Tag: स्त्री

Dark, Face, Girl, Woman, Sad

ख़तरनाक दुःख

मेरा दुःख नितान्त मेरा था जो कुछ-कुछ मेरी माँ या उनके जैसी तमाम औरतों के दुःख-सा ग़ैर-ज़रूरी मगर ख़तरनाक घोषित था जिन्हें घर-गृहस्थी में फँस, न जीने की फ़ुर्सत थी न मरने की।जिनके...
Pallavi Mukherjee

कविताएँ: जुलाई 2021

लौट आओ तुम तुम रहती थीं आकाश में बादलों के बीच तारों के संग चाँद के भीतर खुली धूप में हरी घास में फूलों में झरते हरसिंगार में गौरैयों की आवाज़ में कोयल की मीठी...
Nariwadi Nigah Se - Nivedita Menon

किताब अंश: ‘नारीवादी निगाह से’ – निवेदिता मेनन

निवेदिता मेनन की किताब 'नारीवादी निगाह से' में नारीवादी सिद्धातों की जटिल अवधारणाएँ और व्यावहारिक प्रयोग स्पष्ट और सहज भाषा में प्रस्तुत किए गए...
David Michelangelo

टोनी मोंगे की कविता ‘डेविड’ (माइकलेंजेलो की प्रसिद्ध कलाकृति ‘डेविड’ को सम्बोधित)

टोनी मोंगे अमेरिकी नागरिक हैं जो ताइवान में अंग्रेज़ी अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। टोनी का जन्म बॉस्टन में हुआ था और वे...
Yashasvi Pathak

यशस्वी पाठक की कविताएँ

कविताएँ: यशस्वी पाठक एक कवि और लेखकों की शामें दोस्तों के साथ या सड़कों पर गश्त लगाते गुज़रती हैं जहाँ गर्भ धारण करते हैं उनके मस्तिष्क जिससे जन्म...
Devi Prasad Mishra

औरतें यहाँ नहीं दिखतीं

औरतें यहाँ नहीं दिखतीं वे आटे में पिस गई होंगी या चटनी में पुदीने की तरह महक रही होंगीवे तेल की तरह खौल रही होंगी, उनमें घर...
Sudha Arora

अकेली औरत का हँसना

अकेली औरत ख़ुद से ख़ुद को छिपाती है। होंठों के बीच क़ैद पड़ी हँसी को खींचकर जबरन हँसती है और हँसी बीच रास्ते ही टूट जाती है...अकेली औरत...
Woman in front of a door

सुबह

कितना सुन्दर है सुबह का काँच के शीशों से झाँकनाइसी ललछौंहे अनछुए स्पर्श से जागती रही हूँ मैं बचपन का अभ्यास इतना सध गया है कि आँखें खुल ही जाती...
Woman india

अभीष्ट

अकारण तो नहीं साउद्देश्य ही था व्यवस्था के पन्नों पर कुछ लिखित, कुछ अलिखितप्रथम-दृष्टया तो अबूझ रहा चेतना के उत्तरोत्तर क्रम के बाद जाना कि उछाले गए सिक्के के चित...
Women sitting

वे सब मेरी ही जाति से थीं

मुझे तुम न समझाओ अपनी जाति को चीन्हना श्रीमान बात हमारी है, हमें भी कहने दो तुम ये जो कूद-कूदकर अपनी सहूलियत से मर्दवाद का बहकाऊ...
Woman Abstract

अपर्याप्त

क्रोध का हलाहल इतना व्याप्त था कि उसका सम्पूर्ण अस्तित्व हो गया था विषमय मेरे पास थी सिर्फ़ एक बूँद मिठास चाहा था उसे सागर में घोलना उसे मीठा करना पर...
Mangalesh Dabral

प्रेम करती स्त्री

प्रेम करती स्त्री देखती है एक सपना रोज़ जागने पर सोचती है क्या था वह निकालने बैठती है अर्थदिखती हैं उसे आमफ़हम चीज़ें कोई रेतीली जगह लगातार बहता नल उसका...

STAY CONNECTED

42,471FansLike
20,941FollowersFollow
29,157FollowersFollow
2,030SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Chen Chien-wu

चेन च्येन वू की कविताएँ

ताइवान के नांताऊ शहर में सन् 1927 में जन्मे कवि चेन च्येन वू मंदारिन, जापानी और कोरियाई भाषाओं में पारंगत कवि हैं। अपने कई...
Ekaterina Grigorova

बुल्गारियाई कवयित्री एकैटरीना ग्रिगरोवा की कविताएँ

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा सामान्यता मुझे बाल्टिक समुद्र का भूरा पानी याद है! 16 डिग्री तापमान की अनंत ऊर्जा का भीतरी अनुशासन!बदसूरत-सी एक चीख़ निकालती है पेट्रा और उड़ जाता है आकाश में बत्तखों...
Naomi Shihab Nye

नेओमी शिहैब नाय की कविता ‘जो नहीं बदलता, उसे पहचानने की कोशिश’

नेओमी शिहैब नाय (Naomi Shihab Nye) का जन्म सेंट लुइस, मिसौरी में हुआ था। उनके पिता एक फ़िलिस्तीनी शरणार्थी थे और उनकी माँ जर्मन...
Vinita Agrawal

विनीता अग्रवाल की कविताएँ

विनीता अग्रवाल बहुचर्चित कवियित्री और सम्पादक हैं। उसावा लिटरेरी रिव्यू के सम्पादक मण्डल की सदस्य विनीता अग्रवाल के चार काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके...
Gaurav Bharti

कविताएँ: अगस्त 2022

विस्मृति से पहले मेरी हथेली को कैनवास समझ जब बनाती हो तुम उस पर चिड़िया मुझे लगता है तुमने ख़ुद को उकेरा है अपने अनभ्यस्त हाथों से।चारदीवारी और एक...
Nicoleta Crăete

रोमानियाई कवयित्री निकोलेटा क्रेट की कविताएँ

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा औंधा पड़ा सपना प्यार दरअसल फाँसी का पुराना तख़्ता है, जहाँ हम सोते हैं! और जहाँ से हमारी नींद, देखना चाह रही होती है चिड़ियों की ओर!मत...
Daisy Rockwell - Geetanjali Shree

डेज़ी रॉकवेल के इंटरव्यू के अंश

लेखक ने अपनी बात कहने के लिए अपनी भाषा रची है, इसलिए इसका अनुवाद करने के लिए आपको भी अपनी भाषा गढ़नी होगी। —डेज़ी...
Kalam Ka Sipahi - Premchand Jeevani - Amrit Rai

पुस्तक अंश: प्रेमचंद : कलम का सिपाही

भारत के महान साहित्यकार, हिन्दी लेखक और उर्दू उपन्यासकार प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। प्रेमचंद ने अपने जीवन काल में कई रचनाएँ...
Priya Sarukkai Chabria

प्रिया सारुकाय छाबड़िया की कविताएँ

प्रिया सारुकाय छाबड़िया एक पुरस्कृत कवयित्री, लेखिका और अनुवादक हैं। इनके चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें नवीनतम 'सिंग ऑफ़ लाइफ़ रिवीज़निंग...
aadhe adhoore mohan rakesh

आधे-अधूरे : एक सम्पूर्ण नाटक

आधे-अधूरे: एक सम्पूर्ण नाटक समीक्षा: अनूप कुमार मोहन राकेश (1925-1972) ने तीन नाटकों की रचना की है— 'आषाढ़ का एक दिन' (1958), 'लहरों के राजहंस' (1963)...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)