Tag: Language

Rahul Boyal

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन एक दिन भाषा भी चुक जाएगी मेरी मैं बस सुना करूँगा तुम्हें कहूँगा कुछ नहीं जबकि याद आएगी तुम्हारी हो जाऊँगा बरी अपने आप से तुम भी...
Language, Chalk Board

विलुप्त भाषा

क्या हुआ होगा उन भाषाओं का जिन्हें बोलने वाले लोग करते गए पलायन और अपने नए ठिकाने पर बोलने लगे नई स्थानीय भाषा छोड़ते गए अपनी माँ-बोली को पिछड़ेपन की...
Fish Eyes, Boy, Girl, Abstract

भाषा बनाम कवि

कितनी अशक्त है वह भाषा जो नहीं कर पाती पक्षियों के कलरव का अनुवाद जिसके व्याकरण में सज़ायाफ़्ता हैं मछलियाँ मेहराबों पर तैर नहीं सकतीं जिसके सीमान्त में रहते...
Kedarnath Singh

मेरी भाषा के लोग

मेरी भाषा के लोग मेरी सड़क के लोग हैं सड़क के लोग, सारी दुनिया के लोग पिछली रात मैंने एक सपना देखा कि दुनिया के सारे लोग एक बस...
Vinoba Bhave

दक्षिण की एक भाषा सीखिए

किताब 'साहित्यिकों से' से - विनोबा भावे से प्रश्नोत्तर का एक अंश प्रश्न— राष्ट्रभाषा पर कुछ कहें। उत्तर— अब हिन्दी को हम राष्ट्रभाषा बना चुके हैं। परिणामतः...
Rajesh Joshi

भूलने की भाषा

पानी की भाषा में एक नदी मेरे बहुत पास से गुज़री। उड़ने की भाषा में बहुत-से परिन्दे अचानक फड़फड़ाकर उड़े, आकाश में बादलों से थोड़ा नीचे। एक चित्र लिपि...
Sharad Billore

भाषा

पृथ्वी के अन्दर के सार में से फूटकर निकलती हुई एक भाषा है बीज के अँकुराने की। तिनके बटोर-बटोरकर टहनियों के बीच घोंसला बुने जाने की भी एक भाषा है। तुम्हारे...
Amar Dalpura

काम, गंगाराम कुम्हार

काम मेरे पास दो हाथ हैं— दोनों काम के अभाव में तन से चिपके निठल्ले लटके रहते हैं! इस देश की स्त्रियों के पास इतने काम हैं— भोर से...
Shamser Bahadur Singh

ईश्वर अगर मैंने अरबी में प्रार्थना की

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/btEtNpgbADs ईश्वर अगर मैंने अरबी में प्रार्थना की, तू मुझसे नाराज़ हो जाएगा? अल्लमह यदि मैंने संस्कृत में संध्या कर ली तो तू मुझे दोज़ख़ में डालेगा? लोग...
Rohit Thakur

भाषा के पहाड़ के उस पार

कितने लोग ख़ाली हाथ घर लौटते हैं इस धरती पर कितना तूफ़ान मचा रहता है उनके अंदर किसी देश का मौसम विभाग इस तूफ़ान की सूचना नहीं देता है एक थके...
Dream

अबकी बार जो मिलोगे

मेरी भाषा अलग है तुम्हारी भाषा अलग है, जम्मू से आती हुई गद्दी जनजातियों की चीख़ें लद्दाख की मूक बर्फ़ से ढकी पहाड़ियों को चीरती आदिवासियों की पीर दोनों ने ही महसूस...
Rajesh Joshi

हमारी भाषा

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/ejZxw4tNpIk भाषा में पुकारे जाने से पहले वह एक चिड़िया थी बस और चिड़िया भी उसे हमारी भाषा ने ही कहा भाषा ही ने दिया उस...

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Silent, Quiet, Silence, Woman, Shut, Do not speak, Taboo

अंधेरे के नाख़ून

एक छोर से चढ़ता आता है रोशनी को लीलता हुआ एक ब्लैक होल, अंधेरे का नश्तर चीर देता है आसमान का सीना, और बरस पड़ता है बेनूर...
Adarsh Bhushan

लाठी भी कोई खाने की चीज़ होती है क्या?

हमारे देश में लाठियाँ कब आयीं यह उचित प्रश्न नहीं कहाँ से आयीं यह भी बेहूदगी भरा सवाल होगा लाठियाँ कैसे चलीं कहाँ चलीं कहाँ से कहाँ तक चलीं क्या पाया...
Raghuvir Sahay

चेहरा

चेहरा कितनी विकट चीज़ है जैसे-जैसे उम्र गुज़रती है वह या तो एक दोस्त होता जाता है या तो दुश्मन देखो, सब चेहरों को देखो पहली बार जिन्हें...
Kumar Ambuj

कुछ समुच्चय

स्मृति की नदी वह दूर से बहती आती है, गिरती है वेग से उसी से चलती हैं जीवन की पनचक्कियाँ वसंत-1 दिन और रात में नुकीलापन नहीं है मगर...
Gaurav Bharti

हम मारे गए

हमें डूबना ही था और हम डूब गए हमें मरना ही था और हम मारे गए हम लड़ रहे थे कई स्तरों पर लड़ रहे थे हमने निर्वासन का दंश...
Rahul Sankrityayan

तुम्हारे धर्म की क्षय

वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है। एक पूरब मुँह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर। एक...
Melancholy, Sadness, Night

लाखन सिंह की कविताएँ

1 जीना किसी सड़ी लाश को खाने जैसा हो गया है, हर एक साँस के साथ निगलता हूँ उलझी हुई अंतड़ियाँ, इंद्रियों से चिपटा हुआ अपराधबोध घिसटता है माँस के लोथड़े...
Abstract, Head, Human

शिवम तोमर की कविताएँ

रोटी की गुणवत्ता जिस गाय को अम्मा खिलाती रहीं रोटियाँ और उसका माथा छूकर माँगती रहीं स्वर्ग में जगह अब घर के सामने आकर रम्भियाती रहती है अम्मा ने तो खटिया...
Agyeya

युद्ध-विराम

नहीं, अभी कुछ नहीं बदला है। अब भी ये रौंदे हुए खेत हमारी अवरुद्ध जिजिविषा के सहमे हुए साक्षी हैं; अब भी ये दलदल में फँसी हुई मौत की मशीनें उनके...
Rahul Boyal

जब तुम समझने लगो ज़िन्दगी

वो जहाँ पर मेरी नज़र ठहरी हुई है वहाँ ग़ौर से देखो तुम तुम भी वहाँ हो मेरे साथ मेरे दाएँ हाथ की उँगलियों में उलझी हुई हैं...
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