Tag: माँ

Adriatik Jace

ऐड्रियाटिक जेस की कविताएँ

एड्रिआटिक जेस विश्व पटल पर उभरते युवा अल्बेनियन कवि और ब्लॉगर हैं। उनका जन्म परमेट अल्बानिया में 1971 में हुआ, जहाँ अपनी स्कूली शिक्षा...
Priyamvad

पलंग

यह कहानी यहाँ सुनें: https://youtu.be/gubxYm5WgY4उस साल जब पलाश की नंगी छितरी शाखों पर पहला फूल खिला, तब माँ पूरी तरह स्वस्थ थी। जब पूरा पेड़...
U. R. Ananthamurthy

माँ

"रात होते ही ख़ूँख़ार जानवर घूमने लगते थे। फिर भी उस क्रूर माँ ने बच्चे के पूरी रोटी के लिए ज़िद करने पर उसे आँगन...
Mangalesh Dabral

माँ का नमस्कार

जब माँ की काफ़ी उम्र हो गई तो वह सभी मेहमानों को नमस्कार किया करती जैसे वह एक बच्ची हो और बाक़ी लोग उससे बड़े।वह हरेक...
Gaurav Bharti

कविताएँ: दिसम्बर 2020

1हॉस्टल के अधिकांश कमरों के बाहर लटके हुए हैं ताले लटकते हुए इन तालों में मैं आने वाला समय देख रहा हूँमैं देख रहा हूँ कमरों के भीतर अनियन्त्रित...
Malay

माँ ने जन्म दिया

मैं अदना-सा आदमी मैंने पाया, इतना प्यारमैंने माँ की कथरी ओढ़कर ठण्ड के हिमालयों को झींगुर या कीड़ों की तरह रेंगते देखा सूपे की हवा ने उतार दिया गर्मियों...
Muktibodh

प्रश्‍न

एक लड़का भाग रहा है। उसके तन पर केवल एक कुर्ता है और एक धोती मैली-सी! वह गली में भाग रहा है मानो हज़ारों...
Woman Feet

तुम्हारे पाँव

तुम ढूँढ लेती थीं जाने कैसे हर छोटी-छोटी चीज़ में ख़ुशी, उदासियों को बंद कर दिया था तुमने अपनी रसोई में माचिस के एक डिब्बे में और जलाते हुए...
Woman with tied child, Mother, Kid

बिचौलियों के बीज

'लोकप्रिय आदिवासी कविताएँ' सेमाँ! मेरा बचपन तो तुम्हारी पीठ पर बँधे बीता— जब तुम घास का भारी बोझ सिर पर रखकर शहर को जाती थीं।जब भी आँखें खोलता घास की...
Woman walking on street

माँ के हिस्से की आधी नींद

माँ भोर में उठती है कि माँ के उठने से भोर होती है ये हम कभी नहीं जान पाएबरामदे के घोंसले में बच्चों संग चहचहाती गौरैया माँ को...
Kedarnath Singh

सुई और तागे के बीच में

माँ मेरे अकेलेपन के बारे में सोच रही है पानी गिर नहीं रहा पर गिर सकता है किसी भी समय मुझे बाहर जाना है और माँ चुप है...
Subhadra Kumari Chauhan

यह कदम्ब का पेड़

यह कदम्ब का पेड़ | Yah Kadamb Ka Pedयह कदम्ब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे। मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥ले...

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Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
premchand

सवा सेर गेहूँ

किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा ग़रीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी...
Unsocial Network - Dilip Mandal, Geeta Yadav

वे आपके बारे में बहुत ज़्यादा जानते हैं (किताब अंश: अनसोशल नेटवर्क)

'अनसोशल नेटवर्क' किताब भारत के विशिष्ट सन्दर्भों में सोशल मीडिया का सम्यक् आकलन प्रस्तुत करती है। जनसंचार का नया माध्यम होने के बावजूद, सोशल...
Prayers, Joined Hands

अनुत्तरित प्रार्थना

'परिवर्तन प्रकृति का नियम है' यह पढ़ते-पढ़ाते वक़्त मैंने पूरी शिद्दत के साथ अपने रिश्तों में की स्थिरता की कामनाप्रकृति हर असहज कार्य भी पूरी सहजता के...
Women sitting

अठन्नी, चवन्नी और क्रमशः

इस बार उन्हें नहीं था मोह स्वर्ण-मृग का फिर भी खींची गई थीं लक्ष्मण रेखाएँवे पढ़ीं, आगे बढ़ीं लक्ष्मण रेखाएँ लाँघकर रावण से जा भिड़ींगूँजते आए थे स्वर नेपथ्य...
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