Tag: Hindi Vyangya

Sharad Joshi

शेर की गुफा में न्याय

"जो पशु न्याय की तलाश में शेर की गुफा में घुसा, उसका अंतिम फैसला कितनी शीघ्रता से हुआ, इसे सब जानते हैं।"

रसोई-घर और पाखाना

लघुकथा: 'रसोई-घर और पाखाना' - हरिशंकर परसाई गरीब लड़का है। किसी तरह हाई स्‍कूल परीक्षा पास करके कॉलेज में पढ़ना चाहता है। माता-पिता नहीं...
Ramnarayan Upadhyay

भेड़-भेड़िये, भाई-भाई!

'भेड़-भेड़िये, भाई-भाई!' - रामनारायण उपाध्याय बोले - कहानी कहो। कहा - कहानी सुनो, एक था राजा। बोले - राजाओं की कहानी हमें नहीं सुननी है, वे...
Lazy, Bed, Sleep

आलस्य-भक्त

"मनुष्य-शरीर आलस्य के लिए ही बना है। यदि ऐसा न होता, तो मानव-शिशु भी जन्म से मृग-शावक की भांति छलांगें मारने लगता, किंतु प्रकृति की शिक्षा को कौन मानता है। मनुष्य ही को ईश्वर ने पूर्ण आराम के लिए बनाया है। उसी की पीठ खाट के उपयुक्त चौड़ी बनाई है, जो ठीक उसी से मिल जावे। मनुष्य चाहे पेट की सीमा से भी अधिक भोजन कर ले, उसके आराम के अर्थ पीठ मौजूद है। ईश्वर ने तो हमारे आराम की पहले ही से व्यवस्था कर दी है। हम ही उसका पूर्ण उपयोग नहीं कर रहे हैं।"
shivpujan sahay

प्रोपगंडा-प्रभु का प्रताप

(In collaboration with Acharya Shivpoojan Sahay Smarak Nyas) 'प्रोपगंडा'-प्रभु का प्रताप प्रचंड है - 'जिन्‍हके जस-प्रताप के आगे, ससि मलीन रवि सीतल लागे।' यदि आज...

हिन्दी की आखिरी किताब

"आलोचक : वह असफल लेखक जो किसी भी लेखक को सफल होते नहीं देखना चाहता, आलोचक कहलाता है। वैसे आलोचक खटमलों की तरी लेखक का खून चूस चूसकर मोटाता है।"
Sharad Joshi

जिसके हम मामा हैं

"समस्याओं के घाट पर हम तौलिया लपेटे खड़े हैं।"
Harishankar Parsai

भोलाराम का जीव

'रिटायर्ड' हो चुके भोलाराम ज़िन्दगी से भी रिटायर हो गए हैं लेकिन उनका जीव (आत्मा) यमदूत को चकमा देकर कहीं भाग गया है। नारद मुनि उसकी खोज में निकलते हैं तो अपनी वीणा तक से हाथ धोने के बाद उस जीव को एक ऐसी जगह पाते हैं जो उम्मीद से बाहर थी। कहाँ मिलता है भोलाराम का जीव, जानने के लिए पढ़िए हरिशंकर परसाई का यह व्यंग्य! "महाराज, आजकल पृथ्वी पर इसका व्यापार बहुत चला है। लोग दोस्तों को फल भेजते है, और वे रास्ते में ही रेलवे वाले उड़ा देते हैं। होज़री के पार्सलों के मोज़े रेलवे आफिसर पहनते हैं। मालगाड़ी के डब्बे के डब्बे रास्ते में कट जाते हैं।"
sushil siddharth ek tha raja

एक था राजा

व्यंग्य: 'एक था राजा' - सुशील सिद्धार्थ यह एक सरल, निष्कपट, पारदर्शी और दयालु समय की कहानी है। एक दिन किसी देश का राजा चिंता...
Harishankar Parsai

निंदा रस

"निंदा कुछ लोगों की पूंजी होती है। बड़ा लम्बा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूंजी से। कई लोगों की प्रतिष्ठा ही दूसरों की कलंक-कथाओं के परायण पर आधारित होती है। बड़े रस-विभोर होकर वे जिस-तिस की सत्य कल्पित कलंक-कथा सुनते हैं और स्वयं को पूर्ण संत समझने की तुष्टि का अनुभव करते हैं।"
bhartendu harishchandra

एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली

(लगभग सवा सौ साल पहले की बात है। इस लेखक ने देखा 'एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न'। स्वप्न में उसने बिचारा कि देह लीला समाप्त...

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Asangghosh

‘अब मैं साँस ले रहा हूँ’ से कविताएँ

'अब मैं साँस ले रहा हूँ' से कविताएँ स्वानुभूति मैं लिखता हूँ आपबीती पर कविता जिसे पढ़ते ही तुम तपाक से कह देते हो कि कविता में कल्पनाओं को कवि ने...
Meena Kumari

चाँद तन्हा है, आसमाँ तन्हा

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा दिल मिला है कहाँ-कहाँ तन्हा बुझ गई आस, छुप गया तारा थरथराता रहा धुआँ तन्हा ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं जिस्म तन्हा है...
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सुरेश जिनागल की कविताएँ: अक्टूबर 2020

ललेश्वरी बर्फ़ का सीना चीरकर उगे चिनार के नीचे बैठकर आग का कोई गीत गाती स्त्री सदियों की बर्फ़ को पिघला रही है उसकी ज़िद, उसका साहस...
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