Tag: ईश्वर

Mohammad Alvi

आख़िरी दिन की तलाश

ख़ुदा ने क़ुरआन में कहा है कि लोगो मैंने तुम्हारी ख़ातिर फ़लक बनाया फ़लक को तारों से चाँद-सूरज से जगमगाया कि लोगो मैंने तुम्हारी ख़ातिर ज़मीं बनायी ज़मीं के सीने पे नदियों की लकीरें...
Mohammad Alvi

मैं और तू

ख़ुदा-वंद... मुझ में कहाँ हौसला है कि मैं तुझसे नज़रें मिलाऊँ तिरी शान में कुछ कहूँ तुझे अपनी नज़रों से नीचे गिराऊँख़ुदा-वंद... मुझ में कहाँ हौसला है कि...
Usha Dashora

ईश्वर का रीविज़न

अपराधी को एक बच्चे की पवित्र मुस्कान दोधोखेबाज़ पर उड़ेल दो पंचपरमेश्वर की न्यायप्रियता का डिस्टेम्बर विरोधी के आँगन में उगा दो बिस्मल्ला ख़ाँ की शहनाई वाली मीठी...
God, Abstract Human

मैं ईश्वर की हत्या करना चाहता हूँ

बचपन से सिखाया गया ईश्वर विज्ञान से परे है ईश्वर के पास हर मर्ज़ की दवा हैअभी, जब ईश्वर की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है तो ईश्वर क्वारेंटीन हो...
God, Abstract Human

विस्थापित ईश्वर

जो घटना समझ नहीं आयी, उसे हमने ईश्वर माना और उनसे ईश्वर रचे जो समझ के अधीन हुईं। उसने वर्षा, हवा, पेड़ों में शक्ल पायी, और सीधे सम्बन्ध...
Vishesh Chandra Naman

नयी भाषा

सड़कें, साइकिल और हमारे सजे हुए सपने किसी थकी हुई भाषा के शब्दों की तरह रुक गए हैं, चमत्कार की भाषा की चाह में हमने दूर से...
Kailash Vajpeyi

क्षणिकाएँ : कैलाश वाजपेयी

स्पन्दन कविता हर आदमी अपनी समझ-भर समझता हैईश्वर एक कविता है! मोमिन पूजाघर पहले भी होते थे, हत्याघर भी पहले होते थेहमने यही प्रगति की है दोनों को एक में मिला दिया। आदिम...
God, Abstract Human

उसने ईश्वर होने से मना कर दिया

बहुत हुआ अब थम जाओ काट डालो पैने डंक जो तुमने उगा रखे हैं मन की अंदरूनी तहों मेंबस करो कि जब न रहो तुम बची रहे तुम्हारे हिस्से की ज़मीन त्रिशंकु होना अच्छा नहीं लगेगा...
Mohammad Alvi

मगर मैं ख़ुदा से कहूँगा

मगर मैं ख़ुदा से कहूँगाख़ुदा-वंद! मेरी सज़ा तू किसी और को दे कि मैंने यहाँ इस ज़मीं पर सज़ाएँ क़ुबूलीं हैं उनकी कि जिनसे मुझे सिर्फ़ इतना तअल्लुक़...
Lockdown Migration, Labour

राहुल बोयल की कविताएँ

1एक देवी की प्रतिमा है - निर्वसन पहन लिया है मास्क मुख पर जबकि बग़ल में पड़ा है बुरखा देवताओं ने अवसान की घड़ी में भी जारी रखी...
Tribe, Village, Adivasi, Labour, Tribal, Poor

गोबिन्द प्रसाद की कविताएँ

आने वाला दृश्य आदमी, पेड़ और कव्वे— यह हमारी सदी का एक पुराना दृश्य रहा है इसमें जो कुछ छूट गया है मसलन पुरानी इमारतें, खण्डहरनुमा बुर्जियाँ और किसी...
Nishant

कविता की परीक्षा

'Kavita Ki Pareeksha', a poem by Nishant Upadhyayईश्वर की परिभाषा क्या है? हर धर्म के अपने ईश्वर होते हैं।धर्म की परिभाषा क्या है? धर्म ईश्वर से...

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Uski Roti - Mohan Rakesh

उसकी रोटी

बालो को पता था कि अभी बस के आने में बहुत देर है, फिर भी पल्ले से पसीना पोंछते हुए उसकी आँखें बार-बार सड़क...
Abstract, Time

चींटी और मास्क वाले चेहरे

स्वप्न में दिखती है एक चींटी और मास्क वाले चेहरे चींटी रेंगती है पृथ्वी की नाल के भीतर मास्क वाले चेहरे घूमते हैं भीड़ मेंसर से...
Abstract, Woman

जीवन सपना था, प्रेम का मौन

जीवन सपना था आँखें सपनों में रहीं और सपने झाँकते रहे आँखों की कोर से यूँ रची हमने अपनी दुनिया जैसे बचपन की याद की गईं कविताएँ हमारा दुहराया...
Kedarnath Singh

फ़र्क़ नहीं पड़ता

हर बार लौटकर जब अन्दर प्रवेश करता हूँ मेरा घर चौंककर कहता है 'बधाई'ईश्वर यह कैसा चमत्कार है मैं कहीं भी जाऊँ फिर लौट आता हूँसड़कों पर परिचय-पत्र माँगा...
Naveen Sagar

वह मेरे बिना साथ है

वह उदासी में अपनी उदासी छिपाए है फ़ासला सर झुकाए मेरे और उसके बीच चल रहा हैउसका चेहरा ऐंठी हुई हँसी के जड़वत् आकार में दरका है उसकी आँखें बाहर...
Nurit Zarchi

नूइत ज़ारकी की कविता ‘विचित्रता’

नूइत ज़ारकी इज़राइली कवयित्री हैं जो विभिन्न साहित्य-सम्बन्धी पुरस्कारों से सम्मानित हैं। प्रस्तुत कविता उनकी हीब्रू कविता के तैल गोल्डफ़ाइन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी...
Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
Naresh Mehta

कवच

मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
Vishesh Chandra Naman

मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
Gaurav Bharti

कविताएँ: नवम्बर 2021

यात्री भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है? इसका एक ही जवाब है मेरे पास कि तुम्हारे होने के भ्रम ने मुझे ज़िन्दा रखातुम्हारे होने के भ्रम में मैंने शहर...
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