Tag: ईश्वर

Usha Dashora

ईश्वर का रीविज़न

अपराधी को एक बच्चे की पवित्र मुस्कान दो धोखेबाज़ पर उड़ेल दो पंचपरमेश्वर की न्यायप्रियता का डिस्टेम्बर विरोधी के आँगन में उगा दो बिस्मल्ला ख़ाँ की शहनाई वाली मीठी...
God, Mother, Abstract

मैं ईश्वर की हत्या करना चाहता हूँ

बचपन से सिखाया गया ईश्वर विज्ञान से परे है ईश्वर के पास हर मर्ज़ की दवा है अभी, जब ईश्वर की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है तो ईश्वर क्वारेंटीन हो...
God, Mother, Abstract

विस्थापित ईश्वर

जो घटना समझ नहीं आयी, उसे हमने ईश्वर माना और उनसे ईश्वर रचे जो समझ के अधीन हुईं। उसने वर्षा, हवा, पेड़ों में शक्ल पायी, और सीधे सम्बन्ध...
Vishesh Chandra Naman

नयी भाषा

सड़कें, साइकिल और हमारे सजे हुए सपने किसी थकी हुई भाषा के शब्दों की तरह रुक गए हैं, चमत्कार की भाषा की चाह में हमने दूर से...
Kailash Vajpeyi

क्षणिकाएँ : कैलाश वाजपेयी

स्पन्दन कविता हर आदमी अपनी समझ-भर समझता है ईश्वर एक कविता है! मोमिन पूजाघर पहले भी होते थे, हत्याघर भी पहले होते थे हमने यही प्रगति की है दोनों को एक में मिला दिया। आदिम...
God, Mother, Abstract

उसने ईश्वर होने से मना कर दिया

बहुत हुआ अब थम जाओ काट डालो पैने डंक जो तुमने उगा रखे हैं मन की अंदरूनी तहों में बस करो कि जब न रहो तुम बची रहे तुम्हारे हिस्से की ज़मीन त्रिशंकु होना अच्छा नहीं लगेगा...
Mohammad Alvi

मगर मैं ख़ुदा से कहूँगा

मगर मैं ख़ुदा से कहूँगा ख़ुदा-वंद! मेरी सज़ा तू किसी और को दे कि मैंने यहाँ इस ज़मीं पर सज़ाएँ क़ुबूलीं हैं उनकी कि जिनसे मुझे सिर्फ़ इतना तअल्लुक़...
Lockdown Migration, Labour

राहुल बोयल की कविताएँ

1 एक देवी की प्रतिमा है - निर्वसन पहन लिया है मास्क मुख पर जबकि बग़ल में पड़ा है बुरखा देवताओं ने अवसान की घड़ी में भी जारी रखी...
Tribe, Village, Adivasi, Labour, Tribal, Poor

गोबिन्द प्रसाद की कविताएँ

आने वाला दृश्य आदमी, पेड़ और कव्वे— यह हमारी सदी का एक पुराना दृश्य रहा है इसमें जो कुछ छूट गया है मसलन पुरानी इमारतें, खण्डहरनुमा बुर्जियाँ और किसी...
Nishant

कविता की परीक्षा

'Kavita Ki Pareeksha', a poem by Nishant Upadhyay ईश्वर की परिभाषा क्या है? हर धर्म के अपने ईश्वर होते हैं। धर्म की परिभाषा क्या है? धर्म ईश्वर से...
God, Mother, Abstract

ईश्वर की खोज

गर्दन उठाकर ईश्वर को आकाश में खोजने वालों तुमने ही धरती को रक्तपात दिया है तुमने ही हमें मज़हबों में बाँट दिया है तुम ही करते आए हो अपराध और...
Harshita Panchariya

भ्रम

स्मृतियों में सहेजने के तौर पर दिए गए सभी चुम्बन पीड़ा में ऐसे भ्रम बनाए रखते हैं, मानो आँख खुलते ही ईश्वर सामने नज़र आ जाएगा। यूँ बंद आँखों के...

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James Joyce

अरबी बाज़ार

Short Story: 'Araby' Writer: James Joyce अनुवाद: उपमा ऋचा लेखक परिचय: आयरलैण्ड के रचनाकार जेम्स जॉयस (1882-1941) ने सिर्फ़ कहानियाँ ही नहीं लिखीं, उपन्यास भी लिखे और साहित्य...
Abdul Bismillah

शरीफ़ लोग

पत्थर के कोयले से जो धुआँ उठता है उसमें एक शहर महकता है सुना है उस शहर में शरीफ़ लोग रहते हैं लेकिन शराफ़त का धुएँ से क्या नाता है यह समझ...
Old Woman

खुखड़ी

"अरे देखो रे रिंकिया... दिन दहाड़े वो बुढ़िया खुखड़ी चुरा कर भाग रही है, पकड़ो पकड़ो उसे... खुखड़ी छीन कर वापस रख लेना।" रिंकिया...
Mahesh Anagh

