Tag: Humanity

Gopaldas Neeraj

प्यार की कहानी चाहिए

आदमी को आदमी बनाने के लिए ज़िन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए और कहने के लिए कहानी प्यार की स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए। जो भी कुछ...
Gopaldas Neeraj

आदमी को प्यार दो

सूनी-सूनी ज़िन्दगी की राह है भटकी-भटकी हर नज़र-निगाह है राह को सँवार दो निगाह को निखार दो आदमी हो तुम कि उठो, आदमी को प्यार दो। दुलार दो। रोते हुए...
Dream

अबकी बार जो मिलोगे

मेरी भाषा अलग है तुम्हारी भाषा अलग है, जम्मू से आती हुई गद्दी जनजातियों की चीख़ें लद्दाख की मूक बर्फ़ से ढकी पहाड़ियों को चीरती आदिवासियों की पीर दोनों ने ही महसूस...
Teesri Kavita Ki Anumati Nahi - Sudarshan Sharma, Woman

तरकीबें

मनुष्य बने रहने की ज़्यादा तरकीबें नहीं बची हैं मेरे पास बस मैं कभी-कभी गैंतियों तले गिड़गिड़ाती ज़िन्दगियों पर रो लेती हूँ या फिर ये कि मृत्यु का भौंडा...
Adarsh Bhushan

मनुष्यता की होड़

ग्रीष्म से आकुल सबसे ज़्यादा मनुष्य ही रहा ताप न झेला गया तो पहले छाँव तलाशी फिर पूरी जड़ से ही छाँव उखाड़ ली विटप मौन में अपनी हत्या के मूक साक्षी...
Bhagwat Rawat

वे इसी पृथ्वी पर हैं

इस पृथ्वी पर कहीं न कहीं कुछ न कुछ लोग हैं ज़रूर जो इस पृथ्वी को अपनी पीठ पर कच्छपों की तरह धारण किए हुए हैं बचाए...
Manjula Bist

संक्रमण-काल

1 आज हर देश का शव नितान्त अकेला है हर देश का जीवित-भय एक है एक है धरती एक है आकाश एक है पानी का रंग एक ही स्वाद है आँसू का एक है...
Nishant

कविता की परीक्षा

'Kavita Ki Pareeksha', a poem by Nishant Upadhyay ईश्वर की परिभाषा क्या है? हर धर्म के अपने ईश्वर होते हैं। धर्म की परिभाषा क्या है? धर्म ईश्वर से...

सही क्रम

भूल जाओ किस जाति, किस वर्ण को कहाँ से पैदा किया ब्रह्मा ने और देखो अपनी गंदली आँखें धोकर क्या संयोजन है प्रकृति का? पैर! पूरे बदन में सबसे बलशाली हैं जिराफ़ के...
Maithili Sharan Gupt

मनुष्यता

विचार लो कि मर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी, मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करें सभी। हुई न यों सु-मृत्यु तो वृथा मरे, वृथा...

भूख

कोई बड़ी बात नहीं, महसूस करना किसी भूखे इंसान का दर्द जब भूख से जल रही हों अंतड़ियाँ खुद की बल्कि भरपेट भोजन मिलने पर भी अगर महसूस करते हो किसी...
Bhuvaneshwar

सूर्यपूजा

"थोड़े-से क्लर्क, दुकानदार, दलाल, अ़फसर - और हर एक शहर में बिलकुल ऐसे ही क्लर्क, दुकानदार, दलाल और अफसर हैं, बिलकुल ऐसे ही! यह इतनी डुप्लीकेट कॉपियाँ आखिर क्यों हैं! जब खुद असल ही इतना जलील है। कोई यह यकीन करेगा कि यह एक शहर है जहाँ आदमी रहते हैं - जिन्दा, पूरे-पूरे मनुष्य, जो ह्यूमेनिटी कही जाती है?"

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Devesh Path Sariya

स्त्री से बात

स्त्री से बात करने के लिए निश्चित तौर पर तुम में सलीक़ा होना चाहिए फिर सीखो उसे सुनते जाना उसकी चुप्पी के आयाम तक सीखो ख़ुद भी बातें बनाना कभी चुप हो...
Sahir Ludhianvi

इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए

इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए जुर्मों को ठीक तोले ऐसा न हो कि कल का इतिहासकार बोले मुजरिम से भी ज़ियादा मुंसिफ़ ने ज़ुल्म ढाया कीं पेश...
Agyeya

क्योंकि मैं

क्योंकि मैं यह नहीं कह सकता कि मुझे उस आदमी से कुछ नहीं है जिसकी आँखों के आगे उसकी लम्बी भूख से बढ़ी हुई तिल्ली एक गहरी मटमैली पीली...
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किताब अंश: ‘कौन हैं भारत माता?’ – पुरुषोत्तम अग्रवाल

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