Tag: Housewife

Pallavi Mukherjee

कविताएँ: अगस्त 2020

सुनो मछुआरे सुनो मछुआरे जितने जुगनू तुम्हारी आँखों में चमक रहे हैं न टिम-टिम तारों के जैसे, वे क्या हमेशा चमकते रहते हैं इसी तरह? सुनो मछुआरे जब तुम जाल फेंकते हो सागर में, तुम्हारी बाँहों की मछलियाँ मचल-मचल...
Chandrakant Devtale

घर में अकेली औरत के लिए

तुम्हें भूल जाना होगा समुद्र की मित्रता और जाड़े के दिनों को जिन्हें छल्ले की तरह अँगुली में पहनकर तुमने हवा और आकाश में उछाला था, पंखों में बसन्त...
Poonam Sonchhatra

आत्मसंतुष्टि

और फिर एक समय के पश्चात इच्छाओं का रक्तबीज स्वयं करने लगता है अवसाद की उल्टियाँ सफलता का महिषासुर पैरों तले रौंद दिया जाता है परिवार, प्यार, समाज, उत्तरदायित्व, लोक-लज्जा, संशय, उपेक्षा...
Mamta Kalia

बोलनेवाली औरत

"कल छोले बनेंगे?" "जी छोले बनेंगे।" "पाजामों के नाड़े बदले जाने चाहिए।" "हाँ जी, पाजामों के नाड़े बदले जाने चाहिए।"
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