Tag: life

Kumar Mangalam

कुमार मंगलम की कविताएँ

रात के आठ बजे मैं सो रहा था उस वक़्त बहुत बेहिसाब आदमी हूँ सोने-जगने-खाने-पीने का कोई नियत वक़्त नहीं है ना ही वक़्त के अनुशासन में रहा हूँ कभी मैं सो...
Jeewan Ke Din - Prabhat

प्रभात की किताब ‘जीवन के दिन’ पर एक टिप्पणी

कविता संग्रह: 'जीवन के दिन' - प्रभात टिप्पणी: अमर दलपुरा मनुष्य के पास न कोई दिशासूचक यन्त्र था अपने जीवन के प्रारम्भ में, न भूगोलवेत्ता था, न...
Bird Silhouette

ज़िन्दगी

'Zindagi', a poem by Jaiprakash Leelwan बन्द कमरों की सीलन के भीतर क्रोध के कोरस का नाम ज़िन्दगी नहीं होता। घर से दफ़्तर और दफ़्तर से घर के बीच का सफ़र...
God, Abstract Human

जीवन में उत्सव

मौत हमेशा से मुझे बेहद रोचक जान पड़ी है। बचपन में जब पहली बार अपने एक फूफाजी की मौत की ख़बर सुनी तो चुप...
Martha Medeiros

रफ़ता-रफ़ता यूँ ही किसी रोज़ मर न जाओ

कविता: रफ़ता-रफ़ता यूँ ही किसी रोज़ मर न जाओ ('You Start Dying Slowly') कवयित्री: मार्था मेदेरुस (Martha Medeiros) अनुवाद: असना बद्र तो रफ़ता-रफ़ता यूँ ही किसी रोज़...
Room, Door, Window

प्रक्रिया

'Prakriya', Hindi poem by Pranjal Rai ठोकर खाकर गिरा एक बच्चा, किन्तु धूल झाड़ते हुए जो उठा वह एक समझदार आदमी था। इस बार वह और ज़्यादा ताक़त...
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