Tag: Jyoti Sharma

Jyoti Sharma

बड़भागिनी

1 यहीं-कहीं वृन्दावन की गलियों में भटकती यहाँ-वहाँ कपला गाय जिसका दूध आज भी चौर्य होता संध्याकाल, राधा टीला पर मोर और तोते ही दिखायी देते थे उन्हें पकड़ खाया भूखे बन्दरों ने इन...
Jyoti Sharma

स्त्री, मलिनशय्या

स्त्री प्रेम नापने का अगर मापदंड होता तो स्त्री उसकी इकाई होती टूटी रातें और बिखरे हुए दिन को समेटने का जिम्मा, स्त्री के हिस्से आया अगल-बग़ल बिखरी इच्छाओं को अचक...
Woman with red scarf, Girl

ज्योति शर्मा की कविताएँ

स्त्री मिट्टी, पानी, अग्नि और गति से बनी स्त्री देह, बिछुवे से खींचती पृथ्वी की उर्जा, सिन्दूर से खींचा सारा आकाश सूर्य को टिका लिया माथे पर। ईद के चाँद...
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