Tag: Girl

Manbahadur Singh

लड़की जो आग ढोती है

हाँ... मेरी चारपाई अब खिड़की के पास कर दो जिससे दिखे वह डगर जिस पर वह लड़की सिर पर सूखी लकड़ियों का गट्ठर लिए खड़ी हरे पेड़...
Badrinarayan

चिड़िया रे

चिड़िया रे! चिड़िया होने का अर्थ फाड़ दो, मछली रे! मछली होने का अर्थ काट दो, लड़की चिन्दी-चिन्दी कर दो लड़की होने के अर्थ कोबकुल के फूल, बकुल...
Indu Jain

लड़की

गणित पढ़ती है ये लड़की हिन्दी में विवाद करती अंग्रेज़ी में लिखती है मुस्कुराती है जब भी मिलती है ग़लत बातों पर तनकर अड़ती खुला दिमाग़ लिए ज़िन्दगी से निकलती है ये लड़कीअगर...
Nida Fazli

एक लड़की

काव्य-संकलन: 'शहर से गाँव' लिप्यंतरण: आमिर विद्यार्थीवह फूल-फूल बदन साँवली-सी एक लड़की जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है सुना है वह किसी लड़के से प्यार करती है बहार...
Manmeet Soni

घर से भागी हुई लड़की

1"तू सगे माँ-बाप की नहीं हुई मेरी क्या होगी साली!"पहले घर से भागी हुई लड़की ने दूसरा घर भी छोड़ दिया है, और तीसरा घर ढूँढ रही है..!2"रांड! अमावस के दिन...
Girl reading a book, School, Kid

लड़की चाहती है

'Ladki Chahti Hai', a poem by Pratap Somvanshiघर में काम पर लगे बढ़ई को देखकर बड़ा होकर बढ़ई बनना चाहती है लड़की ताकि वह अपने गुड्डे-गुड़िया के...
Woman Abstract

सुनो लड़की नया फ़रमान

'Suno Ladki Naya Farmaan', a poem by Amandeep Gujralऐ लड़की सुनो जब निकलो घर से एक जोड़ा कपड़ों का साथ रखना, इन दिनों एक फ़रमान जारी किया...
Baby Abortion, Female Feticide

चौथी लड़की

'Chauthi Ladki', a poem by Mridula Singhइंतजार का दिन पूर गया हर कोई देख रहा है एक-दूसरे की आँख में तैरता कुल का सवाल लड़का या लड़की? तीन पहले से...
Girl

क़स्बाई लड़की

"कई बार उसको लगता कि जैसे ये बारिश नहीं उसी की बेचैनी है, जो बादलों की ओट लेकर धरती पर बरस रही है। सच जब चारों तरफ़ ख़ुशनुमा मौसम हो, तब बेचैन होना कितनी बेचैनी भरा होता है, ये केवल वही जान सकता है जिसका दिल दफ़अतन कहीं गिर गया हो।"
Joshnaa Banerjee Adwanii

एकतरफ़ा प्रेम में लड़की

'Ektarfa Prem Mein Ladki', a poem by Joshnaa Banerjee Adwaniiबादलों पर टिका देती है ऐंठे हुए सोमवार साग के डण्ठलों में ढूँढ लेती है उसकी...
Om Purohit Kagad

वह लड़की

'Wah Ladki', a poem by Om Purohit 'Kagad'सामने के झोपड़े में रहने वाली वह लड़की अब सपने नहीं देखती।वह जानती है कि सपने में भी पुरुष की सत्ता...
Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga

एक लड़की को देखा तो कैसा लगा?

दो लोग एक दूसरे के प्यार में पड़ते हैं, इस राह में उनके सामने कुछ कठिनाइयाँ आती हैं, मगर आखिरकार वे उन कठिनाइयों को...

STAY CONNECTED

38,332FansLike
19,561FollowersFollow
27,839FollowersFollow
1,660SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Nurit Zarchi

नूइत ज़ारकी की कविता ‘विचित्रता’

नूइत ज़ारकी इज़राइली कवयित्री हैं जो विभिन्न साहित्य-सम्बन्धी पुरस्कारों से सम्मानित हैं। प्रस्तुत कविता उनकी हीब्रू कविता के तैल गोल्डफ़ाइन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी...
Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
Naresh Mehta

कवच

मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
Vishesh Chandra Naman

मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
Gaurav Bharti

कविताएँ: नवम्बर 2021

यात्री भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है? इसका एक ही जवाब है मेरे पास कि तुम्हारे होने के भ्रम ने मुझे ज़िन्दा रखातुम्हारे होने के भ्रम में मैंने शहर...
God, Abstract Human

कौन ईश्वर

नहीं है तुम्हारी देह में यह रुधिर जिसके वर्ण में अब ढल रही है दिवा और अँधेरा सालता हैरोज़ थोड़ी मर रही आबादियों में रोज़ थोड़ी बढ़ रही...
Haruki Murakami

हारुकी मुराकामी की कहानी ‘सातवाँ आदमी’

कहानी: 'सातवाँ आदमी' लेखक: हारुकी मुराकामी जापानी से अनुवाद: क्रिस्टोफ़र एलिशन हिन्दी अनुवाद: श्रीविलास सिंह"वह मेरी उम्र के दसवें वर्ष के दौरान सितम्बर का एक अपराह्न था...
Aashika Shivangi Singh

आशिका शिवांगी सिंह की कविताएँ

माँ-पिता प्रेमी-प्रेमिका नहीं बन सके मेरी माँ जब भी कहती है— "प्रेम विवाह ज़्यादा दिन नहीं चलते, टूट जाते हैं" तब अकस्मात ही मुझे याद आने लगते...
Lee Min Yung

कविता सरहदों के पार, हक़ीक़त के बीच दरार और कुछ बेतरतीब विचार

वरिष्ठ ताइवानी कवि एवं आलोचक ली मिन-युंग की कविताओं के हिन्दी अनुवाद का संकलन 'हक़ीक़त के बीच दरार' जुलाई में पाठकों तक पहुँचा। साहित्यिक...
Thaharti Sanson Ke Sirhane Se - Ananya Mukherjee

दुःख, दर्द और उम्मीद का मौसम (अनन्य मुखर्जी की कैंसर डायरी)

'ठहरती साँसों के सिरहाने से' अनन्या मुखर्जी की डायरी है जो उन्होंने 18 नवम्बर, 2018 को स्तन कैंसर से लड़ाई हार जाने से पहले...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)