Tag: दोस्ती

Girls, Kids

सईदा के घर

सईदा के घर तन्दूर पर सिकी रोटियाँ मैं रोज़ खाती प्याज़ और भुने आलू के साथ मैं और सईदा मेरी प्यारी सहेली— हम जाते गलियों से होते हुए बाज़ार...
Vishnu Prabhakar - Kavita

सुन्दर लड़की

समुद्र के किनारे एक गाँव था। उसमें एक कलाकार रहता था। वह दिन-भर समुद्र की लहरों से खेलता रहता, जाल डालता और सीपियाँ बटोरता।...
Little Girl, Kid

नन्ही बच्चियाँ

'Nanhi Bachchiyaan', a poem by Nirmal Gupt दो नन्ही बच्चियाँ घर की चौखट पर बैठीं पत्थर उछालती, खेलती हैं कोई खेल वे कहती हैं इसे- गिट्टक! इसमें न...
Devendra Ahirwar

फ्रेंड रिक्वेस्ट

हम पुराने दोस्त थे, हम बहुत पुराने दोस्त थे, साथ-साथ पढ़े, साथ-साथ खेले और साथ में बचपन की परीक्षा पास कर के जवानी में दाख़िला लिया, साथ-साथ भारी...

कविता से दोस्ती

बहुत तन्हा रहता हूँ आजकल बस बीच-बीच में कुछ कवितायें मिलनें आती हैं बहुत दूर-दूर से, कभी-कभी सरहदों के पार से कभी अकेले तो कभी अनुवादकों का...
Gulsher Khan Shani

दोज़ख़ी

"क्या मैंने उन मित्रों को माफ नहीं किया था, जो अस्पताल में मुझे देखने या मुझसे मिलने नहीं आए थे, और क्यों उन दुश्मनों के लिए भी मैं नरम हो गया था जो मेरे पलंग के पास आकर खड़े हो गए थे।"

ऐ दोस्त

एक शाम हुआ करती थी जो ढल गई तेरे जाने के बाद ऐ दोस्त! चाय की चुस्कियों में अब मज़ा नहीं रहा। बादल गरजते रहे, बरसते भी रहे चौकोर टेबल, और वो...
Premchand

गुल्‍ली-डंडा

हमारे अँग्रेजी दोस्त मानें या न मानें मैं तो यही कहूँगा कि गुल्ली-डंडा सब खेलों का राजा है। अब भी कभी लड़कों को गुल्ली-डंडा...
Parveen Shakir

एक दोस्त के नाम

'Ek Dost Ke Naam', a nazm by Parveen Shakir लड़की! ये लम्हे बादल हैं गुज़र गए तो हाथ कभी नहीं आएँगे इन के लम्स को पीती जा क़तरा-क़तरा भीगती...
Majaz Lakhnavi

एक दोस्त की ख़ुश-मज़ाक़ी पर

"क्या तिरी नज़रों में ये रंगीनियाँ भाती नहीं क्या हवा-ए-सर्द तेरे दिल को तड़पाती नहीं क्या नहीं होती तुझे महसूस मुझ को सच बता तेज़ झोंकों में हवा के गुनगुनाने की सदा..."
Pratap Narayan Mishra

मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता

"मित्र कपटी भी बुरा नहीं होता, मिष्‍ठान्न विषयुक्त भी कड़ुवा नहीं होता, और हमारा लेख ऊटपटाँग भी बेमजा नहीं होता!"
Premchand

नादान दोस्त

केशव और श्यामा ने चिड़ियों के अंडे देखे तो उनकी देखभाल में जुट गए.. लेकिन ठहरे बच्चे ही.. उनकी एक गलती वे दोनों, खास तौर से केशव कभी नहीं भूल पाया.. क्या थी वह गलती और अगर आप केशव की जगह होते तो क्या वह गलती न करते? यह भी विडंबना है कि वर्तमान परिवेश में तो बच्चों को यह गलती करने का मौका भी न मिलेगा..

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'अभी जिया नहीं' से विदा का शब्दों से निकलकर जब स्मृतियों में अस्तित्व हो जाता है दूर होना किसी किताब का बेमानी शब्द-सा रह जाता है किसी का...
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संयुक्त राष्ट्र में दिया मलाला का भाषण

'मलाला हूँ मैं' से संयुक्त राष्ट्र ने जुलाई 12 का दिन ‘मलाला दिवस’ घोषित किया है। 12 जुलाई, 2013 को अपने 16वें जन्मदिवस पर मलाला...
Viren Dangwal

इतने भले नहीं बन जाना

इतने भले नहीं बन जाना साथी जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी गदहा बनने में लगा दी अपनी सारी क़ुव्वत, सारी प्रतिभा किसी से कुछ लिया...
Dharmasthal - Priyamvad

प्रियम्वद – ‘धर्मस्थल’

प्रियम्वद की किताब 'धर्मस्थल' से उद्धरण | Hindi Quotes by 'Dharmasthal', a book by Priyamvad संकलन: विजय शर्मा   "रचना के संसार में जब तुम कुछ नया...
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युवक!

आचार्य शिवपूजन सहाय की डायरी के अंश, 23 मार्च, पृष्ठ 28 सन्ध्या समय सम्मेलन भवन के रंगमंच पर देशभक्त भगत सिंह की स्मृति में सभा...
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मीठी अनुभूतियों को

हमने मधुर स्मृतियों और मीठी अनुभूतियों को इन कठोर हाथों से, तुम्हारे लिए हृदय से खींच बिखेरा है हमारे लहू के एक-एक क़तरे ने तुम्हारे खेत की बंजर भूमि...
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घोष बाबू और उनकी माँ

"हम यहाँ से निकलकर कहाँ जाएँगे?" — शिल्पा ने अनिमेष के कंधे पर सिर रक्खे कहा। "जहाँ क़िस्मत ले जाए!" — अनिमेष की आवाज़ में...
Ahmad Faraz

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें

ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें साक़िया साक़िया सम्भाल हमें रो रहे हैं कि एक आदत है वर्ना इतना नहीं मलाल हमें ख़ल्वती हैं तेरे जमाल के हम आइने...
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स्‍मृतियाँ

घुमक्कड़ असंग और निर्लेप रहता है, यद्यपि मानव के प्रति उसके हृदय में अपार स्‍नेह है। यही अपार स्‍नेह उसके हृदय में अनंत प्रकार...
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