Tag: स्त्री विमर्श

Naked Lady, Crouching Nude, Woman

कविताएँ: दिसम्बर 2020

लड़कियों का मन कसैला हो गया है इन दिनों लड़कियों का मन कसैला हो गया है अब वह हँसती नहीं दुपट्टा भी लहराती नहीं अब झूला झूलती नहीं न ही...
R Chetankranti

मर्दानगी

पहला नियम तो ये था कि औरत रहे औरत फिर औरतों को जन्म देने से बचे औरत जाने से पहले अक़्ल-ए-मर्द ने कहा ये भी— मर्दों की...
Girl, Woman

पीड़ा, नायिका

पीड़ा ढल चुका है दिन ढल गया पुष्पों का यौवन... अछोर आकाश में अब चाँद ढल रहा धीरे-धीरे डूब रहे हैं नक्षत्र देखो! रात ढल गई आधी-आधी... आयु ढल गई ढल गए वे दिन सहर्ष जिए थे जो...
Sushila Takbhore

अनुत्तरित प्रश्न

गूँजती है आवाज़ यदि किसी गहरे कुएँ से, अँधेरी गुफा से कुछ कहा जाए प्रतिउत्तर में ध्वनि गूँजती है। मगर तुम कभी जवाब नहीं देते मुझे नगण्य मानते हो या चाहते...
Rope, Wall, Woman, Anxiety, Oppression

कितने लाचार तुम

कितना खोखला लगता है तुम्हारा वजूद जब अपने ही द्वारा बनायी व्यवस्था की देने लग जाते हो तुम दलीलें, तुम्हारी सामन्ती परिभाषाएँ कितनी ऊपरी— ख़ुद की रक्षा करती हुईं बड़ी सहजता...
Anamika

पतिव्रता

जैसे कि अंग्रेज़ी राज में सूरज नहीं डूबा था, इनके घर में भी लगातार दकदक करती थी एक चिलचिलाहट। स्वामी जहाँ नहीं भी होते थे होते थे उनके वहाँ पँजे, मुहर,...
Mahadevi Verma

नारीत्व का अभिशाप

'शृंखला की कड़ियाँ' से चाहे हिन्दू नारी की गौरव-गाथा से आकाश गूँज रहा हो, चाहे उसके पतन से पाताल काँप उठा हो परन्तु उसके लिए...
Woman doing home chores

ताले और चाबियाँ

चाबियाँ थमा बना दिया गया मुझे मालकिन और मैं इस भुलावे मैं आ तालों में उलझती रही, दिन-ब-दिन रसोई से शयनकक्ष तक घुमाती रही कर्तव्यों की चाबियाँ, लगाती रही ताले अपनी आदतों,...
Cric Panda Pon Pon Pon

पीरियड का पहला दिन

समाज में टैबू समझे जाने वाले विषयों पर लिखी गई कविताएँ और कहानियाँ अक्सर उससे जुड़ी असजहता से बाहर नहीं निकल पातीं और जाने-अनजाने...
Nirmala Garg

फ़ेयर एण्ड लवली

फ़ेयर एण्ड लवली की सालाना बिक्री है आठ हज़ार करोड़ कविता की किताब छपती है मात्र तीन सौ फ़ेयर एण्ड लवली = गोरा रंग गोरा रंग = सुंदर...
Free and confident woman

इस स्त्री से डरो

यह स्त्री सब कुछ जानती है पिंजरे के बारे में जाल के बारे में यंत्रणागृहों के बारे में। उससे पूछो पिंजरे के बारे में पूछो वह बताती है नीले अनन्त विस्तार में उड़ने...
Taslima Nasrin

बदनसीब

मैं हूँ सिमटी-सिकुड़ी हुई माघ की रात की एक वस्त्रहीन लड़की जिसकी देह पर कपड़े नहीं हैं अपनी कोमल उँगलियों को मोड़कर रखती हूँ हथेलियों में। नाच उठी थी...

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Balli Singh Cheema

रोटी माँग रहे लोगों से

रोटी माँग रहे लोगों से किसको ख़तरा होता है? यार सुना है लाठी-चारज, हल्का-हल्का होता है। सिर फोड़ें या टाँगें तोड़ें, ये क़ानून के रखवाले, देख रहे हैं...
Sushant Supriye - Daldal

क़िस्सागोई का कौतुक देती कहानियाँ

समीक्ष्य कृति: दलदल (कहानी संग्रह) (अंतिका प्रकाशन, ग़ाज़ियाबाद) टिप्पणी: सुषमा मुनीन्द्र 1 सुपरिचित रचनाकार सुशांत सुप्रिय का सद्यः प्रकाशित कथा संग्रह ‘दलदल’ ऐसे समय में आया है...
Naked Lady, Crouching Nude, Woman

कविताएँ: दिसम्बर 2020

लड़कियों का मन कसैला हो गया है इन दिनों लड़कियों का मन कसैला हो गया है अब वह हँसती नहीं दुपट्टा भी लहराती नहीं अब झूला झूलती नहीं न ही...
Man sitting seaside, Beach, Water

मेरे देखने से, प्रेम में असफल लड़के पर कविता

मेरे देखने से मैंने देखा तो नीला हो गया आकाश, झूमने लगे पीपल के चमकते हरे पत्ते। मैंने देखा तो सफ़ेद बर्फ़ से ढँका भव्य पहाड़ एकदम से उग आया क्षितिज पर। मैंने...
Fight, Oppression, Beating

कायरों का गीत

शोर करोगे! मारेंगे बात कहोगे! मारेंगे सच बोलोगे! मारेंगे साथ चलोगे! मारेंगे ये जंगल तानाशाहों का इसमें तुम आवाज़ करोगे? मारेंगे... जो जैसा चलता जाता है, चलने दो दीन-धरम के नाम...
Dictatorship

क्या तानाशाह जानते हैं

क्या तानाशाह जानते हैं कि मुसोलिनी के ज़हर उगलने वाले मुँह में डाला गया था मरा हुआ चूहा एक औरत ने सरेआम स्कर्ट उठाकर मूत दिया था मुसोलिनी के मुँह पर लटकाया...
Shrikant Verma

सूर्य के लिए

गहरे अँधेरे में, मद्धिम आलोक का वृत्त खींचती हुई बैठी हो तुम! चूल्हे की राख-से सपने सब शेष हुए। बच्चों की सिसकियाँ भीतों पर चढ़ती छिपकलियों सी बिछल गईं। बाज़ारों के सौदे जैसे जीवन के...
Ashok Vajpeyi

हाथ

1 यह सुख भी असह्य हो जाएगा यह पूरे संसार का जैसे एक फूल में सिमटकर हाथ में आ जाना यह एक तिनके का उड़ना घोंसले का सपना बनकर आकाश में यह...
Viren Dangwal

कैसी ज़िन्दगी जिए

एक दिन चलते-चलते यों ही ढुलक जाएगी गर्दन सबसे ज़्यादा दुःख सिर्फ़ चश्मे को होगा, खो जाएगा उसका चेहरा अपनी कमानियों से ब्रह्माण्ड को जैसे-तैसे थामे वह भी चिपटा रहेगा...
Periyar Books in Hindi

पेरियारः प्रेरणा और प्रयोजन

पेरियारः प्रेरणा और प्रयोजन कृपाशंकर चौबे बहुजन साहित्य की अवधारणा को सैद्धान्तिक आधार देनेवाले प्रमोद रंजन ने समाज सुधार आन्दोलन के पितामह पेरियार ई.वी. रामासामी (17...
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