Tag: IGNOU MA Hindi Study Material (MHD)

Ignou MA Hindi Study Material, Ignou MA Hindi, Ignou Hindi, Ignou Upanyaas evam Kahani. Read here the literature pieces from the syllabus of Ignou MA Hindi.

Nirala, Agyeya, Vasant Ka Agradoot

वसंत का अग्रदूत

''इसीलिए मैं कल से कह रहा था कि सवेरे जल्दी चलना है, लेकिन आपको तो सिंगार-पट्टी से और कोल्ड-क्रीम से फ़ुरसत मिले तब तो! नाम 'सुमन' रख लेने से क्या होता है अगर सवेरे-सवेरे सहज खिल भी न सकें!''
Joseph Macwan

रोटले को नज़र लग गई

सुबह के कामों से फ़ारिग होते ही उसका पहला काम होता रोटला बनाना। वह हर रोज़ गिनकर चार रोटला बनाती; बाजरी के आटे में...

परती ज़मीन

'Parti Zameen', a story by Boya Jangaiah अनुवाद - डॉ. सनाछह-सात सौ घरों के उस गाँव में ज़्यादातर लोगों की ज़िन्दगी मेहनत-मज़दूरी पर निर्भर है।...
Raghuvir Sahay

आत्महत्या के विरुद्ध

समय आ गया है जब तब कहता है सम्पादकीय हर बार दस बरस पहले मैं कह चुका होता हूँ कि समय आ गया है।एक ग़रीबी...
Baburao Bagul

जब मैंने जाति छुपाई

"महार होने से क्या हुआ? दीवार के सामने पड़ी टट्टी-पेशाब की गन्दगी साफ़ नहीं करूँगा।""तुम्हें करनी होगी और बराबर साफ़ करनी होगी।"
Angara - Kusum Meghwal

अंगारा

"हरखू और झमकू को कहते कि अपनी बिटिया को सँभालकर रखे तो उल्टे हमारा ही मुँह बन्द करते कि मेरी लड़की तुम्हारी आँखों में क्यों चुभ रही है?""अब भुगतो!"
Woman

सुमंगली

"ग़रीबों का जन्म ही इसलिए हुआ है। हमारी मेहनत से अट्टलिकाएँ तैयार होती हैं और उसके पुरस्कार के बदले में हमारे शरीर को रौंदा जाता है।"
Girl, Woman

उम्मीद अब भी बाकी है

"तुम्हारी माँ उतनी बुरी नहीं है", बाबा ने उस दिन शाम में कहा, "अभी भी वह हमसे उतना ही प्यार करती है, दो-चार रुपये के लिए उस पंजाबी से सम्बन्ध बनाया हो, यह अलग बात है।"
Baba Nagarjuna

सिंदूर तिलकित भाल

घोर निर्जन में परिस्थिति ने दिया है डाल! याद आता है तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल! कौन है वह व्यक्ति जिसको चाहिए न समाज? कौन है वह एक...
Agyeya

कतकी पूनो

छिटक रही है चाँदनी मदमाती उन्मादिनी कलगी-मौर सजाव ले कास हुए हैं बावले पकी ज्वार से निकल शशों की जोड़ी गयी फलाँगती सन्नाटे में बाँक नदी की जगी चमक...
Chapakal

वैतरणी

मंगतू अपनी बस्ती में एक नल लगाने का आग्रह अपने क्षेत्र के विधायक से करता है, लेकिन उसकी इस फ़रियाद के पूर्ण होने के रास्ते में रुकावट हैं वैतरणी के तट पर खड़े विधायक के स्वर्गीय बड़े भैया!
Mahadevi Verma

टूट गया वह दर्पण निर्मम

टूट गया वह दर्पण निर्मम! उसमें हँस दी मेरी छाया, मुझमें रो दी ममता माया, अश्रु-हास ने विश्व सजाया, रहे खेलते आँखमिचौनी प्रिय! जिसके परदे में 'मैं' 'तुम'! टूट गया वह...

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एक दिन करेंगे बात केवल प्यार की

एक दिन करेंगे बात केवल प्यार की!तुम कहोगे—रुको तो मैं नहीं दिलाऊँगी याद कि आठ बज गये हैं चाँद चढ़ गया है लौट जाओ घर तुम कि तुम्हारे होने...
Nirmala Putul

आख़िर कहें तो किससे कहें

वे कौन लोग थे सिद्धो-कान्हू जो अँधेरे में सियार की तरह आए और उठा ले गए तुम्हारे हाथों से तीर-धनुष तुम्हारी मूर्ति तोड़ी वे कौन लोग थे, तुम...
Lee Min-yung - Haqeeqat ke beech daraar

ली मिन-युंग की कविताएँ

वरिष्ठ ताइवानी कवि ली मिन-युंग की कविताओं के हिन्दी अनुवाद का संकलन 'हक़ीक़त के बीच दरार' पिछले दिनों प्रकाशित हुआ। अनुवाद देवेश पथ सारिया...
Dunya Mikhail

दुन्या मिखाइल की कविता ‘दी इराक़ी नाइट्स’ के दो अंश

इराक़ी-अमेरिकी कवयित्री दुन्या मिखाइल का जन्म बग़दाद में हुआ था और उन्होंने बग़दाद विश्वविधालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। सद्दाम हुसैन के शत्रुओं...
Dunya Mikhail

दुन्या मिखाइल की कविता ‘मैं जल्दी में थी’

इराक़ी-अमेरिकी कवयित्री दुन्या मिखाइल का जन्म बग़दाद में हुआ था और उन्होंने बग़दाद विश्वविधालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। सद्दाम हुसैन के शत्रुओं...
Muktibodh

मलय के नाम मुक्तिबोध का पत्र

राजनाँद गाँव 30 अक्टूबर प्रिय मलयजीआपका पत्र यथासमय मिल गया था। पत्रों द्वारा आपके काव्य का विवेचन करना सम्भव होते हुए भी मेरे लिए स्वाभाविक नहीं...
People, Society, Faces

वे लोकतंत्र को कम जानते थे

वे बहुत पढ़ी-लिखी नहीं थीं ताइवान में काम मिलने की ख़बर उन्हें सुना उनके पैर छू रहा था जब मैं मुझे आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा— "बेटा सम्भलकर...
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द्वारका भारती की कविताएँ

द्वारका भारती पंजाबी भाषा के सुपरिचित कवि, लेखक व उपन्यासकार हैं और पिछले कई सालों से पंजाबी दलित साहित्य आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे...
Hetu Bhardwaj

छिपाने को छिपा जाता

कल रात मेरे कॉलेज के छात्रों ने मुझे पीट दिया। यों मेरी पिटाई तो ज़्यादा नहीं हुई, लेकिन ज़्यादा हो जाती, शौहरत तब भी...
Yogesh Dhyani

साँझ होती है ठीक उसी की तरह सुन्दर

अँधेरे को कुचलते हुए उदय होता है सूर्य, अँधेरा होता है अस्त सूरज को कोसते हुएदोपहर हमारी खिड़कियों से हमारे भीतर दाख़िल होने की कोशिश में रहती हैधूप...
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