Tag: Moon

Moon

एक तारा-विज्ञानी का प्रेम

उसे चाँद ख़ूबसूरत लगता है जबकि मुझे लुभाती हैं तारों की क़तारें तारे मेरी रोज़ी हैं जब अंधेरी रात में तारे खिलें और मेरी दूरबीन के पहलू में गिरें तो...
Parveen Shakir

पूरा दुःख और आधा चाँद

पूरा दुःख और आधा चाँद हिज्र की शब और ऐसा चाँद दिन में वहशत बहल गई रात हुई और निकला चाँद किस मक़्तल से गुज़रा होगा इतना सहमा-सहमा चाँद यादों...
Parveen Shakir

चाँद-रात

गए बरस की ईद का दिन क्या अच्छा था चाँद को देखके उसका चेहरा देखा था फ़ज़ा में 'कीट्स' के लहजे की नरमाहट थी मौसम अपने रंग...
Moon, Flower

नील गगन का चाँद

वह नील गगन का चाँद उतर धरती पर आएगा, तुम आज धरा के गीतों को फिर से मुस्‍काने दो। वे गीत कि जिनसे जेठ दुपहरी भी...
Adil Mansuri

सियाह चाँद के टुकड़ों को मैं चबा जाऊँ

सियाह चाँद के टुकड़ों को मैं चबा जाऊँ सफ़ेद सायों के चेहरों से तीरगी टपके उदास रात के बिच्छू पहाड़ चढ़ जाएँ हवा के ज़ीने से तन्हाइयाँ...
Moon

जीवन का दृश्य

गाँव में चाँद नीम के ऊपर से पीपल के पत्ते जैसा पहाड़ों के पार चमकता है, बच्चे गेंद जैसी आँखों से चाँद का गोल होना देखते हैं और दादी की...
Harivansh Rai Bachchan

मुझसे चाँद कहा करता है

मुझसे चाँद कहा करता है। चोट कड़ी है काल प्रबल की, उसकी मुस्कानों से हल्की, राजमहल कितने सपनों का पल में नित्य ढहा करता है। मुझसे चाँद कहा...
Rahul Boyal

चाँद की मानिन्द चाँद

'Chand Ki Manind Chand', Hindi Kavita by Rahul Boyal समय के शरीर पर लुढ़कती साँझ में मुलायम ख़्वाहिशों सी चहलक़दमी करते हुए लिए हाथ में प्याला चाय...
Deepak Jaiswal

हम अपने घोंसलों में चाँद रखते हैं

'Hum Apne Ghonslon Mein Chand Rakhte Hain', a poem by Deepak Jaiswal चाँद हर बार सफ़ेद नहीं दिखता उनींदी आँखों से बहुत बार वह लाल दिखता...
Moon

चाँद

'Chand', a poem by Amar Dalpura शाम के झुरमुट में पहाड़ की पीठ को चूमता हुआ सूरज चले जाता है धरती की नींद में वो आती है हरे-भरे खेतों...
Moon

सरकारी नीलामी

'Sarkari Neelami' poem by Vishal Singh बाबा ने उनके हिस्से की, दुनिया पे ताना मेरा घर घर के ऊपर से जाते थे रोंदू बादल भी ख़ुश होकर घर की यारी थी...
Meeraji

चाँद सितारे क़ैद हैं सारे

'Chand Sitare Qaid Hain Sare Waqt Ke Bandikhaane Mein', a ghazal by Meeraji चाँद सितारे क़ैद हैं सारे वक़्त के बंदी-ख़ाने में लेकिन मैं आज़ाद हूँ...

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Gorakh Pandey

फूल

फूल हैं गोया मिट्टी के दिल हैं धड़कते हुए बादलों के ग़लीचों पे रंगीन बच्चे मचलते हुए प्यार के काँपते होंठ हैं मौत पर खिलखिलाती हुई चम्पई ज़िन्दगी जो कभी मात...
Balli Singh Cheema

तय करो किस ओर हो तुम

तय करो किस ओर हो तुम, तय करो किस ओर हो आदमी के पक्ष में हो या कि आदमख़ोर हो। ख़ुद को पसीने में भिगोना ही...
Sahir Ludhianvi

ये दुनिया दो-रंगी है

ये दुनिया दो-रंगी है एक तरफ़ से रेशम ओढ़े, एक तरफ़ से नंगी है एक तरफ़ अंधी दौलत की पागल ऐश-परस्ती एक तरफ़ जिस्मों की क़ीमत रोटी...
Harry Potter - Voldemort

सपने में वॉल्डेमॉर्ट

आप जानते हैं रॉल्फ़ फ़ाइंस को? "तुम जानते हो कौन... वो, जिसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए!" हाँ वही, जो वॉल्डेमॉर्ट बने थे हैरी पॉटर में जिसे देख काँप उठती थी बच्चों...
Bolna Hi Hai - Ravish Kumar

रवीश कुमार – ‘बोलना ही है’

रवीश कुमार की किताब 'बोलना ही है' से उद्धरण | Quotes from 'Bolna Hi Hai' (The Free Voice), a book by Ravish Kumar (चयन एवं...
Rahul Boyal

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन एक दिन भाषा भी चुक जाएगी मेरी मैं बस सुना करूँगा तुम्हें कहूँगा कुछ नहीं जबकि याद आएगी तुम्हारी हो जाऊँगा बरी अपने आप से तुम भी...
Abstract painting, Woman

मैं अंततः वहीं मुड़ जाऊँगी

अभी किसी नाम से न पुकारना तुम मुझे पलटकर देखूँगी नहीं, हर नाम की एक पहचान है पहचान का एक इतिहास और हर इतिहास कहीं न कहीं रक्त...
Arun Prakash

नहान

मैं जब उस मकान में नया पड़ोसी बना तो मकान मालिक ने हिदायत दी थी—"बस तुम नहान से बचकर रहना। उसके मुँह नहीं लगना।...
Suhag Ke Nupur - Amritlal Nagar

किताब अंश: ‘सुहाग के नुपूर’ – अमृतलाल नागर

हिन्दी के मशहूर साहित्यकार अमृतलाल नागर का जन्म 17 अगस्त 1916 को हुआ था। उन्होंने नाटक, रेडियोनाटक, रिपोर्ताज, निबन्ध, संस्मरण, अनुवाद, बाल साहित्य आदि...
Rajesh Joshi

अन्धेरे के बारे में कुछ वाक्य

अन्धेरे में सबसे बड़ी दिक़्क़त यह थी कि वह किताब पढ़ना नामुमकिन बना देता था। पता नहीं शरारतन ऐसा करता था या किताब से डरता था उसके मन...
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