Tag: ईश्वर

Naval Shukla

ईश्वर से अधिक हूँ

एक पूरी आत्मा के साथ एक पूरी देह हूँ मैं जिसे धारण करते हैं ईश्वर कभी-कभी मैं एक आत्मा एक देह एक ईश्वर से अधिक हूँ। ईश्वर युगों में सुध...
Yogesh Dhyani

कविताएँ: दिसम्बर 2020

स्वाद शहर की इन अंधेरी झोपड़ियों में पसरा हुआ है मनो उदासियों का फीकापन दूसरी तरफ़ रंगीन रोशनियों से सराबोर महलनुमा घरों में उबकाइयाँ हैं ख़ुशियों के अतिरिक्त मीठेपन से धरती घूमती तो है मथनी की तरह...
Nida Fazli

‘शहर में गाँव’ से नज़्में

यहाँ प्रस्तुत सभी नज़्में निदा फ़ाज़ली के सम्पूर्ण काव्य-संकलन 'शहर में गाँव' से ली गई हैं। यह संकलन मध्य-प्रदेश उर्दू अकादमी, भोपाल के योगदान...
Sanwar Daiya

‘उस दुनिया की सैर के बाद’ से कविताएँ

'उस दुनिया की सैर के बाद' से अपने ही रचे को पहली बरसात के साथ ही घरों से निकल पड़ते हैं बच्चे रचने रेत के घर घर बनाकर घर-घर खेलते...
God, Abstract Human

मृगतृष्णा

जीवन उतना ही जिया जितना मृत्यु नींद में विश्राम करती है। नींद के बाहर एक विशाल मरुथल है लोग कहते हैं— मरुथल के पार कोई ईश्वर रहता है मैं अनवरत...
God, Abstract Human

नदी सरीखे कोमल ईश्वर की रक्षा हेतु

हम जिस भी सर्वोच्च सत्ता के उपासक हैं इत्तेला कर दें उसे शीघ्रातिशीघ्र कि हमारी प्रार्थना और हमारे ईश्वर के मध्य घुसपैठ कर गए हैं धर्म के बिचौलिए बेमतलब...
Naveen Sagar

मेरी दस्तक

यह दस्‍तक हत्‍यारे की है दूर किसी घर में उठी चीख़ों के बाद। हर तरफ़ दम साधे घरों के निहत्‍थे सन्‍नाटे भर हैं हुआ क्‍या आख़िर कि चीख़ों के इस संसार...
Dinkar - D H Lawrence, Aatma Ki Aankhein

ईश्वर की देह

किताब 'आत्मा की आँखें' से कविता: डी एच लॉरेंस अनुवाद: रामधारी सिंह दिनकर ईश्वर वह प्रेरणा है, जिसे अब तक शरीर नहीं मिला है। टहनी के भीतर अकुलाता हुआ फूल, जो...
Woman carrying earth, God

ईश्वर(?) को नसीहत

स्त्रियों को बताया गया— "नर और मादा एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं" उन्होंने पूछा कि अगल-बग़ल के या आगे-पीछे के और उन्हें जवाब मिला कि विन्यास...
Yogesh Dhyani

उलट-फेर

सबसे ज़्यादा असुरक्षित हैं वो जो रहते हैं सबसे छोटी झोंपड़ी में सबसे दुर्दान्त अपराधियों के पास हैं सबसे महँगे वकील सबसे कपटी नेता का चरित्र सबसे साफ़ है मीडिया में सबसे ज़्यादा...
Man, Sleep, Painting, Abstract, Closed Eyes, Face

ईश्वर आख़िर जागता क्यों नहीं?

सूरज चोरी चला गया है, एक जिस्म से ग़ायब है रीढ़ की हड्डी। सत्य, अहिंसा, न्याय, शांति सब किसी परीकथा के पात्र हैं शायद और उम्मीद गूलर के...
Aarsi Prasad Singh

बैलगाड़ी

जा रही है गाँव की कच्ची सड़क से लड़खड़ाती बैलगाड़ी! एक बदक़िस्मत डगर से, दूर, वैभवमय नगर से, एक ही रफ़्तार धीमी, एक ही निर्जीव स्वर से, लादकर आलस्य, जड़ता...

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Naval Shukla

ईश्वर से अधिक हूँ

एक पूरी आत्मा के साथ एक पूरी देह हूँ मैं जिसे धारण करते हैं ईश्वर कभी-कभी मैं एक आत्मा एक देह एक ईश्वर से अधिक हूँ। ईश्वर युगों में सुध...
Viren Dangwal

हमारी नींद

मेरी नींद के दौरान कुछ इंच बढ़ गए पेड़ कुछ सूत पौधे अंकुर ने अपने नाम-मात्र, कोमल सींगों से धकेलना शुरू की बीज की फूली हुई छत, भीतर से। एक मक्खी...
Rituraj

मरूँगा नहीं

दूसरे-दूसरे कारणों से मारा जाऊँगा बहुत अधिक सुख से अकठिन सहज यात्राविराम से या फिर भीतर तक बैठी जड़ शान्ति से लेकिन नहीं मरूँगा कुशासन की कमीनी चालों से आए दिन के...
Kedarnath Singh

घास

दुनिया के तमाम शहरों से खदेड़ी हुई जिप्सी है वह तुम्हारे शहर की धूल में अपना खोया हुआ नाम और पता खोजती हुई आदमी के जनतन्त्र में घास के सवाल...
Naukar Ki Kameez - Vinod Kumar Shukla

विनोद कुमार शुक्ल – ‘नौकर की कमीज़’

विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास 'नौकर की कमीज़' से उद्धरण | Quotes from 'Naukar Ki Kameez', a novel by Vinod Kumar Shukla   "घर बाहर जाने...
Bhagwat Rawat

इतनी बड़ी मृत्यु

आजकल हर कोई, कहीं न कहीं जाने लगा है हर एक को पकड़ना है चुपके-से कोई ट्रेन किसी को न हो कानों-कान ख़बर इस तरह पहुँचना है...
Couple, Silhouette

आख़िरी बार मिलो

आख़िरी बार मिलो ऐसे कि जलते हुए दिल राख हो जाएँ कोई और तक़ाज़ा न करें चाक-ए-वादा न सिले, ज़ख़्म-ए-तमन्ना न खिले साँस हमवार रहे, शमा की लौ...
Yellow Flower, Offering, Sorry, Apology

वहाँ देखने को क्या था

मैं उन इलाक़ों में गया जहाँ मकान चुप थे उनके ख़ालीपन को धूप उजला रही थी हवा शान्त, मन्थर— अपने डैने चोंच से काढ़ने को बेचैन थी लोग जा चुके हैं उन्हें कुछ...
River

नदी

1 घर से निकलकर कभी न लौट पाने का दुःख समझने के लिए तुम्हें होना पड़ेगा एक नदी! 2 नदियों की निरन्तरता को बाँध उनका पड़ाव निर्धारित कर मनुष्य ने देखा है ठहरी हुई नदियों...
Maya Angelou

माया एंजेलो की कविता ‘उदित हूँ मैं’

माया एंजेलो की कविता 'And Still I Rise' का अनुवाद कड़वे छली मृषा से इतिहास में तुम्हारे तुम्हारी लेखनी से मैं न्यूनतम दिखूँगी धूल-धूसरित भी कर सकते...
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