Tag: Humanity

Bhagwat Rawat

मनुष्य

दिखते रहने के लिए मनुष्य हम काटते रहते हैं अपने नाख़ून छँटवाकर बनाते-सँवारते रहते हैं बाल दाढ़ी रोज़ न सही तो एक दिन छोड़कर बनाते ही रहते हैंजो...
Nida Fazli

आदमी की तलाश

अभी मरा नहीं, ज़िन्दा है आदमी शायद यहीं कहीं उसे ढूँढो, यहीं कहीं होगा बदन की अंधी गुफा में छुपा हुआ होगा बढ़ा के हाथ हर इक रौशनी...
Gopaldas Neeraj

प्यार की कहानी चाहिए

आदमी को आदमी बनाने के लिए ज़िन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए और कहने के लिए कहानी प्यार की स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए।जो भी कुछ...
Gopaldas Neeraj

आदमी को प्यार दो

सूनी-सूनी ज़िन्दगी की राह है भटकी-भटकी हर नज़र-निगाह है राह को सँवार दो निगाह को निखार दो आदमी हो तुम कि उठो, आदमी को प्यार दो। दुलार दो। रोते हुए...
Dream

अबकी बार जो मिलोगे

मेरी भाषा अलग है तुम्हारी भाषा अलग है, जम्मू से आती हुई गद्दी जनजातियों की चीख़ें लद्दाख की मूक बर्फ़ से ढकी पहाड़ियों को चीरती आदिवासियों की पीर दोनों ने ही महसूस...
Teesri Kavita Ki Anumati Nahi - Sudarshan Sharma, Woman

तरकीबें

मनुष्य बने रहने की ज़्यादा तरकीबें नहीं बची हैं मेरे पासबस मैं कभी-कभी गैंतियों तले गिड़गिड़ाती ज़िन्दगियों पर रो लेती हूँया फिर ये कि मृत्यु का भौंडा...
Adarsh Bhushan

मनुष्यता की होड़

ग्रीष्म से आकुल सबसे ज़्यादा मनुष्य ही रहा ताप न झेला गया तो पहले छाँव तलाशी फिर पूरी जड़ से ही छाँव उखाड़ ली विटप मौन में अपनी हत्या के मूक साक्षी...
Bhagwat Rawat

वे इसी पृथ्वी पर हैं

इस पृथ्वी पर कहीं न कहीं कुछ न कुछ लोग हैं ज़रूर जो इस पृथ्वी को अपनी पीठ पर कच्छपों की तरह धारण किए हुए हैं बचाए...
Manjula Bist

संक्रमण-काल

1आज हर देश का शव नितान्त अकेला है हर देश का जीवित-भय एक हैएक है धरती एक है आकाश एक है पानी का रंग एक ही स्वाद है आँसू का एक है...
Nishant

कविता की परीक्षा

'Kavita Ki Pareeksha', a poem by Nishant Upadhyayईश्वर की परिभाषा क्या है? हर धर्म के अपने ईश्वर होते हैं।धर्म की परिभाषा क्या है? धर्म ईश्वर से...

सही क्रम

भूल जाओ किस जाति, किस वर्ण को कहाँ से पैदा किया ब्रह्मा ने और देखो अपनी गंदली आँखें धोकर क्या संयोजन है प्रकृति का?पैर! पूरे बदन में सबसे बलशाली हैं जिराफ़ के...
Maithili Sharan Gupt

मनुष्यता

विचार लो कि मर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी, मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करें सभी। हुई न यों सु-मृत्यु तो वृथा मरे, वृथा...

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Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
Saadat Hasan Manto

ख़ुशिया

ख़ुशिया सोच रहा था।बनवारी से काले तम्बाकूवाला पान लेकर वह उसकी दुकान के साथ लगे उस संगीन चबूतरे पर बैठा था जो दिन के...
Naresh Mehta

घर की ओर

वह— जिसकी पीठ हमारी ओर है अपने घर की ओर मुँह किये जा रहा है जाने दो उसे अपने घर।हमारी ओर उसकी पीठ— ठीक ही तो है मुँह यदि होता तो...
Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
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