धरती जोतो रे हलधर धरती जोतो रे आज धरा पे कष्ट बड़ा है अंत बड़ा नज़दीक खड़ा है उसका आना रोको रे हलधर धरती जोतो रे हलधर धरती जोतो...
Farmer, Field, Village

भाव, सरकार की चुप्पी

भाव सबसे सस्ता खेत सबसे सस्ता अन्न सबसे सस्ता बीज सबसे सस्ती फ़सल उससे भी बढ़कर सस्ता किसान— जिसके मरने से किसी को जेल नहीं होती, जिसके आत्महत्या करने से किसी को फाँसी नहीं...
Naked Lady, Crouching Nude, Woman, Abstract

कविताएँ: दिसम्बर 2020

लड़कियों का मन कसैला हो गया है इन दिनों लड़कियों का मन कसैला हो गया है अब वह हँसती नहीं दुपट्टा भी लहराती नहीं अब झूला झूलती नहीं न ही...
Adarsh Bhushan

अमलदारी

इससे पहले कि अक्षुण्णताओं के रेखाचित्र ढोते अभिलेखागारों के दस्तावेज़ों में उलटफेर कर दी जाए, उन सारी जगहों की शिनाख़्त होनी चाहिए जहाँ बैठकर एक कुशल और समृद्ध समाज की कल्पनाओं के...
Virag Vinod

विराग की कविताएँ

प्रतीक्षा हमारे ख़ून में है जिन दिनों हम गर्भ में थे सरकारी अस्पताल की लाइन में लगी रहती माँ और डॉक्टर लंच के लिए उठ जाता, कहते...
Khwaja Ahmad Abbas

टिड्डी

मुल्क के मुख़्तलिफ़ हिस्सों से ख़बरें आ रही हैं कि काश्तकार डटकर टिड्डी दल का मुक़ाबला कर रहे हैं। ‎हवाई जहाज़ों से टिड्डी के...
Clouds

मेघ न आए

मेघ न आए। सूखे खेत किसानिन सूखे, सूखे ताल-तलैयाँ, भुइयाँ पर की कुइयाँ सूखी, तलफ़े ढोर-चिरैयाँ। आसमान में सूरज धधके, दुर्दिन झाँक रहे। बीज फोड़कर निकले अंकुर ऊपर ताक रहे। मेघ न आए। सावन...
Farmer, Village, Ox, Cow, Field

ममता जयंत की कविताएँ

चुनौतियाँ पेट से हैं इन दिनों रवि भारी है रबी पर और सुनहरी चमक लिए खड़ी हैं बालियाँ देख रही हैं बाट मज़दूरों की कसमसा रही हैं मीठे...
Farmers

आन्दोलनों के इस दौर में

हृदय में पीड़ा और पाँवों में छाले लिए थका-हारा और निराशा में आकण्ठ डूबा व्यक्ति बदहवास-सा चौराहे से कटने वाली चारों सड़कों पर झाँकता वह कोई और नहीं,...
Farmer

किसान – पन्द्रह लघु कविताएँ

Poems: Pratap Somvanshi एक एक ऐसा बकरा जिसे पूरा सरकारी अमला काटता खाता सेहत बनाता है और वह दूसरों के लिए चारा उगाता है चारा बन जाता है दो कुनीतियों की डायन अपने ही बच्चे खाती...

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RECENT POSTS

Silent, Quiet, Silence, Woman, Shut, Do not speak, Taboo

अंधेरे के नाख़ून

एक छोर से चढ़ता आता है रोशनी को लीलता हुआ एक ब्लैक होल, अंधेरे का नश्तर चीर देता है आसमान का सीना, और बरस पड़ता है बेनूर...
Adarsh Bhushan

लाठी भी कोई खाने की चीज़ होती है क्या?

हमारे देश में लाठियाँ कब आयीं यह उचित प्रश्न नहीं कहाँ से आयीं यह भी बेहूदगी भरा सवाल होगा लाठियाँ कैसे चलीं कहाँ चलीं कहाँ से कहाँ तक चलीं क्या पाया...
Raghuvir Sahay

चेहरा

चेहरा कितनी विकट चीज़ है जैसे-जैसे उम्र गुज़रती है वह या तो एक दोस्त होता जाता है या तो दुश्मन देखो, सब चेहरों को देखो पहली बार जिन्हें...
Kumar Ambuj

कुछ समुच्चय

स्मृति की नदी वह दूर से बहती आती है, गिरती है वेग से उसी से चलती हैं जीवन की पनचक्कियाँ वसंत-1 दिन और रात में नुकीलापन नहीं है मगर...
Gaurav Bharti

हम मारे गए

हमें डूबना ही था और हम डूब गए हमें मरना ही था और हम मारे गए हम लड़ रहे थे कई स्तरों पर लड़ रहे थे हमने निर्वासन का दंश...
Rahul Sankrityayan

तुम्हारे धर्म की क्षय

वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है। एक पूरब मुँह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर। एक...
Melancholy, Sadness, Night

लाखन सिंह की कविताएँ

1 जीना किसी सड़ी लाश को खाने जैसा हो गया है, हर एक साँस के साथ निगलता हूँ उलझी हुई अंतड़ियाँ, इंद्रियों से चिपटा हुआ अपराधबोध घिसटता है माँस के लोथड़े...
Abstract, Head, Human

शिवम तोमर की कविताएँ

रोटी की गुणवत्ता जिस गाय को अम्मा खिलाती रहीं रोटियाँ और उसका माथा छूकर माँगती रहीं स्वर्ग में जगह अब घर के सामने आकर रम्भियाती रहती है अम्मा ने तो खटिया...
Agyeya

युद्ध-विराम

नहीं, अभी कुछ नहीं बदला है। अब भी ये रौंदे हुए खेत हमारी अवरुद्ध जिजिविषा के सहमे हुए साक्षी हैं; अब भी ये दलदल में फँसी हुई मौत की मशीनें उनके...
Rahul Boyal

जब तुम समझने लगो ज़िन्दगी

वो जहाँ पर मेरी नज़र ठहरी हुई है वहाँ ग़ौर से देखो तुम तुम भी वहाँ हो मेरे साथ मेरे दाएँ हाथ की उँगलियों में उलझी हुई हैं...
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