नहीं-नहीं, भूकम्प नहीं है

नहीं नहीं, भूकम्प नहीं है नहीं हिली धरती। सरसुतिया की छान हिली है कागा बैठ गया था फटी हुई चिट्ठी आयी है ठनक रहा है माथा सींक सलाई हिलती है सिंदूर माँग...
Adil Mansuri

सियाह चाँद के टुकड़ों को मैं चबा जाऊँ

सियाह चाँद के टुकड़ों को मैं चबा जाऊँ सफ़ेद सायों के चेहरों से तीरगी टपके उदास रात के बिच्छू पहाड़ चढ़ जाएँ हवा के ज़ीने से तन्हाइयाँ...
Nirmala Putul

तुम्हें आपत्ति है

तुम कहते हो मेरी सोच ग़लत है चीज़ों और मुद्दों को देखने का नज़रिया ठीक नहीं है मेरा आपत्ति है तुम्हें मेरे विरोध जताने के तरीक़े पर तुम्हारा मानना है कि इतनी...
Ishrat Afreen

मेनोपॉज़

अजीब-सी इत्तिला थी वो जिसे मैं ख़ुद से न जाने कब से छुपा रही थी अजब ख़बर थी कि जिसकी बाबत मैं ख़ुद से सच बोलते हुए...
Safia Akhtar, Jaan Nisar Akhtar

सफ़िया का पत्र जाँ निसार अख़्तर के नाम

भोपाल, 15 जनवरी, 1951 अख़्तर मेरे, पिछले हफ़्ते तुम्हारे तीन ख़त मिले, और शनीचर को मनीआर्डर भी वसूल हुआ। तुमने तो पूरी तनख़्वाह ही मुझे भेज दी... तुम्हें...
God, Mother, Abstract

पेटपोंछना

दराज़ में रखी नींद की गोलियों से भरी शीशी को मैंने फिर से देखा, थोड़ी देर देखता रहा... फिर धीरे से दराज़ बंद कर दी।...
Alok Dhanwa

भागी हुई लड़कियाँ

1 घर की ज़ंजीरें कितना ज़्यादा दिखायी पड़ती हैं जब घर से कोई लड़की भागती है क्या उस रात की याद आ रही है जो पुरानी फ़िल्मों में बार-बार आती थी जब...
Harivanshrai Bachchan

प्रश्न मेरे, उत्तर बच्चन के

साक्षात्कार: हरिवंशराय बच्चन (बच्चन रचनावली खंड 9 से) साक्षात्कारकर्ता: कुमारी विभा सक्सेना, 1979 प्रश्न— आपने अपनी आत्मकथा के प्रथम भाग 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' में...
Amarkant

एक थी गौरा

लम्बे क़द और डबलंग चेहरे वाले चाचा रामशरण के लाख विरोध के बावजूद आशू का विवाह वहीं हुआ। उन्होंने तो बहुत पहले ही ऐलान...
Dagh Dehlvi

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था वो क़त्ल करके मुझे हर किसी से पूछते हैं ये...
Woman, River

यह नदी

यह नदी रोटी पकाती है हमारे गाँव में। हर सुबह नागा किए बिन सभी बर्तन माँजकर, फिर हमें नहला-धुलाकर नैन ममता आँजकर यह नदी अंधन चढ़ाती है हमारे गाँव में। सूखती-सी क्यारियों में फूलगोभी बन हँसे, गंध धनिए में सहेजे, मिर्च...
Murdahiya - Tulsiram

तुलसीराम: ‘मुर्दहिया’ व ‘मणिकर्णिका’

मुर्दहिया "हम अंजुरी मुँह से लगाए झुके रहते, और वे बहुत ऊपर से चबूतरे पर खड़े-खड़े पानी गिराते। वे पानी बहुत कम पिलाते थे किंतु...
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अरे कहीं देखा है तुमने मुझे प्यार करने वालों को? मेरी आँखों में आकर फिर आँसू बन ढरने वालों को? सूने नभ में आग जलाकर यह सुवर्ण-सा हृदय गलाकर जीवन-संध्या...
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यह एक अजीब बात है कि इधर साहित्यकार में शिकवों और शिकायतों का शौक़ बढ़ता जा रहा है। उसे शिकायत है कि गवर्नर और...
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Om Prakash Valmiki

तब तुम क्या करोगे?

यदि तुम्हें धकेलकर गाँव से बाहर कर दिया जाए पानी तक न लेने दिया जाए कुएँ से दुत्कारा-फटकारा जाए चिलचिलाती दोपहर में कहा जाए तोड़ने को पत्थर काम के बदले दिया जाए खाने...
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ज़िन्दगी से डरते हो

ज़िन्दगी से डरते हो! ज़िन्दगी तो तुम भी हो, ज़िन्दगी तो हम भी हैं! ज़िन्दगी से डरते हो? आदमी से डरते हो आदमी तो तुम भी हो, आदमी...
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