Tag: freedom

Fist, Protest, Dissent

आज़ाद कवि

अपराधी-सा जब उन्हें पकड़ा गया वो हमेशा की तरह अपने कामों में व्यस्त थे, लहूलुहान जंगल और नदी के ज़ख़्मों पर मलहम लगा फूलों को सुरक्षित करने के...
Harivansh Rai Bachchan

आज़ादी के बाद

अगर विभेद ऊँच-नीच का रहा अछूत-छूत भेद जाति ने सहा किया मनुष्य औ’ मनुष्य में फ़रक़ स्वदेश की कटी नहीं कुहेलिका। अगर चला फ़साद शंख-गाय का फ़साद सम्प्रदाय-सम्प्रदाय का उलट न...
Nelson Mandela

नेल्सन मंडेला

छोटी-सी जगह से बड़े-बड़े सपने देखे जा सकते हैं उसने बचपन में पिता से सुनी थी यह बात तभी तो उसने देखा था जेल की आठ बाई सात की...
Ramnika Gupta

पैने चाक़ू

मैं पंख फैलाए बांधे पंखों में हवा उन्मत्त मदमस्त उन्मुक्त गगन में उड़ती थी... रास नहीं आया उन्हें मेरा उड़ना वे पंजे पजाकर चोंत तेज़ कर धारदार पैनी नज़रों से मेरे पंख काटने को उद्यत बढ़े आ...
Ahmad Nadeem Qasmi

एक दरख़्वास्त

ज़िन्दगी के जितने दरवाज़े हैं, मुझ पे बंद हैं देखना— हद्द-ए-नज़र से आगे बढ़कर देखना भी जुर्म है सोचना— अपने अक़ीदों और यक़ीनों से निकलकर सोचना...
Dhoomil

बीस साल बाद

बीस साल बाद मेरे चेहरे में वे आँखें लौट आयी हैं जिनसे मैंने पहली बार जंगल देखा है: हरे रंग का एक ठोस सैलाब जिसमें सभी पेड़...
Woman, Painted Face, Angry

बातचीत: ‘मिसॉजिनि क्या है?’

पढ़िए तसनीफ़ और शिवा की मिसॉजिनि (Misogyny (शाब्दिक अर्थ: स्त्री द्वेष)) पर एक विस्तृत बातचीत। तसनीफ़ उर्दू शायरी करते रहे हैं, उन्होंने एक नॉविल...
Gaurav Bharti

कविताएँ: जून 2020

मुक्तावस्था मंडी हाउस के एक सभागार में बुद्धिजीवियों के बीच बैठी एक लड़की नाटक के किसी दृश्य पर ठहाके मार के हँस पड़ती है सामने बैठे सभी लोग मुड़कर देखते...
Girl, Woman, Smiling, Window

मैं आज़ाद हुई हूँ

खिड़कियाँ खोल दो शीशे के रंग भी मिटा दो परदे हटा दो हवा आने दो धूप भर जाने दो दरवाज़ा खुल जाने दो मैं आज़ाद हुई हूँ सूरज आ गया है मेरे कमरे में अन्धेरा...
Krishna Baldev Vaid

उड़ान

और एक दिन वह सब काम-धन्धे छोड़कर घर से निकल पड़ी। कोई निश्चित प्रोग्राम नहीं था, कोई सम्बन्धी बीमार नहीं था, किसी का लड़का पास...

हाथ खोल दिए जाएँ

मेरे हाथ खोल दिए जाएँ तो मैं इस दुनिया की दीवारों को अपने ख़्वाबों की लकीरों से सियाह कर दूँ और क़हर की बारिश बरसाऊँ और इस दुनिया को अपनी...
Middle aged woman

स्त्रियों, चलो कहीं और चलें

'Striyon Chalo Kahin Aur Chalein', a poem by Rupam Mishra ये शयनकक्ष से संसद तक काँटेदार हँकना लेकर खड़े हैं जो हमारे ज़रा से इंकार पर...

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Vijay Sharma

घोष बाबू और उनकी माँ

"हम यहाँ से निकलकर कहाँ जाएँगे?" — शिल्पा ने अनिमेष के कंधे पर सिर रक्खे कहा। "जहाँ क़िस्मत ले जाए!" — अनिमेष की आवाज़ में...
Ahmad Faraz

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें साक़िया साक़िया सम्भाल हमें रो रहे हैं कि एक आदत है वर्ना इतना नहीं मलाल हमें ख़ल्वती हैं तेरे जमाल के हम आइने...
Ghumakkad Shastra

राहुल सांकृत्यायन – ‘घुमक्कड़ शास्त्र’

राहुल सांकृत्यायन की किताब 'घुमक्कड़ शास्त्र' से उद्धरण | Quotes from Ghumakkad Shastra, a book by Rahul Sankrityayan चयन: पुनीत कुसुम "वैसे तो गीता को बहुत...
Rahul Sankrityayan

स्‍मृतियाँ

घुमक्कड़ असंग और निर्लेप रहता है, यद्यपि मानव के प्रति उसके हृदय में अपार स्‍नेह है। यही अपार स्‍नेह उसके हृदय में अनंत प्रकार...
Yehuda Amichai

और हम उत्साहित नहीं होंगे

Poem: And We Shall Not Get Excited Poet: Yehuda Amichai Translated from the Hebrew by Barbara and Benjamin Harshav अंग्रेज़ी से अनुवाद: सृष्टि ठाकुर और हम उत्साहित नहीं...
Hands. Separation

कभी न लौटने के लिए मत जाना

सुनो! जब जाना तो इस तरह मत जाना कि कभी लौट न सको उन्हीं रास्तों पर वापस जाते हुए गिराते जाना रास्ते में ख़त का पुर्ज़ा, कोई...
Rabindranath Tagore

साहित्य की सामग्री

राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित 'साहित्य विधाओं की प्रकृति' से  अनुवाद : वंशीधर विद्यालंकार केवल अपने लिए लिखने को साहित्य नहीं कहते हैं—जैसे पक्षी अपने आनंद के...
Faiz Ahmad Faiz

इस वक़्त तो यूँ लगता है

इस वक़्त तो यूँ लगता है, अब कुछ भी नहीं है महताब न सूरज, न अँधेरा न सवेरा आँखों के दरीचों पे किसी हुस्न की चिलमन और...
Bheedtantra - Asghar Wajahat

‘भीड़तंत्र’ से दो लघु कहानियाँ

राजपाल एण्ड सन्ज़ से प्रकाशित असग़र वजाहत की किताब 'भीड़तंत्र' से साभार स्वार्थ का फाटक —“हिंसा का रास्ता कहाँ से शुरू होता है?” —“जहाँ से बातचीत का...
Pratibha Sharma

लाल रिबन

मेरे गाँव में सफ़ेद संगमरमर से बनी दीवारें लोहे के भालों की तरह उगी हुई हैं जिनकी नुकीली नोकों में नीला ज़हर रंगा हुआ है खेजड़ी के ईंट-चूने...
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