Tag: Grief

Ramesh Ranjak

जिस दिन से आए

जिस दिन से आए उस दिन से घर में यहीं पड़े हैं दुःख कितने लंगड़े हैं! पैसे, ऐसे अलमारी से फूल चुरा ले जाएँ बच्चे जैसे फुलवारी से दंड नहीं दे पाता यद्यपि— रंगे हाथ...
Maan bahadur Singh

आदमी का दुःख

राजा की सनक ग्रहों की कुदृष्टि मौसमों के उत्पात बीमारी, बुढ़ापा, मृत्यु, शत्रु, भय प्रिय-बिछोह कम नहीं हैं ये दुःख आदमी पर! ऊपर से जब घर जलते हैं तो आदमी के दिन...
Umashankar Joshi

आत्मसंतोष

नहीं, नहीं, अब नहीं हैं रोनी हृदय की व्यथाएँ जो जगत् व्यथा देता है, उसी जगत् को अब रचकर गाथाएँ व्यथा की वापस नहीं देनी हैं। दुःख...
Leeladhar Jagudi

दुःख की बात

निरर्थकताओं को सार्थकताओं में बदलने के लिए हम संघर्ष करते हैं बदहालियों को ख़ुशहालियों में बदलने के लिए हम संघर्ष करते हैं क्योंकि कमियाँ जब अभाव बन जाती...
Raghuvir Sahay

हमने यह देखा

यह क्या है जो इस जूते में गड़ता है यह कील कहाँ से रोज़ निकल आती है इस दुःख को रोज़ समझना क्यों पड़ता है फिर कल...
Nitesh Vyas

कविताएँ – मई 2020

चार चौक सोलह उन्होंने न जाने कितनी योनियाँ पार करके पायी थी दुर्लभ मनुष्य देह पर उन्हें क्या पता था कि एक योनि से दूसरी योनि में पहुँचने के कालान्तर से...
kamleshwar

चप्पल

कहानी बहुत छोटी-सी है। मुझे ऑल इण्डिया मेडिकल इंस्टीटयूट की सातवीं मंज़िल पर जाना था। आई०सी०यू० में गाड़ी पार्क करके चला तो मन बहुत...
Trilochan

हम दोनों हैं दुःखी

हम दोनो हैं दुःखी। पास ही नीरव बैठें, बोलें नहीं, न छुएँ। समय चुपचाप बिताएँ, अपने-अपने मन में भटक-भटककर पैठें उस दुःख के सागर में, जिसके तीर...
Evil, Bad, Hands

दुःख का निरस्तीकरण

वो दुःखी था क्योंकि उसने दुःख का निरस्तीकरण अभी तक देखा नहीं था वो दुःख जो ग़रीब माँ के पेट से जन्म लेता है, हर बार जिसके...
Eye, Wall Art, Grief, Sadness

आश्रय

'Ashraya', Hindi Kavita by Rashmi Saxena नमी खोखला कर देती है भीतर तक, दीवार की हो काठ की हो अथवा हो आत्मा की मन की दीवार पर दुःख द्वारा लगायी सेंध से रिसता...
Leaf painting on Woman's Back, Sad, Depression, Hopeless

अवसाद

अवसाद के लिए दुनिया में कितनी जगह थी पर उसने चुनी मेरे भीतर की रिक्तता मेरे भीतर के दृश्य को देखने वाला कोई नहीं था आख़िर नीले आसमान...
Posham Pa

दुःख

'Dukh', a poem by Amar Dalpura नदियों का अपना दुःख है औरतों का अपना, वे कल-कल बहती हैं कल-कल में सूखती हैं उसे कल का संगीत और कल का समय अन्तःप्रवाही...

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Recent Posts

Suresh Jinagal

सुरेश जिनागल की कविताएँ: अक्टूबर 2020

ललेश्वरी बर्फ़ का सीना चीरकर उगे चिनार के नीचे बैठकर आग का कोई गीत गाती स्त्री सदियों की बर्फ़ को पिघला रही है उसकी ज़िद, उसका साहस...
Ganesh Shankar Vidyarthi

धर्म की आड़

इस समय, देश में धर्म की धूम है। उत्‍पात किये जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर और ज़िद की जाती है,...
Ibne Insha

सब माया है

सब माया है, सब ढलती-फिरती छाया है इस इश्क़ में हमने जो खोया, जो पाया है जो तुमने कहा है, 'फ़ैज़' ने जो फ़रमाया है सब माया...
Sandeep Nirbhay

चिलम में चिंगारी और चरखे पर सूत

मेरे बच्चो! अपना ख़याल रखना आधुनिकता की कुल्हाड़ी काट न दे तुम्हारी जड़ें जैसे मोबाइलों ने लोक-कथाओं और बातों के पीछे लगने वाले हँकारों को काट दिया है जड़ों सहित वर्तमान...
Kunwar Narayan

अबकी अगर लौटा तो

अबकी अगर लौटा तो बृहत्तर लौटूँगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बाँधे लोहे की पूँछें नहीं जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को तरेरकर न देखूँगा...
Poonachi - Perumal Murugan

पेरुमल मुरुगन – ‘पूनाची’

पेरुमल मुरुगन के उपन्यास 'पूनाची' से उद्धरण | Quotes by Perumal Murugan from 'Poonachi'   "मैं इंसानों के बारे में लिखने के प्रति आशंकित रहता हूँ;...
Leeladhar Jagudi

अपने अन्दर से बाहर आ जाओ

हर चीज़ यहाँ किसी न किसी के अन्दर है हर भीतर जैसे बाहर के अन्दर है फैलकर भी सारा का सारा बाहर ब्रह्माण्ड के अन्दर है बाहर सुन्दर...
Dhoomil

पटकथा

जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग़ में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; ख़ून के अँधेर में दवा का ट्रेडमार्क बन गया...
Venu Gopal

मेरा वर्तमान

मैं फूल नहीं हो सका। बग़ीचों से घिरे रहने के बावजूद। उनकी हक़ीक़त जान लेने के बाद यह मुमकिन भी नहीं था। यों अनगिन फूल हैं वहाँ। लेकिन मुस्कुराता हुआ...
Kedarnath Agarwal

हमारी ज़िन्दगी

हमारी ज़िन्दगी के दिन, बड़े संघर्ष के दिन हैं। हमेशा काम करते हैं, मगर कम दाम मिलते हैं। प्रतिक्षण हम बुरे शासन, बुरे शोषण से पिसते हैं। अपढ़, अज्ञान, अधिकारों से वंचित...
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