Tag: Naresh Saxena

Naresh Saxena

नीम की पत्तियाँ

कितनी सुन्दर होती हैं पत्तियाँ नीम की ये कोई कविता क्या बताएगीजो उन्हें मीठे दूध में बदल देती है उस बकरी से पूछो, पूछो उस माँ से जिसने...
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ईंटें

तपने के बाद वे भट्टे की समाधि से निकलीं और एक वास्तुविद के स्वप्न में विलीन हो गईंघर एक ईंटों भरी अवधारणा है जी बिलकुल ठीक सुना...
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मछलियाँ

एक बार हमारी मछलियों का पानी मैला हो गया था उस रात घर में साफ़ पानी नहीं था और सुबह तक सारी मछलियाँ मर गई थीं हम यह...
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इस बारिश में

जिसके पास चली गई मेरी ज़मीन उसी के पास अब मेरी बारिश भी चली गईअब जो घिरती हैं काली घटाएँ उसी के लिए घिरती हैं कूकती हैं कोयलें...
Naresh Saxena

तुम वही मन हो कि कोई दूसरे हो

कल तुम्हें सुनसान अच्छा लग रहा था आज भीड़ें भा रही हैं तुम वही मन हो कि कोई दूसरे हो!गोल काले पत्थरों से घिरे उस सुनसान...
Naresh Saxena

पानी क्या कर रहा है

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/LZ5-eEJD_8cआज जब पड़ रही है कड़ाके की ठण्ड और पानी पीना तो दूर उसे छूने से बच रहे हैं लोग तो ज़रा चलकर देख...
Naresh Saxena

बाँसुरी

बाँसुरी के इतिहास में उन कीड़ों का कोई ज़िक्र नहीं जिन्होंने भूख मिटाने के लिए बाँसों में छेद कर दिए थेऔर जब-जब हवा उन छेदों से गुज़रती तो बाँसों का...
Naresh Saxena

गिरना

चीज़ों के गिरने के नियम होते हैं। मनुष्यों के गिरने के कोई नियम नहीं होते। लेकिन चीज़ें कुछ भी तय नहीं कर सकतीं अपने गिरने के बारे...
Naresh Saxena

अजीब बात

जगहें ख़त्म हो जाती हैं जब हमारी वहाँ जाने की इच्छाएँ ख़त्म हो जाती हैं लेकिन जिनकी इच्छाएँ ख़त्म हो जाती हैं वे ऐसी जगहों में बदल जाते हैं जहाँ कोई...
Naresh Saxena

औक़ात

वे पत्थरों को पहनाते हैं लंगोट पौधों को चुनरी और घाघरा पहनाते हैंवनों, पर्वतों और आकाश की नग्नता से होकर आक्रांत तरह-तरह से अपनी अश्लीलता का उत्सव मनाते हैंदेवी-देवताओं...
Naresh Saxena

आधा चाँद माँगता है पूरी रात

पूरी रात के लिए मचलता है आधा समुद्र.. आधे चाँद को मिलती है पूरी रात आधी पृथ्वी की पूरी रात.. आधी पृथ्वी के हिस्से में आता है पूरा सूर्य..आधे...

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डेज़ी रॉकवेल के इंटरव्यू के अंश

लेखक ने अपनी बात कहने के लिए अपनी भाषा रची है, इसलिए इसका अनुवाद करने के लिए आपको भी अपनी भाषा गढ़नी होगी। —डेज़ी...
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प्रिया सारुकाय छाबड़िया की कविताएँ

प्रिया सारुकाय छाबड़िया एक पुरस्कृत कवयित्री, लेखिका और अनुवादक हैं। इनके चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें नवीनतम 'सिंग ऑफ़ लाइफ़ रिवीज़निंग...
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