Tag: माँ

Priyamvad

पलंग

उस साल जब पलाश की नंगी छितरी शाखों पर पहला फूल खिला, तब माँ पूरी तरह स्वस्थ थी। जब पूरा पेड़ दहकता जंगल बन...
U. R. Ananthamurthy

माँ

"रात होते ही ख़ूँख़ार जानवर घूमने लगते थे। फिर भी उस क्रूर माँ ने बच्चे के पूरी रोटी के लिए ज़िद करने पर उसे आँगन...
Mangalesh Dabral

माँ का नमस्कार

जब माँ की काफ़ी उम्र हो गई तो वह सभी मेहमानों को नमस्कार किया करती जैसे वह एक बच्ची हो और बाक़ी लोग उससे बड़े। वह हरेक...
Gaurav Bharti

कविताएँ: दिसम्बर 2020

1 हॉस्टल के अधिकांश कमरों के बाहर लटके हुए हैं ताले लटकते हुए इन तालों में मैं आने वाला समय देख रहा हूँ मैं देख रहा हूँ कमरों के भीतर अनियन्त्रित...
Malay

माँ ने जन्म दिया

मैं अदना-सा आदमी मैंने पाया, इतना प्यार मैंने माँ की कथरी ओढ़कर ठण्ड के हिमालयों को झींगुर या कीड़ों की तरह रेंगते देखा सूपे की हवा ने उतार दिया गर्मियों...
Muktibodh

प्रश्‍न

एक लड़का भाग रहा है। उसके तन पर केवल एक कुर्ता है और एक धोती मैली-सी! वह गली में भाग रहा है मानो हज़ारों...
Woman Feet

तुम्हारे पाँव

तुम ढूँढ लेती थीं जाने कैसे हर छोटी-छोटी चीज़ में ख़ुशी, उदासियों को बंद कर दिया था तुमने अपनी रसोई में माचिस के एक डिब्बे में और जलाते हुए...
Woman with tied child, Mother, Kid

बिचौलियों के बीज

'लोकप्रिय आदिवासी कविताएँ' से माँ! मेरा बचपन तो तुम्हारी पीठ पर बँधे बीता— जब तुम घास का भारी बोझ सिर पर रखकर शहर को जाती थीं। जब भी आँखें खोलता घास की...
Woman walking on street

माँ के हिस्से की आधी नींद

माँ भोर में उठती है कि माँ के उठने से भोर होती है ये हम कभी नहीं जान पाए बरामदे के घोंसले में बच्चों संग चहचहाती गौरैया माँ को...
Kedarnath Singh

सुई और तागे के बीच में

माँ मेरे अकेलेपन के बारे में सोच रही है पानी गिर नहीं रहा पर गिर सकता है किसी भी समय मुझे बाहर जाना है और माँ चुप है...
Subhadra Kumari Chauhan

यह कदम्ब का पेड़

यह कदम्ब का पेड़ | Yah Kadamb Ka Ped यह कदम्ब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे। मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥ ले...
Woman carrying earth, God

पृथ्वी

1 पृथ्वी! एक बुढ़िया की मटमैली-सी गठरी है जो भरी हुई है कौतूहल से उम्मीद से असमंजस से प्रेम से। जिसमें कुछ न कुछ खोजने के बाद भी हर बार बचा ही रह जाता है कुछ...

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Gorakh Pandey

फूल

फूल हैं गोया मिट्टी के दिल हैं धड़कते हुए बादलों के ग़लीचों पे रंगीन बच्चे मचलते हुए प्यार के काँपते होंठ हैं मौत पर खिलखिलाती हुई चम्पई ज़िन्दगी जो कभी मात...
Balli Singh Cheema

तय करो किस ओर हो तुम

तय करो किस ओर हो तुम, तय करो किस ओर हो आदमी के पक्ष में हो या कि आदमख़ोर हो। ख़ुद को पसीने में भिगोना ही...
Sahir Ludhianvi

ये दुनिया दो-रंगी है

ये दुनिया दो-रंगी है एक तरफ़ से रेशम ओढ़े, एक तरफ़ से नंगी है एक तरफ़ अंधी दौलत की पागल ऐश-परस्ती एक तरफ़ जिस्मों की क़ीमत रोटी...
Harry Potter - Voldemort

सपने में वॉल्डेमॉर्ट

आप जानते हैं रॉल्फ़ फ़ाइंस को? "तुम जानते हो कौन... वो, जिसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए!" हाँ वही, जो वॉल्डेमॉर्ट बने थे हैरी पॉटर में जिसे देख काँप उठती थी बच्चों...
Bolna Hi Hai - Ravish Kumar

रवीश कुमार – ‘बोलना ही है’

रवीश कुमार की किताब 'बोलना ही है' से उद्धरण | Quotes from 'Bolna Hi Hai' (The Free Voice), a book by Ravish Kumar (चयन एवं...
Rahul Boyal

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन

मैं शब्द खो दूँगा एक दिन एक दिन भाषा भी चुक जाएगी मेरी मैं बस सुना करूँगा तुम्हें कहूँगा कुछ नहीं जबकि याद आएगी तुम्हारी हो जाऊँगा बरी अपने आप से तुम भी...
Abstract painting, Woman

मैं अंततः वहीं मुड़ जाऊँगी

अभी किसी नाम से न पुकारना तुम मुझे पलटकर देखूँगी नहीं, हर नाम की एक पहचान है पहचान का एक इतिहास और हर इतिहास कहीं न कहीं रक्त...
Arun Prakash

नहान

मैं जब उस मकान में नया पड़ोसी बना तो मकान मालिक ने हिदायत दी थी—"बस तुम नहान से बचकर रहना। उसके मुँह नहीं लगना।...
Suhag Ke Nupur - Amritlal Nagar

किताब अंश: ‘सुहाग के नुपूर’ – अमृतलाल नागर

हिन्दी के मशहूर साहित्यकार अमृतलाल नागर का जन्म 17 अगस्त 1916 को हुआ था। उन्होंने नाटक, रेडियोनाटक, रिपोर्ताज, निबन्ध, संस्मरण, अनुवाद, बाल साहित्य आदि...
Rajesh Joshi

अन्धेरे के बारे में कुछ वाक्य

अन्धेरे में सबसे बड़ी दिक़्क़त यह थी कि वह किताब पढ़ना नामुमकिन बना देता था। पता नहीं शरारतन ऐसा करता था या किताब से डरता था उसके मन...
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