Tag: Flower

Kedarnath Singh

हक़ दो

फूल को हक़ दो—वह हवा को प्यार करे ओस, धूप, रंगों से जितना भर सके, भरे सिहरे, काँपे, उभरे और कभी किसी एक अँखुए की आहट पर पंखुड़ी-पंखुड़ी...
Trilochan

तुम्हें सौंपता हूँ

फूल मेरे जीवन में आ रहे हैंसौरभ से दसों दिशाएँ भरी हुई हैं मेरी जी विह्वल है मैं किससे क्या कहूँआओ, अच्छे आए समीर, ज़रा ठहरो फूल जो पसंद हों,...
Gorakh Pandey

फूल

फूल हैं गोया मिट्टी के दिल हैं धड़कते हुए बादलों के ग़लीचों पे रंगीन बच्चे मचलते हुए प्यार के काँपते होंठ हैं मौत पर खिलखिलाती हुई चम्पईज़िन्दगी जो कभी मात...
Ramnaresh Pathak

फूल लड़ाई

लोग रौशनी से डरते हैं सच से कतराते हैं टेसू कहाँ फूलें?देह देह के आ जाने को डरती है कोहबर घर से कतराती है गुलाब कहाँ उगें?गीत के पोखर आदमी से...
Rag Ranjan

उसने मुझे पीला रंग सिखाया

उसने मुझे पीला रंग सिखायाऔर मुझे दिखायी दिए जीवन के धूसर रंगों के बीचोबीच रू ब रू दो दहकते हुए पीले सूर्यमुखी एक से दूसरे के...
Makhdoom Mohiuddin

फिर छिड़ी रात बात फूलों की

फिर छिड़ी रात बात फूलों की रात है या बरात फूलों कीफूल के हार, फूल के गजरे शाम फूलों की, रात फूलों कीआप का साथ, साथ...
Tithi Dani

तिथि दानी की कविताएँ

प्रलय के अनगिनत दिन आज फिर एक डॉक्टर की मौत हुई कल पाँच डॉक्टरों के मरने की ख़बरें आयीं इनमें से एक स्थगित कर चुकी थी अपनी...
Night Jasmine, Parijat, Harsingar

पीड़ा के फूल

अगर जानना चाहते हो पीड़ा क्या है, तो मेरे वक्षस्थल पर अपना सर रख देना, कुछ देर के लिए निस्तेज हो जाना, जैसे मर जाते हैं लोग प्रेम की पीड़ा में प्यासे...तुम्हें...
Giving Flower, Love, Joy, Happiness, Flower

मुस्कराएँगे नागफनियों में खिले फूल

'Muskraaenge Nagphaniyon Mein Khile Phool', a poem by Saraswati Mishraज़िन्दगी एक लम्बी सड़क है सड़क के दोनों ओर लम्बी क़तारें हैं नागफनियों की नागफनियों के काँटों के बीच खिले...
Palash Ke Phool

पलाश के फूल

'Palash Ke Phool', a poem by Prita Arvindजंगल में पलाश के पेड़ पर फूल लग गए हैं, यह किसी को बताना नहीं पड़ता क्यूंकि पलाश के फूल...
Kailash Vajpeyi

हत्यारा

बच्चा तितली पकड़ रहा है बच्चा नादान है होगा बच्चे तो होते ही हैं तुमने वह चीख़ भी देखी नयी तरह से क्या सुना इस दृश्य को बच्चा हत्यारा है वह किसी फूल...
Sara Shagufta

साए की ख़ामोशी

साए की ख़ामोशी सिर्फ़ ज़मीन सहती है खोखला पेड़ नहीं या खोखली हँसी नहीं और फिर अंजान अपनी अनजानी हँसी में हँसा क़हक़हे का पत्थर संग-रेज़ों में...

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टी. एस. ईलियट के प्रति

पढ़ रहा था कल तुम्हारे काव्य कोऔर मेरे बिस्तरे के पास नीरव टिमटिमाते दीप के नीचे अँधेरे में घिरे भोले अँधेरे में घिरे सारे सुझाव, गहनतम संकेत! जाने...
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