Tag: माँ

Maa Aur Main - Anuradha Annanya

माँ और मैं

मैंने अपनी माँ में कोई ऐसी महान चीज़ नहीं देखी जो माँओं में देखी जाती है या जिसकी महिमा गायी जाती है, पूजा की जाती है ज़ाहिर है, मैं...
Woman with tied child, Mother, Kid

माँ

चूल्हे में ढकेलती अपने हाथों से आग माँ हमेशा दुःखों को ऐसे ही जलाना जानती थीअपने माथे सजाती थी बड़ा-सा कुमकुम और अपने साड़ी के कोने से उसे...
Mangalesh Dabral

माँ की तस्वीर

घर में माँ की कोई तस्वीर नहीं जब भी तस्वीर खिंचवाने का मौक़ा आता है माँ घर में खोयी हुई किसी चीज़ को ढूँढ रही होती है या...
Chandrakant Devtale

माँ पर नहीं लिख सकता कविता

माँ के लिए सम्भव नहीं होगी मुझसे कविता अमर चिऊँटियों का एक दस्ता मेरे मस्तिष्क में रेंगता रहता है माँ वहाँ हर रोज़ चुटकी-दो-चुटकी आटा डाल देती...
Chandrakant Devtale

माँ जब खाना परोसती थी

वे दिन बहुत दूर हो गए हैं जब माँ के बिना परसे पेट भरता ही नहीं था, वे दिन अथाह कुएँ में छूटकर गिरी पीतल की चमकदार...
Rajesh Joshi

माँ कहती है

हम हर रात पैर धोकर सोते हैं करवट होकर। छाती पर हाथ बाँधकर चित्त हम कभी नहीं सोते।सोने से पहले माँ टुइयाँ के तकिये के नीचे सरौता रख देती है बिना नागा। माँ कहती...
Naveen Sagar

माँ

वह दरवाज़े पर है उस पार से बहुत बड़ी दुनिया पार कर के दस्‍तक जब दरवाज़े पर होगी तब के लिए वह रात-भर दरवाज़े पर है।वह एक भूली हुई...
Padma Sachdev

माँ

बुलाने के लिए कई नाम हैं जिसे पुकारो बोलता भी है पर एक नाम ऐसा है जिसे पुकारो तो सब चौकन्ने हो जाते हैं सभी सोचते हैं ये...
Ishrat Afreen

अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो

मेरी बिटिया तुझे भी मैंने जन्मा था उसी दुःख से कि जिस दुःख से तेरे भाई को जन्मा तुझे भी मैंने अपने तन से वाबस्ता रखा उतनी ही मुद्दत...
Vijay Rahi

शहर से गुज़रते हुए प्रेम, कविता पढ़ना, बेबसी

शहर से गुज़रते हुए प्रेम मैं जब-जब शहर से गुज़रता हूँ सोचता हूँ किसने बसाए होंगे शहर?शायद गाँवों से भागे प्रेमियों ने शहर बसाए होंगे ये वो अभागे थे, जो फिर लौटना...

माँ : छह कविताएँ

1उसने बुना था पृथ्वी को तरह-तरह की ऋतुओं से मेरे लिएमखमली हरी घास बिछायी थी इन्द्रधनुष खिलाए थे उसे मालूम था मुझे सींचने वाले बहुत लोग नहीं हैं इसलिए उसने...
Habib Jalib

माँ

बच्चों पे चली गोली माँ देख के ये बोली— ये दिल के मेरे टुकड़े यूँ रोएँ मेरे होते मैं दूर खड़ी देखूँ ये मुझसे नहीं होगामैं दूर खड़ी देखूँ और अहल-ए-सितम खेलें ख़ूँ...

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