Tag: memories

Rahul Tomar

राहुल तोमर की कविताएँ

प्रतीक्षा उसकी पसीजी हथेली स्थिर है उसकी उँगलियाँ किसी बेआवाज़ धुन पर थिरक रही हैंउसका निचला होंठ दाँतों के बीच नींद का स्वाँग भर जागने को विकल लेटा हुआ...
Pranjal Rai

विदा ले चुके अतिथि की स्मृति

मैं विदा ले चुका अतिथि (?) हूँ अब मेरी तिथि अज्ञात नहीं, विस्मृत है। मेरे असमय प्रस्थान की ध्वनि अब भी करती है कोहरे के कान में...
Pallavi Mukherjee

कविताएँ: जुलाई 2021

लौट आओ तुम तुम रहती थीं आकाश में बादलों के बीच तारों के संग चाँद के भीतर खुली धूप में हरी घास में फूलों में झरते हरसिंगार में गौरैयों की आवाज़ में कोयल की मीठी...
Sanjay Chhipa

संजय छीपा की कविताएँ

1 कुरेदता हूँ स्मृतियों की राख कि लौट सकूँ कविता की तरफ़एक नितान्त ख़ालीपन में उलटता-पलटता हूँ शब्दों को एक सही क्रम में जमाने की करता हूँ कोशिशज़िन्दगी की बेतरतीबी...
Manish Kumar Yadav

स्मृतियाँ एक दोहराव हैं

उत्कण्ठाओं के दिन नियत थे प्रेम के नहीं थेचेष्टाओं की परिमिति नियत थी इच्छाओं की नहीं थीपरिभाषाएँ संकुचन हैं जो न कभी प्रेम बांध पायीं न देहस्मृतियाँ एक...
Adriatik Jace

ऐड्रियाटिक जेस की कविताएँ

एड्रिआटिक जेस विश्व पटल पर उभरते युवा अल्बेनियन कवि और ब्लॉगर हैं। उनका जन्म परमेट अल्बानिया में 1971 में हुआ, जहाँ अपनी स्कूली शिक्षा...
Ahmad Faraz

मुझसे पहले

मुझसे पहले तुझे जिस शख़्स ने चाहा, उसने शायद अब भी तेरा ग़म दिल से लगा रक्खा हो एक बेनाम-सी उम्मीद पे अब भी शायद अपने ख़्वाबों के...
Leeladhar Jagudi

तुम अब स्‍मृति हो

पूरे जंगल भर के पखेरू थे तुम्‍हारे अकेले प्राण जो इतने पंख गिरा गए चारों ओर तुम्‍हारी ही तुम्‍हारी फड़फड़ाहट हैनदी के दोनों ओर जैसे मेला...
Rahul Sankrityayan

स्‍मृतियाँ

घुमक्कड़ असंग और निर्लेप रहता है, यद्यपि मानव के प्रति उसके हृदय में अपार स्‍नेह है। यही अपार स्‍नेह उसके हृदय में अनंत प्रकार...
Rahi Masoom Raza

मैं इक फेरीवाला

मैं इक फेरीवाला बेचूँ यादें सस्ती-महँगी, सच्ची-झूठी, उजली-मैली, रंग-बिरंगी यादें होंठ के आँसू आँखों की मुस्कान, हरी फ़रियादें मैं इक फेरी वाला बेचूँ यादें!यादों के रंगीन ग़ुबारे नीले-पीले, लाल-गुलाबी रंग-बिरंगे धागों के...
Rose, Flower, Hand

स्मृतियाँ अब भी प्रतीक्षारत हैं

स्मृतियाँ चंदनवन की मलय में घुल स्वयं बन जाना चाहती थीं सुगंध, एहसासों की तरलता छिड़क हरा-भरा कर देना चाहती थीं चंदनवन का हर पीला पत्तामलयतरु की फुनगी पर...
Holding Hands, Couple, Love, Together

साथ-साथ, जाड़े की एक शाम

साथ-साथ हमने साथ-साथ आँखें खोलीं, देखा बालकनी के उस पार उगते सूरज को, टहनी पर खिले अकेले गुलाब पर साथ-साथ ही पानी डाला, पीली पड़ चुकी पत्तियों को आहिस्ता से किया विलग, साथ-साथ देखी टीवी पर मिस्टर एण्ड मिसिज़...

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अनुवाद: पंखुरी सिन्हा सामान्यता मुझे बाल्टिक समुद्र का भूरा पानी याद है! 16 डिग्री तापमान की अनंत ऊर्जा का भीतरी अनुशासन!बदसूरत-सी एक चीख़ निकालती है पेट्रा और उड़ जाता है आकाश में बत्तखों...
Naomi Shihab Nye

नेओमी शिहैब नाय की कविता ‘जो नहीं बदलता, उसे पहचानने की कोशिश’

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