Tag: Jawaharlal Nehru

Jawaharlal Nehru and Indira Gandhi

सरग़ना राजा हो गया

‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’ से – जवाहरलाल नेहरू के ख़त, इंदिरा गाँधी को  अनुवाद: प्रेमचंद बूढ़े सरग़ना ने हमारा बहुत-सा वक़्त ले लिया। लेकिन हम उससे...
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

सरग़ना का इख़्तियार कैसे बढ़ा

'पिता के पत्र पुत्री के नाम' से - जवाहरलाल नेहरू के ख़त, इंदिरा गाँधी को अनुवाद: प्रेमचंद मुझे उम्मीद है कि पुरानी जातियों और उनके बुज़ुर्गों...
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

ख़ानदान का सरग़ना कैसे बना

अनुवाद: प्रेमचंद मुझे भय है कि मेरे ख़त कुछ पेचीदा होते जा रहे हैं। लेकिन अब ज़िन्दगी भी तो पेचीदा हो गई है। पुराने ज़माने...
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

खेती से पैदा हुई तब्दीलियाँ

अनुवाद: प्रेमचंद अपने पिछले ख़त में मैंने कामों के अलग-अलग किए जाने का कुछ हाल बतलाया था। बिल्कुल शुरू में जब आदमी सिर्फ़ शिकार पर...
Jawaharlal Nehru and Indira Gandhi

जबानों का आपस में रिश्ता

"जो कौमें आज दूर-दूर के मुल्कों में रहती हैं और भिन्न-भिन्न भाषाएँ बोलती हैं, वे सब किसी जमाने में एक ही बड़े खानदान की रही होंगी।"
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

आदमियों की कौमें और जबानें

"संस्कृत में आर्य शब्द का अर्थ है शरीफ आदमी या ऊँचे कुल का आदमी। संस्कृत आर्यों की एक जबान थी इसलिए इससे मालूम होता है कि वे लोग अपने को बहुत शरीफ और खानदानी समझते थे। ऐसा मालूम होता है कि वे लोग भी आजकल के आदमियों की ही तरह शेखीबाज थे।"
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

तरह-तरह की कौमें क्योंकर बनीं

"रंग से आदमी की लियाकत, भलमनसी या खूबसूरती पर कोई असर नहीं पड़ता।"
Jawaharlal Nehru

तुम्हारी मुस्कुराहट के असंख्य गुलाब

महामानव मेरे देश की धरती पर तुम लम्बे और मज़बूत डग भरते हुए आए और अचानक चले भी गए! लगभग एक सदी पलक मारते गुज़र गई जिधर से भी...
Jawaharlal Nehru

शुरू के आदमी

"मैंने अपने पिछले खत में लिखा था कि आदमी और जानवर में सिर्फ अक्ल का फर्क है। अक्ल ने आदमी को उन बड़े-बड़े जानवरों से ज्यादा चालाक और मजबूत बना दिया जो मामूली तौर पर उसे नष्ट कर डालते।"
Jawaharlal Nehru

आदमी कब पैदा हुआ

"तुमको यह भी मालूम होगा कि ऊँचे दरजे के जानवरों को अपने बच्चों से थोड़ा-बहुत प्रेम होता है। आदमी सबसे ऊँचे दरजे का जानवर है, इसलिए माँ और बाप अपने बच्चों को बहुत प्यार करते और उनकी हिफाजत करते हैं।"
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

जानवर कब पैदा हुए

"वे अपने को उसी तरह का बना लेते हैं जैसे उनके आसपास की चीजें हों। उनका रंग इसलिए बदल जाता है कि वे अपने को दुश्मनों से बचा सकें, क्योंकि अगर उनका रंग आस-पास की चीजों से मिल जाए तो वे आसानी से दिखाई न देंगे। सर्द मुल्कों में उनकी खाल पर बाल निकल आते हैं जिससे वे गर्म रह सकें। इसीलिए चीते का रंग पीला और धारीदार होता है, उस धूप की तरह, जो दरख्तों से हो कर जंगल में आती है। वह घने जंगल में मुश्किल से दिखाई देता है।"
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

जानदार चीजें कैसे पैदा हुईं

"तुम पूछोगी कि जमीन पर जानदार चीजों का आना कब शुरू हुआ और पहले कौन-कौन सी चीजें आईं। यह बड़े मजे का सवाल है, पर इसका जवाब देना आसान नहीं है। पहले यह देखो कि जान है क्या चीज। शायद तुम कहोगी कि आदमी और जानवर जानदार हैं। लेकिन दरख्तों और झाड़ियों, फूलों और तरकारियों को क्या कहोगी? यह मानना पड़ेगा कि वे सब भी जानदार हैं। वे पैदा होते हैं, पानी पीते हैं, हवा में साँस लेते हैं और मर जाते हैं। दरख्त और जानवर में खास फर्क यह है कि जानवर चलता-फिरता है, और दरख्त हिल नहीं सकते।"

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