Tag: Hindi Story

Usne Kaha Tha

उसने कहा था

'तेरी कुड़माई हो गई?' का जवाब मिला 'धत!' और युद्ध के मैदान में भी प्रेम वचनों को याद रखा गया। ज़बान पीने को पानी माँगती रही तो मन बार-बार दोहराता रहा 'उसने कहा था'।
Flower, Peace, War, Love

कमाल की प्रेम-कहानी

कमाल ने पूछा, "क्या तुम झुकोगी?"लतीफह ने कहा, “क्या तुम उस झुकाव की कीमत पर खुद झुककर उस झुके हुए पन को अपने हृदय से लगाओगे?”---तुर्की के राष्ट्रपति से एक खबरी का प्रेम और फिर प्रेम और शासन का द्वंद्व! जहाँ 'पुष्प की अभिलाषा' जैसी कविताएँ आज भी हमारा मन राष्ट्र-प्रेम से भर देती हैं, वहीं माखनलाल चतुर्वेदी की यह कहानी, प्रेम को शासन से एक हाथ ऊपर रख कर देखती है। पढ़िए :)
Man and Woman, Restaurant, Cafe, Couple, Lovers

लवर्स

"मेरे एक हाथ में सिगरेट है, जिसे मैंने अभी तक नहीं जलाया। दूसरा हाथ टाँगों के नीचे दबा है। मैं आगे झुककर उसे दबाता हूँ। मुझे लगता है, जब तक वह मेरे बोझ के नीचे बिलकुल नहीं भिंच जाएगा तब तक ऐसे ही काँपता रहेगा।"

टोबा टेक सिंह

'टोबा टेक सिंह' - सआदत हसन मंटोबंटवारे के दो-तीन साल बाद पकिस्तान और हिंदुस्तान की सरकारों को ख्याल आया कि साधारण कैदियों की तरह...
sikka badal gaya krishna sobti

सिक्का बदल गया

जब सिक्का बदल गया, यानी सत्ता बदल गयी तो लोगों का देश, पिंड और समाज भी बदल गया। एक नयी वफादारी उन पर थोप दी गयी और जो कुछ भी उनका अपना था, सब छीन लिया गया।कृष्णा सोबती की यह कहानी बँटवारे और विस्थापन का दुर्भाग्य झेलते लोगों की वेदना और असहाय परिस्थितियों का चित्रण करती है और उनकी सर्वोच्च कहानियों में से एक है।
Nirmal Verma

एक दिन का मेहमान

"वह अंग्रेजी में 'यू' कहती थी, जिसका मतलब प्यार में 'तुम' होता था और नाराजगी में 'आप'। अंग्रेजी सर्वनाम की यह संदिग्धता बाप-बेटी के रिश्ते को हवा में टाँगे रहती थी, कभी बहुत पास, कभी बहुत पराया!"
bhisham sahni

चीफ की दावत

आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ की दावत थी।शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे...
fanda acharya chatursen shastri

फंदा

'फंदा' - आचार्य चतुरसेन शास्त्रीसन् १९१७ का दिसम्बर था। भयानक सर्दी थी। दिल्ली के दरीबे-मुहल्ले की एक तंग गली में एक अँधेरे और गन्दे मकान...
faansi vishwambharnath sharma kaushik

फाँसी

"न्यायी को ऐसा कार्य करने का क्या अधिकार है, जिसमें यदि भूल हो तो उसका सुधार भी उसके वश में न रहे।"फांसी को ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट्स के चोचले की दुर्भाग्यपूर्ण संज्ञा मिलने से पहले भी जाने कितने साहित्यकार इसके विरोध में लिख चुके हैं। उन्हीं में से एक है विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक की यह कहानी 'फांसी'। पढ़िए। :)
haar ki jeet sudarshan

हार की जीत

'हार की जीत' - सुदर्शनमाँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को...
Uday Prakash

तिरिछ

इस घटना का संबंध पिताजी से है। मेरे सपने से है और शहर से भी है। शहर के प्रति जो एक जन्म-जात भय होता...
Gyan Ranjan

पिता

बूढ़े पिता अपना ज़िन्दगी जीने का ढंग नहीं छोड़ते। नई चीज़ें पसंद नहीं आती और पुराने से लगाव नहीं छूटता, चाहे कितनी भी असुविधा हो! नई और पुरानी पीढ़ी के इसी खिंचाव को रेखांकित करती है ज्ञानरंजन की कहानी 'पिता'। पढ़िए। :)

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